‘बिराण बनै गेछ, यो बिराण बनै गेछ, यो मालपा को डाना, हे काली मैया तेरी महिमा छ महान,’ गीत आज भी पूरी कारुणिकता के साथ उत्तराखण्ड में सुना जाता है। लोकगायक फकीर चन्द चिन्याल ने अपने मधुर कण्ठ से इस गीत द्वारा मालपा के मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 17 अगस्त 1998 की काली रात को कैलास मानसरोवर यात्रा के 12वें दल पर मालपा में पहाड़ टूटा। 60 यात्रियों सहित कुल 205 लोग अगले दिन का सूरज तक नहीं देख पाये। हादसा उस समय हुआ जब यात्रा पूरी कर लौट रहे 9वें दल के यात्रियों को मालपा तथा यात्रा पर जा रहे 12वें दल के यात्रियों को बूँदी में रुकना था। लेकिन मार्ग अवरुद्ध होने के कारण इन दलों के पड़ाव की अदलाबदली कर दी गई और 12वें दल के सभी यात्री पंचतत्व में लीन हो गये। इस घटना से पूरा देश स्तब्ध रह गया। 9वें दल के यात्रियों ने इस हृदयविदारक घटना के बाद तय किया था कि 10 वर्ष बाद इसी जगह पर हवन-यज्ञ कर मृतात्माओं के शान्ति के लिए प्रार्थना करेंगे और वादे के अनुसार 17 अगस्त 2008 को दिल्ली निवासी सुरेश कृपलानी के नेतृत्व में इन लोगों ने मालपा पहुँच कर रात्रि व्यतीत की और सोमवार, 18 अगस्त को विधिवत पूरे धार्मिक संस्कार किये गये।
इस वर्ष कैलास मानसरोवर यात्रा पहली जून से प्रारम्भ होने जा रही है। इस बार कुल 16 दलों द्वारा यात्रा की जायेगी। यात्रा का संचालन करने वाले कुमाऊँ मंडल विकास निगम ने दावा किया है कि सारी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं। 1962 के चीनी आक्रमण के बाद रुकी पवित्र कैलास मानसरोवर यात्रा वर्ष 1981 से दोबारा शुरू हुई। तब से वर्ष 2009 तक कुल 320 यात्रा दलों से 10,220 यात्री पुण्यलाभ कमा चुके हैं। तीन दशकों से चल रही यह यात्रा पर्यटन विभाग और कुमंविनि को अच्छा मुनाफा दे रही है। मगर सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं हुई है। पैदल यात्रा गाला से शुरू होने के बाद पैदल मार्गों की दशा बदतर ही है। खतरनाक भूस्खलन से बाधित चैतलकोट पिछले वर्ष से अब तक नहीं सुधर पाया है। विगत वर्ष इस मार्ग के अवरुद्ध होने के कारण यात्रियों को 12 किमी की अतिरिक्त कठिन चढाई के बाद तवाघाट होकर यात्रा करनी पड़ी थी। पड़ावों में विद्युतीकरण की अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है। यात्रा में जीने मरने के साथी और हमसफर कहे जाने वाले पोनी-पोर्टर्स की समस्या यात्रा प्रारम्भ होने के दो दिन पहले तक हल न हो पाना अव्यवस्था का एक अच्छा उदाहरण है। पोटर्स यूनियन पिछले कई वर्षों से उचित मेहनताना तथा संचालन ठेकेदारी पर न दिये जाने की माँग कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा बबाल टालने के लिये नगर पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख के साथ यूनियन की बैठक बुलाई। मगर चूँकि इन लोगों का यात्रा के साथ कोई मतलब ही नहीं है, अतः पोर्टर्स के साथ क्षेत्रीय जनता ने इस बैठक का बहिष्कार किया। अन्त में यही निर्णय हो पाया कि इस बार भी पोर्टर्स का संचालन ठेकेदार ही करेंगे। यूनियन के संयोजक जगत मर्तोलिया के अनुसार ठेकेदारों द्वारा पोर्टर्स का हर तरह से शोषण होता है, जिसमें विधायक, सांसद और स्थानीय छुटभैयों को हिस्सा बँट रहा है। इस निर्णय को लेकर पोर्टर्स को आघात लगा है।
यात्रा इस बार नोयडा से प्रारम्भ होकर नोयडा में ही समाप्त होगी। विगत वर्षो में यह नई दिल्ली से प्रारम्भ होती थी। यात्रा दल छः-छः दिनों के अन्तराल में रवाना होंगे। पहला दल 1 जून, दूसरा 7 जून, तीसरा 13 जून तथा इसी क्रम में अन्तिम, यानी सोलहवाँ दल 24 अगस्त को रवाना होगा। इस तरह 24 सितम्बर को यात्रा समाप्त होगी। पहला दल 2 जून को मध्यान्ह में पिथौरागढ़ पहुँचेगा, जहाँ पर यात्रियों का स्वागत छोलिया नृत्य के द्वारा किया जायेगा। पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी के अनुसार इस बार यात्रियों को मडुवे की रोटी और भट्ट की चुड़कानी का स्वाद चखाया जायेगा। उन्हें बुराँश के जूस से ठंडक दिलाने का भी प्रबंध किया जा रहा है। यात्री उसी दिन आधार शिविर धारचूला में रात्रि विश्राम कर तीन जून को गाला, चार को बूँदी, पाँच को गुंजी में रात्रि विश्राम करेंगे। छः जून को गुंजी में यात्रियों का मेडिकल परीक्षण कर स्वस्थ यात्रियों को ही आगे जाने की अनुमति मिलेगी। यहाँ से कालापानी, नाभीडांग और ताकलाकोट होकर यात्रा तिब्बत में प्रवेश करती है। वहाँ 12 दिनों में कैलास मानसरोवर यात्रा कर 21 जून को प्रथम यात्रा दल वापस भारत में प्रवेश करेगा तथा 26 जून को नोयडा पहुँच जायेगा। एसएसबी तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान यात्रा में सहयोग करेंगे। सातवीं वाहिनी के सेनानी ए.पी.एस. निबाड़िया के अनुसार चिकित्सक तथा जवानों को गुंजी रवाना कर दिया गया है। यात्रियों को विभिन्न पोस्टों पर फोन सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी।
यात्रियों को सर्वाधिक कष्ट नाभीढांग, लीपूपास और स्यांचिम में हो सकती है, जहाँ पर छः से सात फीट तक बर्फ अभी भी जमी है। हालाँकि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार यात्रा दल के पहुँचने तक मार्ग दुरुस्त कर दिया जायेगा। खबर लिखे जाने तक तवाघाट से माँगती सड़क सुधारीकरण और गर्बाधार सें गुंजी तक सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। ग्रीफ द्वारा बारूदी विस्फोट किये जाने से तीनतोला के निकट तथा गुंजी से कालापानी के बीच विशाल चट्टानें सड़क पर आ गई थीं। माह के अन्तिम शनिवार को बरसात के कारण पुनः मार्ग बन्द हो गया है। पोर्टर्स यूनियन के अध्यक्ष हरीश धामी ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि यात्रा के दौरान ही क्यों इन्हें ऐसे खराब मौसम की याद आती है ? उनका सुझाव यह भी है कि यदि मार्ग सुचारु नहीं हो पाता तो यात्रा पूर्व की भाँति नारायण आश्रम होते हुए की जाये।
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