राज्य आंदोलन के दौरान एक अवधारणा यह भी थी कि जिले, तहसील, ब्लॉक, न्याय पंचायत जैसी छोटी प्रशासनिक इकाइयों से विकास तेज होगा तथा सभी को समान अवसर प्राप्त होंगे। परन्तु राज्य गठन के एक दशक तक इस अवधारणा को गम्भीरता से नहीं लिया गया, सिवाय कुछ नई तहसीलें बनाने के। इधर पिछले कुछ महीनों से प्रतापनगर, नरेन्द्रनगर, गैरसैंण, पुरोला, डीडीहाट, लैंसडाउन, रानीखेत, रामनगर, काशीपुर और चकराता को जिला बनाने की माँग तेज हुई। अभी स्वतंत्रता दिवस को देहरादून के परेड मैदान में मुख्यमंत्री ने डीडीहाट, रानीखेत, कोटद्वार और यमुनोत्री को जिला बनाने की घोषणा क्या की, जिलों को लेकर अन्यत्र चल रहे आंदोलनों में उफान आ गया। फिलहाल तो नए जिलों की घोषणा भाजपा के लिए गले की हड्डी बनते दिखाई दे रही है।
प्रदेश सरकार ने नये जिलों की घोषणा बिना उनका सीमांकन किए ही कर दी हैं। ऐसे में इन जिलों के अस्तित्व में आने में अभी एक-दो महीने तक लग सकते हैं। विभागों को आदेश दिए गए हैं कि वे अपनी कार्यवाही तेजी के साथ करें, क्योंकि विभागों को प्रत्येक जिले में स्वतंत्र रूप से नियुक्तियाँ करनी होंगी। इन जिलों का सीमांकन और उनके मुख्यालय तय करना है।
इस घोषणा के बाद कुछ और जिलों की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो गया है। काशीपुर जिला बनाए जाने की माँग काफी पुरानी है, लेकिन 1995 में उ.प्र.की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने रुद्रपुर को उधमसिंहनगर के नाम से जिला बना दिया तो यह माँग कमजोर पड़ गई। अब काशीपुर को जिला बनाने की माँग को लेकर 16 अगस्त 2011 से आंदोलन चल रहा है। विरोध के स्वर रामनगर के साथ बाजपुर से भी उठ रहे हैं। रामनगर और उससे जुड़े क्षेत्र के लोगों ने रामनगर को काशीपुर में मिलाए जाने का विरोध करते हुए रामनगर को ही जिला बनाने की माँग शुरू कर दी है। 19 अगस्त 2011 को रामनगर में विशाल प्रदर्शन किया गया। रानीखेत नगर पूरी तरह से छावनी क्षेत्र होने के कारण प्रस्तावित जनपद में जिला मुख्यालय की समस्या सामने आने वाली है। यहाँ लम्बे समय से रामगंगा जिला बनाने की माँग हो रही थी। मुख्यालय की परेशानी को देखते हुए ही द्वाराहाट में जिला बनाने की माँग होने लगी है। कुमाऊँ मंडल में गंगावली, खटीमा आदि जिलों की माँग भी समय-समय पर होती रही है।
गढ़वाल मंडल में प्रस्तावित कोटद्वार और यमुनोत्री जिलों में भी सीमांकन और जिला मुख्यालय को लेकर विरोध है। कोटद्वार में भाजपा नेता यह कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि मुख्यालय कहाँ होगा ? उधर मुख्यालय लैंसडाउन में बनाने की माँग को लेकर धरने-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। 23 अगस्त को लैंसडाउन, जहरीखाल, गुमखाल, धोबीधार, चुंडई में बंद और चक्का जाम किया गया। यमुनोत्री में परेशानी यह है कि यहाँ यमुना घाटी या पुरोला के नाम से जिला बनाने की माँग होती रही है। अतः अब 16 अगस्त से जिला मुख्यालय की माँग को लेकर पुरोला में आन्दोलन शुरू हो गया है। 18 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी जीप को आग लगा दी व 19 अगस्त टौंस वन प्रयाग, अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट की गाड़ी व टेलीफोन एक्सचेंज में तोड़फोड़ और आगजनी की। उधर टिहरी जिले के जौनपुर विकास खण्ड को यमुनोत्री जिले से जोड़े जाने का भी वहाँ के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। लोगों का मानना है कि टिहरी मुख्यालय ही जौनपुर से दूर है, यमुनोत्री तो और भी दूर होगा। क्षेत्रीय विधायक खजान दास ने जौनपुर को नए जिले में जोड़े जाने की सम्भावना को खारिज कर दिया है।
सर्वाधिक मायूस नरेन्द्रनगर और प्रतापनगर के लोग हुए। टिहरी बाँध बनने के बाद से प्रतापनगर क्षेत्र के लोगों के लिए नई टिहरी 150 किमी. से भी ज्यादा हो गया है। उन्हें जिला मुख्यालय आने-जाने और काम निपटाने में तीन दिन लग जाते हैं। बाँध बनने से ये लोग कालापानी की सजा काट रहे हैं। टिहरी रियासत की राजधानी और 1948 से टिहरी जिले का मुख्यालय रहे नरेन्द्रनगर को जिला न बनाया जाना किसी की समझ में नहीं आ रहा है। नरेन्द्रनगर जिला बनाने की माँग भी लम्बे समय से चल रही है। जिन छः थाना क्षेत्रों, ऋशिकेष, रायवाला, मुनिकीरेती, रानीपोखरी, नरेन्द्रनगर, और लक्ष्मण झूला को मिलाकर जिला बनाने की माँग की जा रही है, उनमें ऋशिकेष में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल जज, जूनियर डिवीजन, अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा नरेन्द्रनगर में सिविल जज जूनियर डिवीजन, पुलिस लाइन, तहसील मुख्यालय, कोषागार, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक आवास सहित जिले के सभी महत्वपूर्ण विभागों के लिए बिल्डिंग मौजूद हैं। जिला बनाए जाने की माँग को लेकर यहाँ 2 सितम्बर 2011 को विशाल प्रदर्शन भी किया गया। देहरादून जिले में जौनसार को जिला बनाने की माँग भी तेज होने लगी है। 25 अगस्त 2011 को वहाँ बंद एवं चक्का जाम किया गया। उधर चकराता, त्यूंणी और कालसी तहसीलों को मिलाकर चकराता जिला बनाने की माँग की जा रही है। लोगों का कहना है कि जिला बनने से सामाजिक और शैक्षिक रूप से बेहद पिछड़े इस जनजाति क्षेत्र का विकास तेज होगा।