बाहुबली राजनीति के लिहाज से उत्तराखण्ड ज्यादातर राज्यों की अपेक्षा शांत माना जाता है। लेकिन अब अपनी विधायी जिम्मेदारी में फिसड्डी रहने वाले यहाँ के विधायक भी अपनी गुंडागर्दी की बदौलत खुद को स्थापित करना चाहते हैं। पिछले दिनों हरिद्वार जिले के लक्सर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक कुँवर प्रणव सिंह चैम्पियन गोली चलाने के कारण चर्चा में आए। माननीय चैम्पियन 28 अगस्त 2011 को रुड़की के होटल पोलरिस के कमरा नम्बर 210 में रुके थे। आधी रात को उन्होंने एक और कमरा माँगा, लेकिन कोई भी कमरा खाली न होने के कारण होटल कर्मचारियों ने जब अपनी असमर्थता जताई तो विधायक ने कर्मचारियों को गालियाँ देना शुरू कर दिया। विधायक के व्यवहार से घबराए कर्मचारियों ने इसकी सूचना होटल मालिक ध्रुव सिंह को दी तो उन्होंने तत्काल होटल पहुँच कर चैम्पियन साहब को समझाने की कोशिश की। नशे में चूर विधायक ने ध्रुव सिंह की कोई बात नहीं सुनी और उल्टे होटल के कमरे में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। होटल मालिक द्वारा रोकने की कोशिश करने पर विधायक ने उन पर अपने रिवाल्वर से गोली चला दी। होटल मालिक बाल-बाल बचा। सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची पुलिस विधायक से कमरा नहीं खुलवा सकी। अगले दिन 30 अगस्त 2011 को सवेरे पुलिस फिर होटल पहुँची और उसने विधायक का रिवाल्वर अपने कब्जे में ले लिया। ध्रुव सिंह की तहरीर पर विधायक प्रणव व उनके चार अज्ञात साथियों के खिलाफ हत्या के प्रयास और जान से मारने की धमकी की रिपोर्ट दर्ज कर ली। होटल स्वामी के अनुसार, विधायक ने लम्बे समय से उनके होटल के कमरे पर कब्जा किया हुआ है।
पुलिस कार्यवाही से पहले ही विधायक प्रणव 2 सितम्बर 2011 को उच्च न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्थगनादेश ले आए। न्यायालय में उनका तर्क था कि उन्हें राजनैतिक दुर्भावना के तहत झूठा फँसाया जा रहा है। इस स्थगनादेश के बाद पुलिस के हाथ तो बँध गये, मगर विधायक ने 5 सितम्बर 2011 को रुड़की में अपने समर्थकों के साथ रैली निकाली। पुलिस की उपस्थिति में ही उन्होंने कहा कि गोली चलाना उनकी परम्परा रही है। मगर उन्होंने गोली होटल मालिक को मारने की मंशा से नहीं चलाई, चलाई होती तो होटल मालिक निश्चित मर जाता, क्योंकि उनका निशाना अचूक है। विधायक ने सरेआम कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के बच्चे-बच्चे के पास तमंचे हैं। पुलिस उन बच्चों के सामने भागती नजर आती है, वह तो विधायक हैं। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके तो देखे!
इस तरह की धमकी से घबराए होटल मालिक ध्रुव सिंह ने भी उच्च न्यायालय की शरण ली। विधायक के व्यवहार से अवगत होने पर न्यायमूर्ति पी. सी. पंत की एकल पीठ ने गिरफ्तारी पर लगी रोक हटा लिया। अब खुद पर लगे हत्या के प्रयास के आरोप पर विधायक सफाई देते हैं कि छह फुट का कद, 51 इंच का सीना और भीमकाय शरीर होने का अर्थ यह तो नहीं है कि मैं आततायी हूँ। मेरे भीतर भी एक संवेदनशील इंसान रहता है। बस यही बात भाजपा सरकार को पसन्द नहीं है। इसी कारण मेरे खिलाफ षडयंत्र किए जा रहे हैं।
वैसे विधायक प्रणव की गुंडागर्दी का यह पहला मौका नहीं है। पहले भी वह अनेक बार गोलियाँ चला चुके हैं। 28 मई 2003 को लक्सर के कछार क्षेत्र में उन्होंने एक मगरमच्छ पर गोली चलाई। इस मामले में वन विभाग ने उन पर मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद देहरादून में एक बस चालक पर विधायक ने रिवाल्वर ताना। तब भी खूब हो-हल्ला मचा। 10 जनवरी 2009 को एक कार्यक्रम में मंगलौर में विधायक ने कई हवाई फायर किए। इस मामले में 12 जनवरी 2009 को मुकदमा दर्ज हुआ। इन सभी मामलों में विधायक पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। कुछ मामले ठंडे बस्ते में हैं, कुछ न्यायालय में लम्बित।
कुँवर प्रणव की दादागिरी के साथ ही भाजपा के ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल की अभद्रता का मामला भी पिछले दिनों चर्चाओं में रहा। आई.डी.पी.एल. के महाप्रबंधक जी.एस. बेदी के अनुसार गत 30 अगस्त 2011 को विधायक अग्रवाल आई.डी.पी.एल. की जमीन पर अवैध कब्जा करके बैठे तीन-चार सौ लोगों के साथ उनके कार्यालय में आ धमके और अवैध कब्जाधारियों को प्लांट से बिजली देने का दबाव बनाने लगे। उन्होंने जब इस पर इंकार किया तो विधायक अग्रवाल ने उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की और उन्हें धमकी दी। इस मामले में 3 सितम्बर को विधायक और कुछ लोगों के खिलाफ धारा-143, 153, 353, 427, 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यहाँ भी एक महीने बाद भी विधायक के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है।