‘भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर’ के तत्वावधान में दिनांक 8, 9 व 10 मार्च 2010 को बड़ौदा (गुजरात) में ‘भारत भाषा संगम’ सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 320 बोल भाषाओं के 600 प्रतिनिधि इस भाषा संगम में उपस्थित थे। सी.सी. मेहता सभागार, एम.एस. यूनिवर्सिटी कैम्पस, बड़ौदा में सात भाषाओं में स्तुति के साथ इंटैक की निदेशक श्रीमती कमलिनी सेन गुप्ता की अध्यक्षता में प्रो. जी.एन. देवी द्वारा प्रतिभागियों के स्वागत भाषण के साथ प्रथम सत्र की शुरूआत हुई। उद्घाटन वक्तव्य के रूप में प्रो. शिव विश्वनाथन, डॉ. रघुवीर चौधरी, डॉ. शेखर पाठक, प्रो अन्विता अब्बी, प्रो. राजेश सचदेवा, डॉ. डी.पी. पटनायक, डॉ. ओ.सी.हांडा व डॉ. तेमसुला आओ ने अपने क्षेत्रों व उसकी भाषिक-सांस्कृतिक विशिष्टताओं से परिचित करवाया। मुख्य ध्वनि यही थी कि बोली-भाषा वैविध्य को बचाने की ईमानदार कोशिशें होनी चाहिये। जल, जंगल और जमीन के प्रश्न को भी इस मुद्दे से अलगाया नहीं जा सकता। भाषा के सामने उपस्थित दो बड़े खतरों-वैश्वीकरण व जलवायु परिवर्तन को बोली भाषा को खत्म कर सकने वाले कारकों के रूप में चिन्हित किया गया। मातृभाषा सही तरीके से आने के बाद ही दूसरी-तीसरी भाषायें पढ़ानी शुरू करने की वकालत की गई। द्वितीय सत्र में धीरू भाई सेठ की अध्यक्षता में प्रो. अवधेश कुमार सिंह, प्रो. एम.डी. हतकनंगलेकर, प्रो रामकृष्णा रेड्डी, प्रो. लछमन खूबचन्दानी, प्रो रीता कोठारी, श्री प्रकाश साह, प्रो. ई वी रामकृष्णन, प्रो. विभूति भूषण मोहन्ती, रमणिका गुप्ता आदि विद्वानों ने कहा कि भाषायें मरती नहीं, वर्चस्ववादी शक्तियों के द्वारा मार दी जाती हैं। इसलिये यदि सभी बोली-भाषाओं में बहनापा हो और वे मिलकर संघर्ष करें तो उन्हें कोई नहीं मार सकता। आदिवासी, जनजातीय क्षेत्रों के प्रतिनिधियों की बातों से लगा कि वहाँ भाषा और संस्कृति का यह संकट अपनी पराकाष्ठा के साथ खड़ा है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा के प्रतिनिधियों ने बताया कि नई पीढ़ी में अपनी भाषा-बोली का प्रयोग नहीं के बराबर है। अंत में श्री नारायण भाई देसाई, कुलाधिपति गुजरात विद्यापीठ-अहमदाबाद ने वर्तमान शिक्षा नीति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसकी कमियों को इंगित किया। ‘भारत भाषा संगम’ का समापन 10 मार्च 2010 को पद्मश्री प्रो शेखर पाठक की अध्यक्षता में डा. आई जी. पटेल सभागार, बडौदा में हुआ। इस कार्यक्रम की अगली कड़ी के रूप में भारत भाषा आलेखन कार्यक्रम दिसम्बर 2010 में भुवनेश्वर उड़ीसा में आयोजित किया जायेगा।
‘भारत भाषा संगम’ का मुख्य आकर्षण कार्यक्रम के तीनों दिन तक प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की उपस्थिति और देश भर से आये सभी भाषा प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न भाषाओं की तख्तियाँ हाथ में उठाकर सी.सी.महेता सभागार से बड़ौदा म्यूजियम तक पैदल मार्च किया जाना था।