हरिद्वार में सन् 2010 में होने वाले सदी के पहले महापर्व कुंभ मेले की तैयारियों के अन्तर्गत किये जा रहे सभी कार्य अब समापन के अंतिम चरण में हैं। प्रशासन का दावा है कि अक्टूबर 2009 तक सभी कार्य पूर्ण कर लिये जायेंगे। ज्ञातव्य हो कि शासन स्तर पर अभी तक विभिन्न विभागों के 128 कार्यों हेतु 294.21 करोड़ रुपये के प्रस्तावों पर स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा 183.22 करोड़ रुपये कार्यदायी विभागों को अवमुक्त कर दिये गये हैं। इसमें से 99.20 करोड़ रुपये संबधित विभागों द्वारा व्यय भी किये जा चुके है।
वर्ष 2010 में माह जनवरी से अप्रेल के मध्य हरिद्वार में पूर्ण कुम्भ मेला का पर्व आ रहा है। कुम्भ मेला क्षेत्र 130 वर्ग किमी. में फैला हुआ है। इसमें हरिद्वार, ऋषिकेश, मुनि की रेती व स्वर्गाश्रम के क्षेत्र सम्मिलित हैं। इस अवधि में चार से पाँच करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसलिये प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किये जा रहे हैं। कुम्भ के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता को अधिक से अधिक सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये रु. 112.23 करोड़ की लागत से 9.5 किमी. नई सड़कों का निर्माण, 4 नये पुल, एक ओवर ब्रिज, 37 किमी. मुख्य सड़कों पर बी.एम.एस.डी.बी.सी. कार्य व हिल बाईपास का सुधार किया जा रहा है।
विद्युत व्यवस्था में सुधार हेतु 14.67 करोड़ लागत 33/11 के.वी.ए. के 2 नये सब स्टेशन, 4 सब स्टेशनों की क्षमता वृद्धि, 19 किमी. एल.टी. लाइनों का बदलना, 29 किमी. 11 के. वी. लाईन आदि के कार्य किये जा रहे हैं। पेयजल व्यवस्था के सुधर के लिए भी 50.10 करोड़ रुपये की लागत से हरिद्वार में 6 अन्तः श्रोत कूप, 4 उच्च नग जलाशय, 3 सी.डब्ल्यू.आर., 5 किमी. पाईप लाइन व 4 नलकूप, ढालवाला क्षेत्र जथा नीलकंठ पैदल मार्ग पर पेयजल व्यवस्था तथा अस्थाई सैक्टरों में पेयजल व्यवस्था हेतु 180 किमी. अस्थाई पाइप लाइन जोड़ने के कार्य कराये जाने हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई द्वारा रु. 33.38 करोड़ की लागत से 25 किमी. सीवर लाईन तथा 2 नग एस.टी.पी. का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 4 नग सीवर क्लीनिंग मशीन तथा 4 नग सीवर सक्शन मशीनें क्रय की जानी हैं।
श्रद्धालुओं के स्नान हेतु समुचित स्थान उपलब्ध कराने के लिये रु. 35.05 करोड़ लागत से 3.34 किमी. लम्बाई में नये घाटों का निर्माण एवं सड़कों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। हरिद्वार विकास प्राधिकरण द्वारा रु. 1.04 करोड़ लागत से मेला क्षेत्र की विभिन्न सड़कों का सुधार कार्य किया जाना है एवं रु. 4.72 करोड़ की लागत से मेला क्षेत्र के मुख्य-मुख्य मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था की जानी है। गंगा की मुख्य धारा के आसपास स्थित द्वीपों में लगने वाले शिविरों को जोड़ने एवं यात्रियों के सुगम आवागमन के लिये रु. 16.34 करोड़ की लागत से 32 अस्थाई सेतुओं का निर्माण तथा अन्य प्रान्तों से आने वाले पुलिस कर्मियों के ठहरने के लिये रु. 7.70 करोड़ लागत के 7 बैरकों का निर्माण किया जा रहा है। मगर इतने व्यापक स्तर पर निर्माण कार्यों के बावजूद हरिद्वार शहर को अतिक्रमण ने निगल लिया है, जिससे सारे शहर के सौन्दर्य को ग्रहण लग गया है। उम्मीद की जा रही है कि अगले माह से प्रशासन अतिक्रमण हटाने पर अपना ध्यान केन्द्रित करेगा।

























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