विगत वर्ष अगस्त व सितम्बर के महीने की मूसलाधार बारिश यहाँ के लोगों के लिये मुसीबत बनकर आयी। इस मानसून के दौरान पूरे राज्य में औसतन 1690 मिमी. वर्षा रिकार्ड की गयी, जो सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक थी। भूस्खलन, भूधँसाव, बाढ़ व जलप्लावन ने राज्य के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। भारी जनहानि हुई। इस अवधि में समूचे उत्तराखण्ड में दैवीय आपदा से 220 व्यक्तियों की मृत्यु हुई, 1 व्यक्ति गंभीर व 134 व्यक्ति सामान्य रूप से घायल हुए। मरने वाले सबसे अधिक व्यक्ति अल्मोड़ा (46) व बागेश्वर (25) जनपदों के थे। सामान्य रूप से घायल हुए सबसे ज्यादा 21 व्यक्ति उत्तरकाशी व 16 व्यक्ति टिहरी जनपद के थे। इस आपदा से 1,837 पक्के निजी भवन व 2,689 कच्चे निजी भवन पूर्णतः क्षतिग्रस्त हुए। अंाशिक व तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त पक्के व कच्चे निजी भवनों की संख्या क्रमशः 44,664 व 17,217 थी। जनपद हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी व अल्मोड़ा में निजी मकानों को बहुत क्षति पहुँची। इस आपदा में 907 बड़े व 6,206 छोटे जानवरों की मृत्यु हुई। हरिद्वार, पौड़ी, बागेश्वर, चमोली व रुद्रप्रयाग जनपदों में जानवरों की सबसे अधिक मृत्यु हुई। प्रकृति के इस कहर से तकरीबन 18262.78 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित रही। अवसाद, मलवे, भूस्खलन/हिमस्खलन व नदी का मार्ग बदलने की वजह से तथा सिंचित व असिंचित क्षेत्रों में कृषि, बागवानी व सालाना और सदाबहार फसलों की क्षति के रूप में प्रभावित हुई। प्रभावित खेती में 98.09 प्रतिशत कृषि भूमि छोटे व सीमान्त कृषकों की व शेष 1.91 कृषि भूमि छोटे व सीमान्त कृषकों के अतिरिक्त अन्य की थी। अवसाद आने व नदी के मार्ग बदलने की वजह से ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार व नैनीताल जनपदों की कृषि भूमि सर्वाधिक प्रभावित हुई। जबकि मलवे से उत्तरकाशी व टिहरी जनपद की कृषि भूमि सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। असिंचित क्षेत्रों में कृषि, बागवानी व सालाना फसलों की सबसे अधिक क्षति अल्मोड़ा जनपद (2444.42 हेक्टेयर) में तथा सिंचित क्षेत्र में सर्वाधिक क्षति जनपद हरिद्वार (3316.64 हेक्टेयर) व जनपद उधमसिंह नगर (1004.95 हेक्टेयर) में हुई।
विभागीय परिसम्पतियों में आपदा का कहर
इस आपदा में सार्वजनिक सम्पति का भी काफी नुकसान हुआ। लोक निर्माण विभाग की 13,600 किमी. व शहरी विकास विभाग की 327 किमी. सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं थीं। तकरीबन 936 किमी. पैदल सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई। क्षतिग्रस्त पेयजल योजनाओं में 63 पेयजल योजनाएँ शहरी, 1,846 ग्रामीण व 3,297 ग्राम पंचायत की थीं। सिंचाईं विभाग की 1,813 किमी. नहरें, 476 किमी. बाढ़ सुरक्षा दीवारें और लघु ंिसचाईं विभाग की 3561 किमी. योजनाएँ क्षतिग्रस्त हुईं। ऊर्जा विभाग की 1369 किमी. बिजली की लाइनों व 663 विद्युत उप केन्द्रों को नुकसान पहंुचा। 1312 प्राथमिक विद्यालय आंशिक व 824 विद्यालय पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। 220 अपर प्राथमिक विद्यालय भी क्षतिग्रस्त हुए। राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक कोष (एनसीसीएफ) तथा आपदा राहत कोष (सीआरएफ) के तहत इस आपदा की भरपाई के लिये उत्तराखण्ड को कुल 65484.83 लाख रु. आबंटित हुए। आबंटित धनराशि की यह मात्रा हरिद्वार, पौड़ी व अल्मोड़ा जनपदों के लिये सर्वाधिक, क्रमशः 7570.31, 6569.28 व 6007.12 लाख रु. थी।
केन्द्र सरकार से राहत की वकालत
उत्तराखण्ड शासन ने इस अतिवृष्टि से हुई कुल क्षति का जो आँकलन किया था, उसके अनुसार राज्य को 21200.79 करोड़ रुपये की सार्वजनिक और निजी सम्पत्ति का नुकसान हुआ, जिसे देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा केन्द्र से 21 हजार करोड़ रु. की सहायता देने व इसे आपदाग्रस्त राज्य घोषित करने का अनुरोध किया था। नुकसान का जायजा लेने आये केन्द्रीय दल के समक्ष प्रस्तुत किये गये मेमोरण्डम में क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं की मरम्मत व अन्य कार्यों के लिये तात्कालिक रूप से 2461.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता बतायी गयी। इसमें सिचाईं एवं लघु सिचाईं के लिए 722.60, सार्वजनिक निर्माण विभाग के लिये 460.80, राजस्व विभाग के लिये 297.93, पेयजल के लिये 263.94, गन्ना विभाग के लिये 141.40, शिक्षा विभाग के लिये 130.12, शहरी विभाग के लिये 125.99, विद्युत विभाग के लिये 94.37, पंचायती राज व ग्रामीण विकास के लिये 47.67, वन विभाग के लिये 46.13, पशुधन के लिये 22.76 तथा बागवानी, परिवहन, पर्यटन, स्वास्थ्य, जलागम, पुलिस एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के लिये क्रमशः 21.93, 21.86, 20.00, 12.48, 17.27, 12.23 एवं 1.94 करोड़ रुपयों की आवश्यकता बतायी गयी। शेष 18,739.29 करोड़ रुपयों की जरूरत क्षतिग्रस्त अवसंरचनाओं के पुनर्निर्माण व उनके दीर्घकालीन रखरखाव हेतु बतायी गयी।
निजी क्षति के सापेक्ष प्रभावित परिवारों को देय राहत
आपदा प्रबन्धन विभाग, उत्तराखण्ड शासन की (13 मई 2011 तक की) प्रगति व अनुश्रवण रिपोर्ट के अनुसार मानकों के तहत मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 503.50 लाख रु. व अपंग और सामान्य घायलों को 9 .96 लाख रु0 का अनुग्रह अनुदान दिया जा चुका है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त पक्के/कच्चे मकानों के लिये 1307 43 लाख रु. व आंशिक व तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त पक्के व कच्चे मकानों के लिये 2337.78 लाख रु. गृह अनुदान के रूप में दिये गये। इस आपदा में छोटे व बड़े जानवरों की मृत्यु पर जहाँ प्रभावित परिवारों को 164.42 लाख रु. की राहत दी गयी, वहीं कृषि क्षति के सापेक्ष 1671.37 लाख रु. की राहत दी जा चुकी है।