बरस दीवाली बरसे फाग, जो नर जीवे खेले आज, हो हो होलक रे
बरस दीवाली बरसे फाग, जो नर जीवे खेले आज, हो हो होलक रे
नैनीताल समाचार के सुधी पाठक, विज्ञापनदाता, सहयोगी, समय से पाठकों तक नहीं पहुँचाने वाला डाक विभाग व तल्लीताल पोस्ट ऑफिस वाले जी रौं लाख सौ बरीस…हो हो होलक रे
नैनीताल समाचार में प्रकाशित रचनाओं के रचनाकार, जिनकी रचनायें प्रकाशित नहीं हो पायी वो रचनाकार व जिनकी रचनायें अभी डाक में ही अटकी हैं, वे सभी जी रौं लाख सौ बरीस… हो होलक रे।
इस अंक के मुख्य पन्ने में प्रकाशित रचनाओं के रचेता जो हमारे बीच नहीं हैं- गौर्दा, गिर्दा, दौलत सिंह बोरा की स्मृति जी रौं लाख सौ बरीस… बुजुर्ग होली धुरंधर चारू चंद्र पाण्डे जी, जो आजकल भीमताल में हैं, जी रौं लाख सौ बरीस…हो हो होलक रे।
जेल में बंद आंदोलनकारी प्रशान्त राही, शिवराज सिंह बगड़वाल, विनायक सेन आदि व शहीद हेम पांडे सहित उत्तराखंड आंदोलन व अन्य आन्दोलनों के शहीदों की शहादत जी रौं लाख सौ बरीस…हो हो होलक रे
देहरादून में इन दिनों सचिवालय की खाक छान रहे नैनीताल समाचार के प्रधान सम्पादक राजीव लोचन साह, हल्द्वानी से टोक्याल छोड़ने वाले प्रकाशक हरीश पंत, देवेन्द्र नैनवाल, आनन्द बल्लभ उप्रेती जी रौं लाख सौ बरीस…होली विशेषांक को तैयार करने वाले सुझाव सम्पादक पवन राकेश, महेश जोशी, विनीता सनवाल, योगेश पंत, धीरज पाण्डे, विनोद पाण्डे, कुणाल तिवारी, राजहंस प्रेस के सहयोगी श्याम लाल, अरूण, कंचन, महेश, संजय तथा अशोक होटल व सेवॉय होटल के ट्रस्टी/मालिक व कर्मचारी जी रौं लाख सौ बरीस…हो हो होलक रे।