मोसे चरखा मगा दे
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मानो सैया हमार मोसे चरखा मगा दे।।
आफी कातूँलो आफी बणूलो
यही चलौलो व्यौहार।। मोसे चरखा मगा दे।।
घागरो स्वदेशी आङड़ो स्वदेशी।
पिछोड़ो स्वदेशी हमार।। मोसे चरखा मगा दे।।
ओढ़नो स्वदेशी बिछोंड़ो स्वदेशी।
स्वदेशी पलङा निवार।। मोसे चरखा मगा दे।
विदेशी माल को नाम ना लियो है।
स्वदेशी माल को करियो प्रचार।। मोसे चरखा मगा दे।
विदेशी राजा ले उठी उठि मारो।
उगणा का रूप अनेक।। मोसे चरखा मगा दे।
सोना चाँदी विलेत पुजायो।
नकली कागज की बहार।। मोसे चरखा मगा दे।।
मानो सैया हमार मोसे चरखा मगा दे।।

मत जाओ पिया होली आय रही है
मत जाओ पिया होली आय रही है
जिनके पिया घर में बसत हैं
तिनकी नारी रंग भरे
मत जाओ पिया होली आ ही रही है
जिनके पिया परदेस बसत हैं
तिनकी नारी उदास भई
मत जाओ पिया होली आही रही है
जैसे नंग के ऊपर मास नहीं
परदेसी पिया की आस नहीं
मत जाओ पिया होली आ ही रही है

सब वणि जावौ देश भगत रसिया।
स्वतंत्र भारत करण हुणि रसिया, स्यैणी बैग कमर कसिया।
पढि़ गुणि बेर रुजगारै के नै, फैसन कणि अब सब तजिया।
साँचा सेवक बणनो चैंछ, गुंडन दगड़ा जन फँसिया।
पैंली सुधार घरै बटि करला, पितरन को आदर करिया।
अड़ौस पड़ौस हिलि मिलि रौणा, आपुणि सुवा जन बस बणिया।
दुःख-सुख में सब काम लागणो, ऊँच बिचारन कैं धरिया।
आपुण आचरण कैं सुधारण चैंछ, युवक युवतियाँ तुम हौसिया।
हिलि मिलि सब जाणि होली मचाला, छार कच्यार न होलि बकिया।

हम करुँला पर-उपकार
एसी होली होली
होलि होली होलि होली।।
प्रेम की होली पिचकार-
एसी होलि होली।।
आपणो पर्या को भेद नी हो
क्वे भेदै नि हो-
सब विश्व होलो परिवार-
एसी होलि होली।।
कुल को मान सदा धरुँला
हो सदै धरुँला
हम करुँला देशोद्धार-
एसी होलि होली।।
हम करुँला पर-उपकार…।।
(होली-खम्माच)
होरी खेलो स्वराज्य ऋतु आवत है, दिन भारत के खोटे जावत है।
कृष्ण नबी में संधि भई है, अब नयो रंग रचावत है।
मन्दिर मसजिद ईंद है होरी, मक्का ब्रज कहलावत है।
हिन्दू-मुसलमाल प्रेम रंग डारो द्वेष की धूल उड़ावत है।
धन्य है वह दिन देखन आयो पांडे मगन मन गावत है।
खेलत गोपी ग्वाल लाल रे मथुरा से होली आई ।। 2।।
चैत मास सरसों फूले हो चैत मास सरसों फूले ।
भँवरा देह गुँजार लाल रे मथुरा से होली आई ।। खेलत…
बैसाखे गुलाब खिले हो बैसाखे गुलाब खिले।
भँवरा देह गुँजार लाल रे मथुरा से होली आई ।। खेलत…
जेठ मास गर्मी आई हो जेठ मास गर्मी आई।
घर घर पंख डुलाय लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
आसाढे़ घनघोर भयो हो आसाढे़ घन घोर भयो।
इथ उथ मचे तूफान लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
सावन में बदरा बरसै हो सावन में बदरा बरसै।
धरती करै श्रृंगार लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
भादो में वर्षा होवै हो भादो मे वर्षा होवै।
नदी चले असमान लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
कुँवर कनागत आइ गयो हो कुँवर कनागत आइ गयो।
बमना न्युती बुलाय लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
कार्तिक मास जुवरा खेलै हो कार्तिक मास जुवरा खेलै।
घर घर दीपक जलाय लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
अगहन में बाटो छायो हो अगहन में बाटो छायो।
खेलत गोपी ग्वाल लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
पूस मास स्यू स्यू ब्यापै हो पूस मास स्यू स्यू ब्यापै।
घर घर अंगेठी जलाय लाल रे मथुरा से …।। खेलत…
माघ माहातम आइ गयो हो माघ माहातम आइ गयो।
कर गंगा स्नान लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…
फागुन में होली आई हो फागुन में होली आई।
घर घर गुलाल उड़ाय लाल रे मथुरा से होली आई।। खेलत…

हरजी सकल अयोध्या पानन छाजे, बमना छाजत नाई।
हरजी इस बामन के धोखे दशरथ। बाँस कटन को जाय
हरजी दशरथ राजा मछली ब्योतैं। अँगूठा लागी फाँस।
हरजी दशरथ राजा की तीनों रनियाँ । रहना नीद न होय
हरजी पहलो पहरा रानी कौशल्या। रहना नीद न होय
हरजी दूसरो पहरा रानी सुमित्रा। रहना नीद न होय
हरजी तिसरो पहरा रानी केकइ को। पीड़ सबे हर लेय
हरजी जो मैं मांगू ना दे राजा। बचन अकारत जाय
हरजी एक बच्या दो तिरकाली बच्या। बच्या हार न होय
हरजी भरत स़त्रुघन राज दीजो। राम लखन बनबास
हरजी देली मथल्ता लेख्यो। राजा ने लेख्यो हाथों हाथ
हरजी राम लखन ऐसे आये। पड़यो हाथों हाथ
हरजी इतर रोवे माता कौशल्या। भाई लखन राम
हरजी राम लखन बन को चले हैं सीता लागी साथ
हरजी ना चल सीता जनचलिये। बन मे विबध होय
हरजी जो तुम खावें सो हम पावें। कभी न छोडूँ साथ
हरजी राम लखन बन को चले हैं। सीता लागी साथ
मोरे सांवरे कन्हैया बिनु कैसे खेलूँ होरी,
दिन चारे सखी री अपने बलम को-
हम सों मागन दो फागुन के दिन।
सुना (साना) सी होला (है), तोला-स दूँगी
पिया तोला न जाय, पिया न दिया जाय।
रत्ती भर घटला (घटेलातो) माशा भर देऊँगी।
देऊँगी काट के तोल।
लागि रईं खूब सपाड़न में, तब पड़नई हाड़ पहाड़न में।
आपस में सब लडि़-लडि़ मरी, पड़नई आफी खाड़न में।
गढ़वाल में छत्रि बामण लड़ी, चोखी हुका का छाड़न में।
कुमूँ में घर-घर मेल नि हाँती, मिन्नत में स्वार भ्याड़न में।
तैली सैली फाट को झगड़ो, मचि रौछ शहर गवाड़न में।
बामण बणिया अलगै लड़नी, उतरी खूब अखाड़न में।
पंच बड़ी बैमानी करनी आपस का इन धाड़न में।
धर्म की बात सुणी लियौ यारौ छूत न लाडू प्याड़न में।
मित्र कुमित्रन की बात सुणौं अब जोर छ गाली की बाड़न में।
स्वदेसि लुकुड़ा को नाम नि हाँती जोर बिदेसि कपाड़न में।
खूब बहादुर पैक यां छन, अपना भाइन कैं पछाड़न में।
भक्तन देश का जेल करूँनी, शरम नै नाख का क्वाड़न में।
….का लिजिया लडि़-लडि़ मरनी, नाक नै इन चेहाड़न में।
डालिन का मिस घूस खऊंनी, नियत खिताब-पुछाड़न में।
बिस्वास अंग्रेजि औषध में छ, लागि रै बरांडि खपाड़न में।

होलि के फगुवा दे आशीष – हो होलक रे।
बरस दिवाली बरसै फाग – हो होलक रे।
आजाका बसन्त हो कैका घर…? हो होलक रे।
आज का बसन्त यो अंक वाँचनेर वालों घर – हो होलक रे।
उनरो कुटुम्ब-परिवार जीरौ हो लाख सौ बरीस – हो होलक रे।