उत्तराखण्ड की महिलायें अदम्य साहस, वीरता, शौर्य एवं श्रम की प्रतीक हैं। पहाड़ की पहाड़ सी जिन्दगी को अपने हाथों से सँवारने की उनमें क्षमता है। उत्तराखण्ड की संस्कृति ही नहीं, आर्थिकी भी उन्हीं के बलबूते पर टिकी है। पहाड़ सी समस्याओं का समाधान खोजना आसान नहीं, फिर भी कुछ सूक्ष्म प्रयास उनकी जिन्दगी को नई दिशा देने में सक्षम हैं। इन प्रयासों द्वारा उन्हें आर्थिक -सामाजिक अधिकार प्राप्त हो रहे हैं।
अभी तक महिला विकास के लिये चलाई जा रही योजनाओं में गरीबी हटाओ कार्यक्रम के अन्तर्गत विभिन्न प्रोग्राम तथा प्रशिक्षण आधारित उत्थान कार्यों में भागीदारी सम्बन्धी योजनायें व कर्ज की व्यवस्था करके स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना ही महिलाओं की उनकी स्थिति में कुछ हद तक सुधार ला रही हैं। लेकिन उनकी प्रबंधन क्षमता में वैज्ञानिक दष्टिकोण का समावेश करने जैसी मूल बातों को सुचारु रूप से प्रतिपादित नहीं करती। गोपेश्वर के जयदीप लघु उद्योग की स्थापना का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कुटीर उद्योगों को पुनर्जीवित कर रोजगार के संसाधनों से रू-ब-रू कराना तथा स्थानीय लोगों की पारम्परिक तकनीकी योग्यता को आधुनिक विकास व तकनीकी द्वारा सुधारने का प्रयास करना रहा, ताकि स्थानीय संसाधन कमजोर वर्ग के लिए उपलब्ध हो सकें और तकनीकी संस्थाओं द्वारा विकसित नई तकनीक के द्वारा स्थानीय अर्थव्यवस्था सुदढ़ बन सके। साथ-साथ लोगों में प्रबंधन व निर्णय में सक्रिय भागीदारी के तरीके विकसित करना।
जयदीप लघु उद्योग द्वारा महिलाओं को कुटीर उद्योग, जैसे मौसमी एवं बेमौसमी, जंगली कन्दमूल फलों का फल प्रसंस्करण, परम्परागत वैद्यों के ज्ञान पर आधारित अनुभवजन्य जड़ी-बूटियों के उपयोग एवं उनके बनाने के तरीके, जटामासी-गुग्गल द्वारा धूप अगरबत्ती और रिंगाल द्वारा टोकरियों का निर्माण, स्थानीय मसालों चोरू, फरण आदि का उपयोग, रामदाना, मडुवा के बिस्कुटों का उत्पादन, जड़ी बूटियों से विभिन्न प्रकार के रोगों का इलाज आदि सिखाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।























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