One response to “यह शिक्षा व्यवस्था तो होनहारों का जीवन लीलने लगी”

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    उत्तराखण्ड बनते ही अध्यापकों का आयात होना शुरु हुआ, जो कभी चाय की दुकान थी, वह बी०एड० कालेज बन गये। आनन-फानन में कुछेक हजार खर्च कर बी०एड० की डिग्री लेकर नौकरी पाये मुंशियों से आप शैक्षणिक माहौल और नैतिकता की अपेक्षा कर भी कैसे सकते हैं?

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