वर्ष 2007 से नैनीताल में स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है।इसकी बड़ी उपलब्धि नैनीझील में चल रहा एरियेशन है। साथ ही नगर मिशन बटर फ्लाई द्वारा कूड़े को रिसाइकिल करने को प्लान्ट हल्द्वानी में पिछले डेढ़ साल से चल रहा है। गीले कूड़े से खाद बनाने का काम नैनीताल में विभिन्न स्थलों पर बनाए गये कम्पोस्ट गड्ढों से किया जा रहा है। नैनीझील में एरिएशन से काफी फर्क पड़ा है। झील का पानी साफ होने से लगभग एक मीटर गहराई तक पारदर्शिता बनी है। मिशन बटरफ्लाई के चलते सभी वार्डों के अधिकांश परिवार इस योजना के सदस्य हैं, वहाँ कूड़े के बिखराव की समस्या कम हुई है। इसकी सबसे बड़ी कमी यह है कि कार्यक्रम को प्रत्येक घर तक नहीं पहुँचाया जा सका है। साथ ही जरूरत के मुताबित टॉयलेटों का निर्माण, कूडेदानों और थूकदानों को नहीं लगाया गया है।
नैनीताल में लगभग 10,000 परिवार हैं, जिनमें से केवल 5,846 ही मिशन के सदस्य हैं। इसके अलावा 30 होटल, 10 रेस्त्राँ तथा लगभग 25 स्कूल आदि संस्थाएँ आदि इससे जुड़ सके हैं। इस तरह से देखें तो 4000 से अधिक घर तथा 100 से अधिक होटलों का इससे जुड़ना बाकी है। अक्टूबर 2011 तक लोक चेतना मंच इसकी कार्यदायी संस्था है और इसके बाद ‘ए टू जेड’ कम्पनी इस कार्य को सम्भालने वाली है। आने वाले वर्षों में संसाधनों की दृष्टि से नैनीताल में कूड़े का कुशल व्यवस्थापन करने में कोई दिक्कत नही होनी चाहिए। नगर पालिका इसके लिए कम्पनी को 8 करोड़ की धनराशि एकमुश्त तथा 2 लाख प्रतिमाह अगले 14 वर्षों के लिए देने का अनुबंध कर चुकी है। नगरपालिका को इस कार्यक्रम की सफलता के लिए एक विवेकपूर्ण व जनपक्षीय रवैया अपनाते हुए प्रत्येक परिवार से ज्यादा से ज्यादा 5 रुपया प्रतिमाह का शुल्क लेना चाहिए जबकि अभी तक 25 रुपया लिया जा रहा है। इस राशि से स्वच्छता समितियाँ चलती रहेंगी और सभी परिवार इसके सदस्य बन सकेगें। होटलों व अन्य संसाधनों के लिए सदस्यता शुल्क की उचित राशि रखी जा सकती है। आवश्यक यह है कि सभी इसके सदस्य हों।
18 सितम्बर का दिन नैनीताल में स्वच्छता दिवस के रुप में मनाया जाता है। स्कूली बच्चों, जागरूक नागरिकों, मीडिया, नगरपालिका व झील विकास प्राधिकरण के मिले जुले प्रयासों से पिछले वर्षों के मुकाबले सफाई के स्तर में सुधार आया है। आस्ट्रेलियन नागरिक रेमको वॉन सान्टेन जो इस अभियान के प्रेरक रहे हैं, आज भारत के कईं शहरों- लखनऊ, आगरा, अजमेर, चेन्नई, बनारस, कानपुर आदि में ऐसा ही सफल स्वच्छता कार्यक्रम चला रहे हैं, वहाँ नैनीताल का नाम अग्रणी नंबर के रूप में लिया जा रहा है। स्कूली बच्चों की सफलता आस जगाती है। यहाँ थोड़ी निराशा इसलिए होती है कि नगरपालिका और झील विकास प्राधिकरण या जिला प्रशासन नगर के प्रति उदासीन दिखाई पड़ते हैं, वर्ना 2011 के स्वचछता अभियान में उनकी कुछ भागीदारी अवश्य होनी चाहिए थी।