विशेष प्रतिनिधि
स्पेक्स (सोसायटी ऑफ पोल्यूशन एंड एन्वायरन्मेन्टल कन्जरवेशन साइंटिस्टस), देहरादून खाद्य पदार्थ अपमिश्रण, परीक्षण के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की संदर्भ संस्था है। स्पेक्स ने खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाँच के लिए 2001 में ‘रसोई कसौटी’ नामक एक किट बनाई थी जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भारत के प्रत्येक जिले में विज्ञान संवाहकों को प्रदान की थी। स्पेक्स ने इन संवाहकों को प्रशिक्षण भी दिया। संस्था ने इस बार उत्तराखण्ड स्तर पर खाद्य पदार्थो में मिलावट की जाँच मई-जून माह 2011 के दौरान की। यह अध्ययन चार धाम मार्गों तथा कुमाऊँ के 6 जिलों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र कर उनका परीक्षण कर किया गया। 90 स्थानों से खाद्य पदार्थो के नमूने एकत्र कर स्पेक्स की लैब में मिलावट की जाँच की गयी। परिणाम चिन्ताजनक हैं। भारी मात्रा में मिलावट पायी गई। जहाँ मिलावट कम है, वहाँ पर खाद्य पदार्थ बाहर से न आकर स्थानीय रूप में उपलब्ध हैं।
स्पेक्स खाद्य पदार्थो में मिलावट का परीक्षण गत 15 वर्षों से करता आ रहा है। चार धाम यात्रा मार्ग पर बिकने वाले खाद्य पदार्थो का परीक्षण वर्ष 2005 से प्रति वर्ष हो रहा है। 2005 में वहाँ मिलावट का प्रतिशत 76 प्रतिशत था, जो 2008 में बढ़कर 82 हो गया। इस वर्ष 90 स्थानों से लिये गये कुल 2485 नमूनों में से 1942 में मिलावट पायी गयी। यानी मिलावट का प्रतिशत 78 था। चारधाम यात्रा मार्गों पर ऋषिकेश, बयासी, तीन धारा, देवप्रयाग, कीर्तिनगर, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाशी, रामपुर, गौरीकुण्ड, केदारनाथ, ऊखीमठ, गोपेश्वर, चमोली, पीपलकोटी, जोशीमठ, गोविन्दघाट, घांघरिया, बद्रीनाथ और कर्णप्रयाग आदि 47 स्थानों से लिये गये 1053 नमूनों में से 859, यानी 81 प्रतिशत में मिलावट पाई गई। रुद्रप्रयाग में तो मिलावट का प्रतिशत 92 तक था। इन स्थानों पर हल्दी में 86, लाल मिर्च में 85, धनिये में 79, काली मिर्च में 74, लौंग में 70, मिठाइयों में 76, सरसों के तेल में 97, रिफाइन्ड आॅयल में 80, शुद्ध घी में 74, पनीर में 73 और दूध में 62 प्रतिशत तक मिलावट थी।
कुमाऊँ मण्डल में हल्द्वानी, काठगोदाम, नैनीताल, भवाली, गरमपानी, खैरना, रानीखेत, मझखाली, कोसी, अल्मोड़ा, बाड़ेछीना, पनवानौला, दनिया, गंगोलीहाट, बेरीनाग, उडयारी बैन्ड, धरमघर, बागेश्वर, थल, डीडीहाट, कन्यालीछीना, पिथौरागढ़, लोहाघाट, चम्पावत, चल्थी, सूखीढांग, टनकपुर, बनबसा, खटीमा, रुद्रपुर और काशीपुर आदि 43 स्थानों से लिये हल्दी, लाल मिर्च, गुड़, बेसन, धनिया, लौंग, काली मिर्च, जीरा, सरसों का तेल, टमाटो सॉस, ग्रीन चिली सॉस, सिरका, रिफाइन्ड ऑयल, दूध, खोया, मिठाई, दही, चाय और काफी के 1432 सैंपुल में से 1083, यानी लगभग 75 प्रतिशत अशुद्ध थे। सरसों के तेल में 98 प्रतिशत मिलावट थी तो सिरका शत प्रतिशत नकली था।
परीक्षण करने पर हल्दी में मेटेनिल पीला, लैड व स्टार्च; लाल मिर्च में रोहड़ामिन-बी,गेरू; धनिया में मिट्टी व लकड़ी का बुरादा, लीद; काली मिर्च व लौंग में तेल निचुड़ा हुआ; गरम मसाला में मिट्टी व लीद; दूध में कास्टर तेल, सोड़ा, स्किम्ड दूध ,चीनी, बोरिक एसिड, बटर आयल; पनीर में स्किम्ड दूध, बटर आयल, रिफाइन्ड तेल; मिठाई में रंग (मेटेनिल पीला, लैड क्रोमेट, मैलेचाइट), स्किम्ड दूध, बटर आयल, रिफाइन्ड तेल व घटिया तेल; घी में बटर आयल, डालडा; सरसों के तेल में मोबिल आयल, कास्टर आयल, मैटेनिल पीला; रिफाइन्ड तेल में मोबिल आयल, मैटेनिल पीला; चाय में रंग क्रोमियम डाई व पुरानी चाय; काफी में इमली के बीज; इलाइची दाना में रानीपाल व टीनोपाल; शहद में घटिया चीनी; रोली (पिठ्याँ) में मैटेलिक रंग; विभिन्न सॉस में रंग, कद्दू, मैलेचाइट ग्रीन आदि तथा सिरका में एसिटिक एसिड की मिलावट पाई गई।
स्पेक्स के सचिव डॉ. बृजमोहन शर्मा बताते हैं कि इन मिलावटी तत्वों से जोड़ों का दर्द, हैजा, पेट का दर्द, लीवर, अलसर, उलटी, कैंसर, ड्रापसी, पेट की गैस, सूजन, ग्लूकोना, श्वास रोग, पेचिश, लकवा, न्यूरोटाक्सिक, एलर्जी, बाल झड़ना, बाल सफेद होना तथा त्वचा रोग होने की सम्भावना होती है। खाद्य पदार्थों में मिलावट एक जघन्य अपराध है जो कि लोगों के जीवन को दांव पर लगा रहा है। उत्तराखण्ड में पर्यटन मुख्य व्यवसाय है, प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से लोग यहाँ आते हैं, परन्तु इस तरह की मिलावट यहाँ की छवि को खराब करता है।