राजा आनन्द सिंह राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, अल्मोड़ा में ‘बाल प्रहरी’ व भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पाँच दिवसीय बच्चों की लेखन कार्यशाला में बच्चों ने अपनी लेखनी के माध्यम से कई सवाल उठाये। बच्चों ने स्व रचित कविताओं में अल्मोड़ा की बाल मिठाई, गंदगी, ऐतिहासिक जेल को जहाँ स्थान दिया, वहीं ‘हमें अल्मोड़ा शहर में क्या अच्छा नहीं लगता है’ विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में यहाँ की व्यवस्था के बारे में काफी कुछ कहा है।
पाइन वुड स्कूल की कक्षा 6 की छात्रा लिखती हैं कि मैं कहीं जाती हूँ तो अपने शहर की तारीफ करती हूँ, पर अपने दिल की बात मैं ही जानती हूँ। हमारा शहर कूड़े का ढेर हो गया है। कूर्माचल अकादमी की छात्रा प्रेमा तिवारी लिखती हैं कि नगरपालिका ने स्थान-स्थान पर कूडे़दान लगाये हैं, परन्तु लोग अपने घर की गंदगी आदि सड़क पर फेंक देते हैं। ग्रीन फील्ड पब्लिक स्कूल की कक्षा 7 की छात्रा नेहा कर्नाटक लिखती हैं कि लोग पॉलीथीन व प्लास्टिक नालों में फेंक देते हैं, जिस कारण नालियाँ बन्द हो जाती हैं। विवेकानन्द इंटर कॉलेज के कक्षा 8 के छात्र मुकेश कनवाल ने लिखा है कि जिस दिन शहर में मुख्यमंत्री या कोई बड़ा नेता आता है उस दिन सारे शहर की सफाई होती है। काश! इस शहर में रोज ही कोई बड़ा नेता आ जाता। मुकेश एवं कई अन्य बच्चों ने लिखा है कि नगरपालिका ने सफाई कर्मचारी तो नियुक्त किये हैं, परन्तु सफाई कर्मचारी केवल नेताओं के मुहल्ले की ही सफाई करते हैं।
आर्मी स्कूल की वैशाली पाण्डे ने लिखा है कि सारे शहर में आवारा कुत्ते घूमते ही रहते हैं जिस कारण स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे काफी परेशान रहते हैं। विवेकानन्द बालिका विद्या मंदिर की निशा बिष्ट लिखती हैं कि कुत्तों ने सारा शहर गंदा कर रखा है। सुबह घूमने वाले पढ़े-लिखे लोग अपने कुत्ते को बाजार में ही शौच करा देते हैं जो ठीक नहीं है। एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज की कक्षा 6 की छात्रा मीनाक्षी तिवारी ने लिखा है कि अल्मोड़ा के पटाल भी फिसलन वाले हैं। कितने लोग फिसल कर हाथ, पाँव व कमर तुड़वा चुके हैं। कूर्माचल अकादमी की कक्षा 6 की छात्रा दिशा साह लिखती हैं, जब कल मैं घर को जा रही थी तो एक बूढ़ा व्यक्ति बाजार में केले के छिलके पर फिसल गया। उसे उठाने वाले लोग नहीं पहुँचे, परन्तु सारे लोग बूढ़े को देख हँस रहे थे। राजकीय कन्या आदर्श विद्यालय की कक्षा 8 की भूमिका भण्डारी ने लिखा है कि आए दिन शहर में गाड़ियों का जाम लग जाता है। आर्मी स्कूल की वैशाली पाण्डे ने लिखा है कि लोग अपनी गाड़ियाँ मनमाने ढंग से सड़क पर लगा देते हैं जिससे लोगों को तो परेशानी होती ही है, आए दिन एक्सीडेंट भी होते हैं। लोग बाजार में भी तेज गति से गाड़ियाँ चलाते हैं।
एन.बी.यू. स्कूल के कक्षा 7 के छात्र ऋषभ रौतेला ने लिखा है कि अल्मोड़ा के बन्दरों ने स्कूली बच्चों को काफी परेशान कर रखा है। स्कूल आते-जाते उन्हें काफी डर लगता है। कूर्माचल अकादमी की प्रेमा तिवारी लिखती हैं कि कुछ समय पूर्व अल्मोड़ा में बंदर पकड़ने वाले लोग आए। सबसे अधिक बन्दर उनके मुहल्ले में हैं परन्तु बंदर पकड़ने वाले लोग इनके मुहल्ले में नहीं आए। अपनी लेखनी के माध्यम से बच्चों ने कई समस्याएँ उठाई हैं। बच्चों की भावनाओं को समझते हुए शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं जागरूक लोगों को चिन्तन-मनन करना ही चाहिए।