कपकोट तहसील में हुए हजारों कुंतल खाद्यान्न घोटाले में विधायक शेर सिंह गड़िया के दबाव डालने के बाद अंततः प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ एफ.आई.आर. कपकोट के थाने में दर्ज करवा ही दी है। प्रशासन की इस कार्यवाही से हड़कम्प मचा हुआ है। प्रशासन के चरित्र को देखते हुए इन असली दोषियों को सजा मिल पाएगी, यह कह पाना अभी संभव नहीं है।
बागेश्वर की सबसे बड़ी और संवेदनशील तहसील कपकोट राजनैतिक हलचल, भूकम्प, प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही घोटालों के कारण भी चर्चा में बनी रहती है। इस क्षेत्र में बिखरे सौन्दर्य पर धन्नासेठों के साथ अब समाजसेवा का चोला पहने हुए माफिया की भी नजर लगने लगी है। इस तहसील में कोई भी अधिकारी व कर्मचारी अव्वल तो आना नहीं चाहता मगर एक बार आया तो फिर जाना नहीं चाहता। भ्रष्टाचार की ये एक परिपक्व पाठशाला है, जहाँ हर तरह की विधाओं में हर कोई जल्दी पारगंत हो जाता है। कपकोट तहसील में अपार प्राकृतिक वन संपदा तथा ‘चरस’ ने कइयों को धन्नासेठ बनाया है। मगर दूरदराज क्षेत्रों की गरीब जनता का राशन खा जाना तो इन्तिहा हो गई। अब लोग कह रहे हैं कि यह सब तो वर्षों से होता आ रहा है।
इस राशन घोटाले में एस.डी.एम. की जाँच से पता चला कि कुछ राशन कर्मी के विनायक धार तथा कुछ अन्य जगहों में बिखरा पड़ा है। इस बीच कपकोट के विधायक शेर सिंह गड़िया ने पिंडर घाटी में बसे मल्ला दानपुर के गाँवों का रुख किया। उन्होंने पाया कि कई जगह अनाज जंगलों में पड़ा सड़ रहा है और विद्यालयों में कई महीनों से मध्यान्ह भोजन नहीं बन रहा है, क्योंकि वहाँ अनाज ही नहीं पहुँचा। उन्होंने इसकी शिकायत तुरंत जिलाधिकारी को कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। इधर पूर्ति विभाग में इस मामले को लेकर हड़कम्प मच गया। पूर्ति विभाग ने अपनी सफाई देनी शुरू कर दी कि कतिपय कारणों से जिन क्षेत्रों में अनाज नहीं मिला है, जनता उनसे सम्पर्क कर राशन ले ले। जिला प्रशासन के जांच की ढीली रफ्तार के चलते क्षेत्रीय विधायक का पारा चढ़ गया। एक बैठक में उन्होंने डी.एम. को आड़े हाथों लिया। इसके बाद ही जिलाधिकारी के तेवर काफी तल्ख हुए। इस घोटाले में लिप्त अभी तक तत्कालीन खाद्य निरीक्षक शामा क्षेत्र महेन्द्रसिंह, सहायक खाद्यनिरीक्षक प्रकाश ओझा, ठेकेदार मानसिंह, प्रवीण सिंह, हरीश सिंह, जोहारसिंह, ट्रक चालक शेरसिंह, ट्रक मालिक राजेन्द्रसिंह, सस्ता गल्ला विक्रेता चंचल सिंह आदि के खिलाफ कपकोट थाने में धारा 420, 406, 409 तथा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफ.आई.आर. दर्ज कर दी गई है। इस सबके बावजूद जनता को विश्वास नहीं आ रहा कि कोई कार्यवाही होगी। उसका कहना है कि इस घोटाले में एक अनुमान के मुताबिक लाखों के वारे-न्यारे हुए हैं। हल्द्वानी से कपकोट के लिए चला हजारों कुन्तल राशन जिस तरह गायब हुआ, उसकी जाँच के बाबत क्यों चुप्पी साधी गई है ? क्या बड़े मगरमच्छ पकड़ में नहीं आएँगे…..?

























आपकी टिप्पणीयाँ