कमल किशोर तिवारी
23 अप्रेल की रात नैनीताल जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्र में पहाड़ी खिसकने से एक मकान जमींदोज हो गया और एक दलित परिवार के पाँच लोग जिन्दा दफन हो गये। जिलाधिकारी नैनीताल ने घटना की मजिस्ट्रेटी जाँच के आदेश दिये हैं।
घटना धारी ब्लॉक स्थित पहाड़पानी की ग्राम सभा मज्यूली तोक धानारौली की है। बताया गया है कि पेशे से लोहार, 40 वर्षीय मोहनराम के घर के बगल में गाँव के ही चिन्तामणि मेलकानी के भवन की बुनियाद खोदी जा रही थी। इसके लिये मेलकानी ने जे.सी.बी. मशीन लगाई थी। 23 अप्रेल को जे.सी.बी. चालक ने मशीन को भवन निर्माण स्थल तक पहुँचाने के लिये वन पंचायत की करीब 30 मीटर जमीन को खोद कर रास्ता बनाया। शाम तक जे.सी.बी. मशीन मोहन राम के घर के पिछवाड़े तक पहुँच गई और पहाड़ी का कटान करने लगी। देर रात तक कटान का कार्य चलता रहा, ताकि अगले दिन मेलकानी के मकान की बुनियाद डाली जा सके। नाम न बताने की शर्त पर पड़ौसी बताते हैं कि मोहनराम ने मेलकानी के पुत्र से जे.सी.बी. न चलाने का आग्रह किया था। लेकिन जे.सी.बी. मशीन रात नौ बजे तक गरजती रही। संभवतः जे.सी.बी. के चालक को पहाड़ी के कच्चे पड़ जाने का अंदेशा हो गया था और वह तत्काल जे.सी.बी. मशीन और चाभी भीमताल में मशीन के मालिक को सौंप कर खिसक गया। रात किसी वक्त पहाड़ी धसक गई और मोहनराम का मकान उससे दब गया। मोहनराम के अतिरिक्त उसकी पत्नी जानकी देवी (36 वर्ष), पुत्र वेदप्रकाश (18 वर्ष), विनोद कुमार (13 वर्ष) और पुत्री सुनीता (15 वर्ष) जिन्दा दफन हो गये। सुबह पड़ौसियों ने यह हादसा देख कर क्षेत्र के पटवारी को सूचना दी। पटवारी और कानूनगो के अतिरिक्त नौ बजे तक एस.डी.एम. चन्द्र सिंह इमलाल भी घटनास्थल पर पहुँच गये। मगर मृतकों के शव तीसरे पहर तक ही निकाले जा सके। पहाड़पानी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पोस्टमार्टम के बाद उसी दिन शाम को रानीबाग में मृतकों की अन्त्येष्टि कर दी गई। अब इस परिवार में मोहनराम का 20 वर्षीय पुत्र दीवानराम ही बचा है, क्योंकि वह सिडकुल (पंतनगर) में कार्यरत होने के कारण घर पर नहीं था। अब तक न तो जे.सी.बी. मशीन के मालिक का नाम प्रकाश में आया है और न ही किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है।
निर्माण कार्यों के मशीनीकरण से होने वाली पहाड़ की यह शायद पहली बड़ी प्रत्यक्ष दुर्घटना है। सड़कों के निर्माण में तो अब मशीनों की भरमार हो गई है। अब पहाड़ में जो थोड़ा बड़ा ठेकेदार हो जाता है, जिसकी अंटी में पैसों के साथ गाढ़े राजनीतिक सम्बन्ध भी होते हैं, एक अदद बुलडोजर खरीद लेता है। लोक निर्माण विभाग के पास सड़कों के रखरखाव के लिये मजदूरों का गैंग रखने के लिये तो पैसा नहीं है, लेकिन बुलडोजरों का किराया देने के लिये है। अब बुलडोजर भारी मलवा तो हटा सकता है, छोटे-छोटे कंकर तो नहीं हटा सकता, घास तो नहीं छील सकता, किनारे की नालियाँ तो साफ नहीं कर सकता। ‘जहाँ काम आये सुई, कहा करे तलवार ?’ इसीलिये रखरखाव के अभाव में पिछली बरसात में अधिकतर आपदायें मोटर सड़कों के आसपास हुईं और नालियों तथा कल्वर्टों में रुके हुए पानी ने उनमें अपनी भूमिका निभाई। नैनीताल के आसपास बड़े बिल्डरों और भूमाफिया की गतिविधियाँ बढ़ने के बाद जे.सी.बी. मशीनों का उपयोग बढ़ा है। अब सामान्य व्यक्ति भी इनका इस्तेमाल करने लगा है। कायदे-कानून तो अधिकारी ही नहीं जानते, सामान्य व्यक्ति क्या जाने ? जैसे कुछ वर्ष पूर्व तक डायनामाईट से पहाड़ की हड्डियाँ तोड़ी जा रही थीं, अब जे.सी.बी. मशीनों से तोड़ी जा रही हैं।
पहाड़पानी दुर्घटना से इस बड़ी और भविष्य में भयावह रूप लेने वाली समस्या पर ध्यान जा सकता था। मगर यहाँ मरने वाले गरीब और दलित हैं। क्या हमारा समाज इसमें रुचि लेगा?