कपकोट तहसील के दूरस्थ हिमालयी क्षेत्र में अप्रेल 2009 से फरवरी 2010 तक लगभग ढाई हजार कुंटल राशन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। हालाँकि खानापूर्ति के लिए इसमें अब जाँच हो रही है। ऐसे प्रकरणों के पूर्व इतिहास से परिचित लोगों का मानना है कि इस मामले को कुछ वक्त के बाद दबा दिया जाएगा।
गत माह कुछ लोगों द्वारा जिलाधिकारी बागेश्वर से कपकोट तहसील के कर्मी तलाई में राशन सड़ने की शिकायत कर आवश्यक कार्यवाही करने की माँग की। अधिकारियों व ठेकेदार द्वारा महीनों से ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा था कि ‘‘खच्चर, मजदूर नहीं मिल रहे हैं’’, ‘‘माल तलाई में रखा है…….पहुँचा देंगे’’ …आदि…आदि। इस झूठ को लोग सच मानते रहे। महीनों इंतजार के बाद लोगों को अनाज के सड़ने की फिक्र हुई तो वे फिर चिल्लाए। ठेकेदार का फिर वही जवाब सुन कर ग्रामीण डी.एम. के पास जा धमके। डी.एम. ने एस.डी.एम. कपकोट से जाँच करने को कहा तो एस.डी.एम. साहब ने अपनी गोपनीय जाँच रिपोर्ट डी.एम. को दे दी, जिसमें बताया गया है कि ग्रामीणों का ये कहना गलत है कि क्षेत्र में अनाज रखा है। अनाज तो पहुँचा ही नहीं। इधर खुद पूर्ति विभाग जलेबी वाली भाषा में बताने लगा कि कतिपय कारणों से अनाज नहीं बँट सका। जिनको नहीं मिला वे ले लें। मतलब ढाई हजार कुंटल राशन हल्द्वानी के गोदाम से चलने के बाद गायब हो गया, कहाँ गया, किसने खाया ? किसी को नहीं मालूम।
कपकोट क्षेत्र के तलाई गोदाम के लिए लगभग 1,600 कुंटल राशन सूपी, खल्झूनी, झूनी, मिखलाखल पट्टा, नीड़-नागिला, बैछम, तरसाल, पतियासार, हरकोट, लाहूर, सलिंग आदि गाँवों में जाना था। लगभग 700 कुंटल राशन बदियाकोट के बोरबलड़ा, बोराचक, झारकोट, कंुवारी, किलपारा, सूराग, खाती व तीख में वितरित होना था। ये राशन इन क्षेत्रों में पहुँचा ही नहीं। अनाज कहाँ गया, अभी नहीं पता चला है। शायद पता चले भी नहीं। हाँ, कागजों में सब कुछ ठीकठाक कर देने की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं।
इस मामले को लेकर दानपुर घाटी के कुछ जागरूक लोग जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह दानू को साथ ले कर डी.एम. के दरबार में जा पहुँचे। भनक लगते ही डी.एस.ओ. भी निरीक्षण के लिए भागे। लेकिन चौड़ास्थल गाँव में ही उन्हें ठेकेदार तथा विभागीय इंस्पेक्टर ने समझा दिया, ‘‘घबराइए मत। कुछ होने वाला नहीं है। ये सब तो चलता ही आ रहा है यहाँ वर्षों से।’’ इस आश्वासन के बाद डी.एस.ओ. साहब वापस आ गए। इधर जिलाधिकारी डी.एस. गर्ब्याल ने एस.डी.एम. शिवचरण द्विवेदी को जाँच के आदेश दिए। एस.डी.एम. ने जाँच में अनाज न मिलने की ग्रामीणों की शिकायत को जायज पाया। इसके बाद पूर्ति विभाग ने भी पैंतरा बदलते हुए एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राशन क्षेत्र में नहीं पहुँचा है। अपनी सफाई देते हुए विभाग का कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जिले में सामान्य, ए.पी.एल. व बी.पी.एल. योजना के तहत गेहूँ व चावल का आबंटन 8,097 कुंटल है। कपकोट में जो हुआ है, उसमें सस्ते गल्ले की दुकानों का ही दोष है। पर दोषियों पर क्या कार्यवाही पूर्ति विभाग करेगा, इस मामले में सभी ने चुप्पी साध रखी है।
























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