चन्द्रावती महाविद्यालय काशीपुर में बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा मीना गोला की 4 अक्टूबर 2009 को रहस्यमयी ढंग से हुई मृत्यु को लेकर पुलिस द्वारा कोई भी कार्रवाही न किये जाने से तमाम कोशिश कर चुके मीना के साथी अब देहरादून के गांधी पार्क में अनशन कर रहे हैं।
मीना गोला स्वतंत्र खयालों की युवती थी और आगे पढ़ाई करना चाहती थी। वह 2005 से ही प्रगतिशील छात्र संघ में सक्रिय थी। पर उसके घर वाले शादी के लिये उस पर दबाव बना रहे थे। वे उसे मानसिक और शारीरिक यातना देते रहते थे। अन्ततः झूठी शान और इज्जत के खातिर उन्होंने मीना की हत्या कर दी। वह 27 सितम्बर को अपने घरवालों से परेशान होकर अपनी एक दोस्त के घर आकर रहने लगी थी। घर वालों के दबाव में वह वापस तो चली गयी, पर एक पत्र छोड़ गयी जिस में उसने अपनी जान को अपने घरवालों से खतरा होने की बात लिखी थी।
पछास कार्यकर्ता रजनी जोशी ने मामले की छानबीन करने के लिये तथ्य संग्राहक दल बनाया तथा मीना गोला के गाँव बेंतवाला जाकर छानबीन करने का मन बनाया। 9 जनवरी को जब यह दल मीना गोला के गाँव में उसके पिता नरेश कुमार की दुकान पर पहुँचा तो उसकी माँ सोनावती ने कहा कि मीना के पिता मुरादाबाद गये हैं। सोनावती ने बातचीत के दौरान बताया कि 4 अक्टूबर को जिस समय मीना की मृत्यु हुई, उस समय वह घर पर अकेली थी। जब उनकी छोटी बेटी साधना फ्रिज में दूध रखने अंदर गयी उसने मीना को फर्श में पड़ा हुआ पाया। इसके बाद गाँव के लोग इकट्ठा हो गये। उन्होंने बताया कि मीना को पहले भी हार्ट अटैक आ चुके हैं। सोनावती ने कहा कि इसके लिये उसका इलाज भी चल रहा था, पर उनके पास उसके इलाज संबंधी कुछ भी कागज या दवाइयाँ मौजूद नहीं थीं। उनके अनुसार जिस डॉक्टर से उसका इलाज चल रहा था उसकी भी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 4 अक्टूबर को भी उन्हें एक स्थानीय चिकित्सक को दिखाया था, जहाँ उसने मीना को मृत घोषित कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें पता चला था कि मीना ने फाँसी लगा ली है और जब वे उसे देखने गये तो उसका शव पंखे से लटका था, पैर जमीन पर टिके थे और जीभ बाहर निकली हुई थी। ग्रामीणों का कहना था कि मीना के शव को बिना किसी कफन के ही ट्रॉली में डालकर ले गये और आनन-फानन में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। एक ग्रामीण का कहना था कि उसने समय रहते ही मीना की मृत्यु की सूचना पुलिस को दे दी, पर पुलिस समय से वहाँ नहीं पहुँची। कुंडा थाना, जहाँ मीना की हत्या का मुकदमा दर्ज है, के थानाध्यक्ष डी.एस. रावल ने बताया कि उन्होंने मीना गोला का हस्त लिखित पत्र देहरादून जाँच के लिये भेजा है और यदि हैंड राइटिंग का मिलान हो जाता है तो वह इस मामले में आगे कानूनी कार्यवाही करेंगे। सुधीर कुमार, जो मीना केस के जाँच अधिकारी हैं, का कहना था कि 20 ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर कहा है कि मीना की मृत्यु स्वाभाविक तरीके से हुई है। साक्ष्यों के अभाव के कारण उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। 24 अक्टूबर को आई.जी. के कहने पर उन्होंने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज की।
रजनी जोशी का कहना है कि 4 अक्टूबर को सुबह 7 बजे उसने मीना से बात करने के लिये फोन किया था। फोन उसके पिता ने उठाया और कहा कि वह नहाने गयी है। उसी दिन 11.30 बजे उसे फोन पर बताया गया कि मीना की हत्या कर दी गयी है और अब उसे जलाने ले जा रहे हैं। जब रजनी श्मशान घाट पहुँची तो लाश में मिट्टी तेल डालकर आग को और तेज कर दिया गया और उसे चिता के पास नहीं जाने दिया गया। पोस्टमार्टम के बाबत पूछने पर उन लोगों ने झगड़ा करना शुरू कर दिया। रजनी के अनुसार पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पुलिस सबूत न होने का बहाना बना कर मामले की जाँच टाल रही है।
इस हत्याकांड में कई विरोधाभासी बातें निकल कर सामने आ रही हैं। कुछ पड़ोसियों के अनुसार मौत फाँसी से हुई तो उसके परिवार वालों का कहना है कि मौत हार्ट अटैक से हुई है। 4 अक्टूबर को मीडिया के सामने उसके पिता ने कहा था कि उसने फाँसी लगाकर आत्महत्या की है। ये दोनों ही बयान रिकॉर्ड हैं। ग्राम प्रधान सरनजीत कहते हैं कि मौत का समय 11.30 बजे का था, जबकि उसके घर वाले सुबह 7-8 बजे का बताते हैं। अंतिम संस्कार भी बिना किसी रस्म अदायगी के आनन-फानन में कर देना भी समझ से परे है।
पुलिस ने भी मामले की सूचना मिलने के पूरे तीन सप्ताह बाद इस मामले की रिपोर्ट दर्ज की। उसके बाद जाँच संबंधित कार्य को भी आगे नहीं बढ़ाया और मीना के हाथ का लिखा पत्र भी हैंड राइटिंग मिलान के लिये दो माह बाद देहरादून भेजा। इस गाँव का पिछला इतिहास देखा जाये तो वहाँ पहले भी महिलाओं की रहस्यपूर्ण मौतों के उदाहरण मिलते हैं। बहरहाल पछास और महिला उत्पीड़न विरोधी संयुक्त मोर्चा लगातार इस मामले को लेकर आंदोलनरत हैं।
इस घटना से जाहिर होता है कि ऑनर किलिंग के मामले में उत्तराखंड भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा आदि से ज्यादा पीछे नहीं है।






















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