हेमचन्द्र शर्मा दुःखी हैं….
भाजपा ने कालाढूँगी कांड में मारे गये बलवन्त कन्याल हत्याकांड की सी.बी.आई. जाँच करवाने की माँग को लेकर आसमान सिर उठा रखा है और कांग्रेस ने युवा कांग्रेस अध्यक्ष संजय नेगी की गिरफ्तारी को लेकर। लेकिन उनकी बेटी के बारे में ये बड़े राजनैतिक दल बात भी नहीं करना चाहते। करें भी क्यों, कहीं न कहीं इन्हीं के लोग इस खौफनाक अपराध में शामिल हैं….
एक साल पहले, 19 नवम्बर 2008 को प्रीति शर्मा की हत्या और उससे पूर्व उससे इतने बर्बर ढंग से बलात्कार किया गया था कि पूरा कुमाऊँ दहल गया था। उसके शव का पोस्टमार्टम करने वाली महिला डॉक्टर दो-तीन दिन तक बदहवास रही, क्योंकि ऐसी नृशंसता उसने इससे पूर्व देखी ही नहीं थी। हल्द्वानी के जेटकिंग कम्प्यूटर्स में काम करने वाली 24 वर्षीय प्रीति पदमपुर देवलिया (मोटा हल्दू) निवासी अपने फूफा रमेश चन्द्र दुर्गापाल के घर जा रही थी। वह उन्हीं के साथ रहती थी। अगली सुबह एक ग्रामीण महिला ने उसका विकृत शव देखा।
इस मामले में पुलिस ने भाष्कर जोशी नामक एक युवक को गिरफ्तार किया, जो अभी कुछ दिन पूर्व जमानत पाकर बाहर आ गया है। मगर खैरना के आगे चोपड़ा में दुकान चलाने वाले 52 वर्षीय हेमचन्द्र शर्मा इस गिरफ्तारी और पुलिस की भूमिका से कतई सन्तुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पुलिस बड़े दबाव में है या फिर पैसे खाकर असली अपराधियों को बचा रही है। वे मामले की सी.बी.आई. जाँच चाहते हैं। राज्य सरकार ने सी.बीआई. जाँच की संस्तुति कर भी दी है। पुलिस के नाकारापन के बाद जब इस मामले में बड़ा आन्दोलन हुआ और 2 दिसम्बर को हल्द्वानी बन्द रहा तो 19 दिसम्बर को विवश होकर तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी ने सी.बीआई. जाँच की संस्तुति कर दी। लेकिन सी.बी.आई. इस मामले को हाथ में लेने में कतई रुचि नहीं दिखा रही है। न ही उस पर ऐसा राजनैतिक दबाव बन पा रहा है, हालाँकि हेमचन्द्र शर्मा बतलाते हैं कि वे 14 फरवरी को इस बाबत हरीश रावत और के.सी. सिंह बाबा के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज सिंह चौहान से मिले थे। अब उन्होंने हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है। मगर उस पर ज्यादा बहस ही नहीं हो पाई है। प्रदेश सरकार की ओर से पुलिस कह रही है कि उसने चार्जशीट दाखिल कर दी है और सी.बी.आई कह रही है कि यह ऐसा राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय मामला नहीं कि सी.बी.आई. इसे अपने हाथ में ले। तारीख पर तारीख बदल रही है।
हेमचन्द्र शर्मा कहते हैं कि वे ही नहीं, इलाके के बहुत सारे लोग जानते हैं कि असली अपराधी कौन हैं। लेकिन कांग्रेस के एक पूर्व विधायक और अब प्रदेश में मंत्री बन चुके एक भाजपाई का वरदहस्त होने के कारण वे छुट्टे घूम रहे हैं। प्रीति की हत्या के पाँचवे दिन ही एस.टी.एफ. के लोगों ने उनसे कहा था कि उन्होंने अपराध का खुलासा कर दिया है। अपराधी चार हैं, जिनमें एक उनका इतना नजदीकी रिश्तेदार है, कि जब वे उसका नाम जाहिर करेंगे तो वे भौंचक्के रह जायेंगे। लेकिन दो दिन बाद ही एस.टी.एफ. ने भाष्कर को मुलजिम बताते हुए पूरी कहानी बदल दी। स्पष्ट है कि पुलिस की कहानी जनता की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश है। भाष्कर तो इस अपराध में एक मामूली मोहरा है। यह इसी से जाहिर है कि वह जेल में था और बाहर हल्दूचौड़ में दो बीघा जमीन में उसका मकान बनने लगा। गौला गेट पर चाय-पानी की एक छोटी सी दुकान करने वाले और एक पुराने डम्पर के मालिक के पास जेल में रहते हुए इतना पैसा कैसे बरस गया कि उसका मकान बनने लगा ? साफ है कि जिन लोगों ने पैसे और राजनैतिक दबाव से पुलिस को गलत रास्ते पर डाला, उन्होंने ही भाष्कर को आश्वस्त भी किया होगा कि तुम्हें जेल से छुड़वा भी लेंगे और तुम्हारा मकान भी बनवा देंगे। इस मामले में खुल कर लिख रहे एक दैनिक अखबार के पत्रकार पर फायर करने की घटना का जिक्र भी हेमचन्द्र शर्मा करते हैं।
बहरहाल, अब इस मामले में आन्दोलन कर रहे संगठनों ने 19 नवम्बर को काशीपुर में सांसद के.सी.सिंह बाबा का घेराव करने का फैसला किया है।



























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