जी रौं लाख सौ बरीस!
‘नैनीताल समाचार’ के इस होली विशेषांक के लिये काव्य रचनायें जुटाने वाले युवा कवि शिरीष मौर्य जी रौं लाख सौ बरीस! भारत के संविधान का सच्चा चेहरा दिखाने वाले रविकिरण जैन जी रौं लाख सौ बरीस।
जिनकी रचनायें इस अंक में प्रकाशित हो सकीं वे, जो वादा कर के समय पर रचनायें देना भूल गये वे और जिन से कचकचाट कर रचनायें लिखवाने के बावजूद उनकी रचनाओं को हम स्थान नहीं दे पाये, वे सभी रचनाकार जी रौं लाख सौ बरीस!
बिना किसी लोभ-पारिश्रमिक के ‘नैनीताल समाचार’ को अपनी बहुमूल्य रचनायें उपलब्ध करवाने वाले हमारे लेखक/रचनाकार जी रौं लाख सौ बरीस! ‘नैनीताल समाचार’ को अत्यन्त शौक और उत्साह से पढ़ने वाले हमारे पाठक और सही वक्त पर चन्दा देना भूल जाने वाले हमारे सदस्य जी रौं लाख सौ बरीस! उत्तराखंड को विज्ञापनों की मंडी समझने वाले तमाम अखबारों की मौजूदगी के बावजूद हमें विज्ञापन देकर आर्थिक मदद देने वाले हमारे सभी विज्ञापनदाता जी रौं लाख सौ बरीस! आड़े समय में हमारी अपील के उत्तर में हमें छोटे-बड़े चैक/ड्राफ्ट भिजवाने वाले हमारे शुभचिन्तक जी रौं लाख सौ बरीस। नैनीताल समाचार को कतई ल्याख न लगाने वाला उत्तराखंड का सूचना एवं लोक सम्पर्क भाग जी रौ लाख सौ बरीस। ‘नैनीताल समाचार’ को छापने-छपवाने वाले हमारे सहयोगी-सहकर्मी और डाक विभाग वाले जी रौं लाख सौ बरीस!
पूरे प्रदेश में सूखा कर देने वाले इन्द्रदेव जी रौं लाख सौ बरीस। छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने के लिये लड़ रहे सभी अध्यापक/कर्मचारी जी रौं लाख सौ बरीस। उन्हें ठेंगा दिखा देने वाली उत्तराखंड सरकार जी रौं लाख सौ बरीस। सरकारी क्षेत्र के चपरासी से एक बटा दस आमदनी में गुजर-बसर करने वाले और कभी हड़ताल न करने वाले, बल्कि आत्महत्या कर अपने प्राण तज देने वाले देश के करोड़ों किसान जी रौं लाख सौ बरीस। कोशिश करके भी भारत को पूरी तरह बाजारवादी अर्थव्यवस्था न बना सके हमारे प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री जी रौं लाख सौ बरीस। और इस तरह मंदी के झटके से बच निकले हमारे देशवासी जी रौं लाख सौ बरीस।
बदहाल दुनिया में उम्मीद पैदा करने वाले बराक हुसैन ओबामा जी रौं लाख सौ बरीस। इस्लामी आतंकवाद फैलाने वाले तालिबानी जी रौं लाख बरीस। इस्लामी आतंकवाद के जवाब में हिन्दू आतंकवाद पैदा करने वाले सभी संगठन जी रौं लाख सौ बरीस।
जो इस बार नहीं कह सके वह सब कहने के लिये बार-बार आपके सामने आयेंगे और आते रहेंगे…चाहे मंदी हो चाहे नैनीताल समाचार का खराब स्वास्थ्य…चाहे देश की बदरंग आबोहवा…
हो..हो..होलक रे!
बरस दिवाली बरसै फाग…. जो नर जीवें खेल आज..
हो…हो…होलक रे!
























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