ए.पी. भारती
‘‘संचार क्रान्ति, हरित क्रान्ति का नया अवतार है, जिसने नये समाज की आकांक्षाओं को उकसाया, लेकिन मक़सदों की प्राप्ति के वास्तविक संघर्षों पर ठण्डा पानी डाल दिया।’’ रुद्रपुर के बी.आर.सी. सभागार में पत्रकारिता दिवस पर साहित्यिक-सांस्कृतिक मंच ‘उजास’ व ‘पीपुल्स फ्रैण्ड’ द्वारा ‘सूचना का प्रवाह: मिथक और यथार्थ’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में यह बात उभर कर आई। बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा कि उदारीकरण के बाद सम्पादकीय में मार्केटिंग की घुसपैठ बढ़ी है। सामाजिक सजगता इस प्रवृत्ति को रोक सकती है। पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रो. भूपेश कुमार सिंह ने कहा कि अब मीडिया सांस्कृतिक वर्चस्व का जरिया है। सचेतन रूप से गढ़े गये मिथक सामाजिक परिघटना की हक़ीकत को शून्य बना देते हैं और लोगों की निष्क्रियता बढ़ाते हैं। विचारों के प्रबंधक बेहद कुशलता से जोड़-तोड़ कर यथार्थ का एक झूठा मिथ्याबोध रचते हैं और आमजन को वास्तविकता से दूर ढकेल देते हैं। ‘राजस्थान पत्रिका’ जयपुर के उप समाचार संपादक संजीव माथुर ने कहा कि अभी भी परोसी हुई खबरों को नकारने का विकल्प पाठक के पास है। बाजार को समाज ने स्वीकार किया है तो मीडिया समाज से बाहर नहीं है। समाज को बाजार के प्रतिरोध में खड़ा होना होगा।
गोष्ठी में ‘दैनिक भास्कर’ खंडवा के मिथिलेश मिश्र, कस्तूरी लाल तागरा, ललित सती, बीसी सिंघल, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, ललित राठौर, अमर सिंह, ललित मोहन, खेमकरण सोमन, अयोध्या प्रसाद भारती आदि ने भी अपने विचार रखे। अध्यक्षता डॉ. शंभू दत्त पांडे ‘शैलेय’ तथा संचालन मुकुल ने किया। संगोष्ठी के दौरान सुरेश चंद्र मिश्र, नबी अहमद मंसूरी, नरेश कुमार और कस्तूरीलाल तागरा ने कविता पाठ किया।
इससे पूर्व रात्रि में भारतीय सिनेमा के सौ साल पर ‘पान सिंह तोमर’ फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद डकैत समस्या पर बनी तमाम फिल्मों की चर्चा करते हुए वक्ताओं ने फिल्मों के विविध पहलुओं पर बात की। इसे ‘बैंडिट क्वीन’ की ही तरह एक भिन्न आयाम की फिल्म के रूप में ज़ेरे बहस लेने की आवश्यकता को महसूस किया गया। संजीव माथुर की अध्यक्षता व मिथलेश मिश्र के संचालन में चले विमर्श में यह बात उभर कर आयी कि क्राफ्ट की मजबूती के बावजूद यह फिल्म कोई विशिष्ट छाप नहीं छोड़ती और अन्त भी निजी विद्रोह की निराशाजनक परिणित तक सिमट कर रह जाती है।