मैं जीवन चन्द्र (जे.सी.) पुत्र स्व. श्री दानवीर आर्य (शिक्षक) अल्मोड़ा निवासी एक दशक से अधिक समय से उत्तराखण्ड के विभिन्न जन आन्देालन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए मजदूरों किसानों और छात्रों की समस्याओं के लिए संघर्षरत् रहा हूँ। पिछले पाँच-छः वर्षो से राज्य के भीतर जिस प्रकार सरकारें जनान्दोलनों और सामाजिक कार्यकताओं का दमन और उत्पीडन कर रही हैं, उससे स्पष्ट है कि राज्य में लोकतांत्रित अधिकारों का खुलेआम हनन हो रहा है। सरकारें जनता के विरेाध के स्वरों व असहमति को पचा नहीं पा रही हैं और लाठियों के सहारे राज्य की जनता को हाँक रहीं हैं।
राजद्रोह के झूठे आरोप में 31 माह जेल की यातना झेलने के बाद, पुलिस की तमाम अड़ंगेबाजीं के बावजूद मुझे न्यायालय से जमानत तो मिल गयी लेकिन पुलिस और खुफिया तंत्र मेरा उत्पीड़न करने से बाज नहीं आ रहा है। मैं इन दिनों अल्मोड़ा से एक द्विमासिक बुलेटिन निकाल रहा हूँ। किसान और मजदूरों का पक्ष लेने वाला यह छः पन्नों का समाचार पत्र वर्तमान में सरकार की नजर में विस्फोटक साबित हो रहा है। इस अखबार को माध्यम बनाकर मुझे पुनः कारागार में डालने के सरकारी प्रयास तेज हो गये है। जनसहयोग से निकलने वाले इस गैरव्यावसायिक अखबार को पुलिस ने देशद्रोही बताकर मेरी जमानत खारिज करने का प्रार्थना पत्र लगा डाला है। लेकिन मैं उम्मीद करता हूँ कि देश के इंसाफपसंद नागरिक ऐसी किसी भी कार्रवाही की मुखालफत करेंगे।
जीवन चन्द्र ‘जेसी’
संयोजक, उत्तराखण्ड मजदूर किसान संगठन, अल्मोड़ा























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