मैं विगत डेढ़ वर्ष से होटल द मनू महारानी, जो डी.एस.ग्रुप का एक मुख्य हिस्सा है, में हाउसकीपिंग डिपार्टमेंट में प्रशिक्षण ले रहा था। दो माह पूर्व मेरे एक सहयोगी कर्मचारी से होटल उपमहाप्रबंधक प्रमोद बिष्ट द्वारा अकारण इस्तीफा मांग लिया गया। वह एक स्थायी कर्मचारी था और उसे हटाने से पूर्व उपयुक्त कारण बताया जाना तथा तीन वॉर्निंग लैटर देना अनिवार्य था। इस घटना से सभी कर्मचारी हतप्रभ रह गये। हम इस नतीजे पर पहुँचे कि आने वाले समय में होटल प्रबंधन की यह तानाशाही किसी भी कर्मचारी के साथ हो सकती है। अगले दिन हमने प्रमोद बिष्ट से वार्ता की तो उन्होंने अपनी गलती स्वीकारते हुए उस कर्मचारी को पुनः कार्य पर रख लिया। परन्तु इस घटना के उपरान्त प्रमोद बिष्ट का व्यवहार मेरे प्रति कठोर हो गया और उन्होंने मुझे प्रताड़ित करना आरम्भ कर दिया। मेरा विभाग परिवर्तन कर दिया गया, मेरे विभाग के अलावा अन्य विभागों का कार्य भी मुझसे कराया गया और मेरी शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य कराया गया। कई दिनों तक मुझसे लगातार 15 से 16 घंटे तक कार्य कराया गया। इसके बावजूद वह मानसिक रूप से प्रताडि़त करने के लिये ताना कसते थे। बार-बार कहते कि तेरा एटिट्यूड खराब है। उदाहरणार्थ एक कर्मचारी द्वारा मेरे साथ अभ्रदता करने पर मैंने इसकी शिकायत प्रमोद बिष्ट से करी तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उस व्यक्ति से बात कर लूंगा। बाद में मैंने इस सम्बन्ध में उनसे जानकारी लेनी चाही, तो उन्होंने कहा कि मैंने जो करना था कर दिया है। मुझे तुम्हें बताने की जरूरत नहीं है।
दिनांक 11.11.11 को मेरा प्रशिक्षण समय पूर्ण हो रहा था। मैं उत्साहित था कि अगले दिन से मैं इस होटल का स्थायी कर्मचारी बनने वाला हूँ। परन्तु मैं यह जानकर सकते में आ गया कि प्रमोद बिष्ट और प्रबंधक सजंय बाधवा के द्वारा मुझे होटल से निकाल दिया गया है। मैं दुःखी और परेशान होकर प्रमोद बिष्ट से वार्ता करने के लिए गया तो वह अपने वादे से मुकर गये और बहाने बनाने लगे। मैं अपने सहयोगियों, जिनके सामने उन्होंने मुझे नौकरी देने का पक्का वादा किया था, को लेकर फिर प्रमोद बिष्ट के पास गया तो उन्होंने माना कि हाँ मैंने वादा किया था मगर बातचीत आगे बढ़ने पर वह आक्रोशित हो गये और हमसे अपशब्द कहने लगे। जिससे आहत होकर हम वहाँ से चले गये।
मैंने मल्लीताल कोतवाली में इसकी शिकायत दर्ज की, पर उन्होंने अपने रसूख के बल पर मेरी एक न चलने दी। हताश होकर मैं मीडिया के पास गया। मेरा यह अटल विश्वास था कि पत्रकारिता सत्य को समाज के सामने लाती है। ‘उत्तर उजाला’ व ‘हिन्दुस्तान’ ने इस घटना को प्रकाशित किया। बाकी समाचार पत्रों ने मेरी कोई मदद नहीं करी। परन्तु इसके बाद भी होटल प्रबन्धक के कान में जुई तक नहीं रेंगी।
अतः मैं कैलाश सिंह ढैला अपने सहयोगी कर्मचारियों व इस क्षेत्र में अपना भविष्य तलाशने वाले सभी युवाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रशासन से इस मामले की जाँच व कार्यवाही करने की मांग करता हूँ।
कैलाश सिंह ढैला
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