चार धामों, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्तरी और यमुनोत्तरी के खुलने में अभी कुछ सप्ताह का समय बचा हुआ है। मगर बदरी-केदार मंदिर समिति ने अपनी तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस वर्ष के यात्रा काल के लिए समिति द्वारा 26 करोड़ 53 लाख 94 हजार का बजट रखा है। गत दिनों मंदिर समिति की ऋषिकेश में हुई एक बैठक में बदरीनाथ धाम के लिए 14,52,49,264 रुपए तथा केदारनाथ धाम के लिये 12,01,45,620 रुपए मंजूर किये गये। समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट के अनुसार, इस बजट से यात्रियों के लिए निःशुल्क रैन बसेरे और धर्मशालाओं का निर्माण, भण्डारे, गर्म पेयजल की मशीनें लगाने, बद्रीश वन योजना, जड़ी-बूटी संरक्षण, आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन, गरीब यात्रियों को राशन की सुविधा, संस्कृत विद्यालयों के प्रचार-प्रसार और पॉलिथीन उन्मूलन आदि कार्य किए जाएँगे।
उल्लेखनीय है कि इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 9 मई 2011 और केदारनाथ धाम के कपाट 8 मई 2011 को खुलेंगे। मंदिर समिति की योजना कपाट खुलने से पहले यात्रियों के लिए समस्त सुविधा जुटाने की है। सुविधाएँ जुटाने के लिए दोनों धामों में मंदिर समिति के सदस्य इस माह के दूसरे हफ्ते में बदरी-केदार पहुँच जाएँगे, ताकि समय से यात्रियों के लिए सभी सुविधाएँ जुटाई जा सकें। बैठक में मंदिर समिति की विभिन्न स्थानों पर कब्जा की गई सम्पत्तियों और जमीनों का भी मामला उठा। समिति के विधि अधिकारी एस.एस. बर्तवाल ने बताया कि समिति की रामनगर, हल्द्वानी, देहरादून, अल्मोड़ा और लखनऊ आदि में अवैध रूप से कब्जा की गई विभिन्न जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है। कुछ मामलों में वाद न्यायालय में लम्बित हैं।
ग्रीष्म काल के लिए यात्रा की तैयारियों के बीच समिति के लिए यह बात निराशाजनक है कि काफी प्रयासों के बाद भी इस बार शुरू की गई चार धाम की शीतकालीन यात्रा परवान नहीं चढ़ पाई। 27 मार्च 2011 तक गंगोत्री के पूजा स्थल मुखवा में 300, यमुनोतरी के पूजा स्थल खरसाली में 200, बदरीनाथ के पूजा स्थल पाडुंकेश्वर में 350 और केदारनाथ के पूजा स्थल ऊखीमठ में केवल 400 यात्री ही दर्शनों के लिए पहुँचे। चार धाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल भी यात्रियों की बेरुखी को स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि इस वर्ष चार धामों की शीतकाल यात्रा दिसम्बर 2011 माह से शुरू की जाएगी। इस वर्ष यात्रा एक मार्च से शुरू की गई थी।