अखिल गढ़वाल सभा द्वारा आयोजित ‘कौथिग-2011 महाकुम्भ’ दिनांक 11 नवम्बर 2011 को देहरादून में एक सांस्कृतिक सद्भावना रैली के साथ शुरू हुआ। सायं 4 बजे सभा भवन में आयोजित ‘विज्ञान का व्यवहारिक ज्ञान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पद्मश्री डॉ. ए.एन. पुरोहित एवं डॉ. राजेन्द्र डोभाल प्रमुख वक्ता थे। कौथिग-2011 का औपचारिक उद्घाटन मुख्यमंत्री खण्डूड़ी ने शाम को किया। इस अवसर पर ‘संवेदना’ उत्तरकाशी, ‘जौनसार बाबर सांस्कृतिक लोक कला मंच’ चकराता, ‘भुवनराम पार्टी’ जागेश्वर (अल्मोड़ा), ‘पिण्डरघाटी संस्था’ एवं ‘बधाणी सांस्कृतिक समिति’ चमोली तथा ‘आदर्श लोक कला केन्द्र’ उधमसिंहनगर की टीमों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।
12 नवम्बर को एक संगोष्ठी हुई, जिसका उद्घाटन संस्कृति मंत्री विजया बड़थ्वाल और अध्यक्षता सुमित्रा धूलिया ने की। उत्तराखण्ड के साहित्य में महिलाओं की उपस्थिति, उत्तराखण्ड में पलायन तथा महिलाएँ, उत्तराखण्ड में महिला हिंसा का परिदृश्य, उत्तराखण्डी राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति, उत्तराखण्डी महिलायें और सुशासन, शराब की नीति तथा उत्तराखण्डी महिलाएँ आदि विषयों पर डॉ. सविता मोहन, वीणापाणी जोशी, कमला पंत, विनोद उनियाल, डॉ. कुसुम नौटियाल, मीरा सकलानी, लक्ष्मी रतूड़ी आदि ने अपने विचार प्रकट किये। संचालन गीता गैरोला ने किया। तीसरे पहर गढ़वाली फिल्म फेस्टिवल में ‘बद्रीकेदार फिल्म्स’ की ’घरजवै’ तथा ‘कपिला उप्रेती फिल्म्स प्रोडेक्शन’ की ’इकुलांस’ प्रस्तुत की गई। शाम को कृषि पर आधारित जौनसारी लोकनृत्य प्रस्तुत किये गये। ‘सन्देश सांस्कृतिक कला मंच’ चमोली ने नन्दा देवी के जागरों के साथ झुमैला तथा थड्या नृत्य प्रस्तुत किया। ‘पिण्डरघाटी उत्थान’ एवं ‘बधाणी सांस्कृतिक समिति’ ने वीर और गोरील नृत्य प्रस्तुत किया। ‘यमुनाघाटी जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर’ ने बिस्सू मेले का जुड्डा नृत्य व स्वाल घाटी छोलिया नृत्य दल ने छोलिया नृत्य तथा कृषि आधारित नृत्य प्रस्तुत किया। ‘नवोदय पर्वतीय कला’ जौनसार बाबर, ‘नन्दादेवी क्लब’ ग्राम लाता (जोशीमठ), उत्तराखण्ड महिला कल्याण समिति, पे्रमनगर, ‘नवोदय पर्वतीय कला केन्द्र, पिथौरागढ़ आदि ने भी प्रस्तुतियाँ दीं।
कौथिग के तीसरे दिन चित्रकला प्रतियोगिता हुई, जिसमें देहरादून के विभिन्न विद्यालयों के 300 विद्यार्थियों ने भाग लिया। तीन वर्गां में विभाजित प्रतियोगियों को ’किसी खेल का दृश्य’, ’उत्तराखण्ड के पर्यटक स्थल’ और ’पर्यावरण संरक्षण’ पर चित्र बनाने थे। गढ़वाली पुस्तक प्रदर्शनी में 1914 की जीत सिंह नेगी द्वारा रचित जौलमंगरी, 1927 की बलदेव प्रसाद दीन की बाट कि गोड़ाई, 1955 की गोविन्द चातक की गीत बासन्ती, 1959 की फुर-घिंडुडी, जैसी पुस्तकों ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। इस दिन फिल्मोत्सव में फिल्म ’गट्टु अर कलजुगी द्यब्ता’ का प्रदर्शन और ’उत्तराखण्डी सिनेमा अर सरकार की भूमिका’ विषय पर गोष्ठी हुई, जिसमें नरेन्द्र सिंह नेगी, श्रीश डोभाल, प्रदीप भण्डारी और फिल्मोत्सव के संयोजक रमेन्द्र कोटनाला ने विचार रखे। शाम सम्पन्न हुए कवि सम्मेलन में नरेन्द्र सिंह नेगी, ललित केशवान, प्रेमलाल भट्ट, नेत्र सिंह असवाल, जयपाल सिंह रावत, वीणापाणी जोशी, गणेश खुगशाल ’गणी’, विरेन्द्र पंवार, बीना बेंजवाल, गिरीश सुन्दरियाल, हरीश जुयाल ’कुटुज’, देवेन्द्र प्रसाद जोशी, पूरण पन्त ’पथिक’, धनेश कोठारी, निरंजन सुयाल, जगदम्बा प्रसाद चमोला, मदन मोहन डुकलाण और नीता कुकरेती ने काव्य पाठ किया ।
14 नवम्बर 2011 को सम्पन्न महिलाओं की आंचलिक वेशभूषा प्रतियोगिता में विभिन्न जनपदों की 33 प्रतिभागियों ने घास काटते हुए, गेहूँ की गुडाई करते हुए, जंगलों में घास-लकड़ी काटते आदि अवसरों पर पहने जाने वाले परिधानांे की प्रस्तुति दी। इस दिन फिल्मोत्सव में दो गढ़वाली फिल्मों, उत्तराखण्ड आन्दोलन पर आधारित ’तेरी सौं’ और भ्रष्ट अफसरों और राजनीतिज्ञों के बीच फँसे पहाड़ी युवक के संघर्ष की कहानी ’गौरा’ का प्रदर्शन किया गया। शाम को गीत/लोकगीत प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।
अगले दिन ’उत्तराखण्ड राज्य दशा और दिशा’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व कमिश्नर एस.एस. पांगती थे। अनुज जोशी, विजय धस्माना, डॉ. हरेन्द्र सिंह रावत, डॉ. बी.पी.नौटियाल व के.पी शर्मा आदि वक्ताओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति, हर्बल स्टेट की अवधारणा, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, रोजगारोन्मुख पर्यटन आदि विषयों पर विचार प्रस्तुत किये। इस दिन फिल्मोत्सव में ’कैना बाना’ और ’मनस्वाग’ फिल्मों का प्रदर्शन हुआ। सायं 7 बजे लोकगीत संध्या का शुभारम्भ बाल कलाकार करन रावत के ‘दैणा होंया खोली का गणेशा’ से हुआ। ओम बधाणी ने जागर गायन किया। संतोष खेतवाल, रेखा उनियाल, चन्द्र दत्त सुयाल, हीरा सिंह राणा, ललित मोहन जोशी, रजनीकांत सेमवाल, आलोक मलासी, मिलन आजाद, ओम बधाणी, मीना राणा, संगीता ढौंडियाल व साहब सिंह रमोला, चन्द्र सिंह राही, गजेन्द्र राणा, कल्पना चैहान, किशन महिपाल ने गीत/लोकगीत प्रस्तुत किये।
‘उत्तराखण्ड राज्य दशा और दिशा’ गोष्ठी 16 नवम्बर को भी जारी रही। अध्यक्षता भगवती प्रसाद नौटियाल व संचालन प्रेम बल्लभ बहुगुणा ने किया। राजेन्द्र टोडरिया, गणेश सिंह गरीब, नारायण सिंह राणा व अविनाश जोशी आदि वक्ताओं द्वारा भ्रष्टाचार के निदान, पारम्परिक खेती के बदलते स्वरूप और चकबन्दी, युवाओं में खेलों के प्रति रुझान एवं खेल नीति, गढ़वाली भाषा की विकास यात्रा एवं प्रदेश के विकास में बाँधों की भूमिका विषय पर विचार प्रस्तुत किये गये। जिम कार्बेट को समर्पित गढ़वाली फिल्म ’मनस्वांग’ के साथ ’याद आली टिहरी’ और ’नन्दा की पैली जात’ फिल्में भी प्रदर्शित की गई। सायंकाल ’गढ़-विभूति सम्मान’ में मुख्य अतिथि विजय धस्माना, कुलपति हिमालयन हॉस्पिटल यूनिवर्सिटी तथा विशिष्ट अतिथि स्वर्ण सुब्बा राव महासर्वेक्षक भारतीय सर्वेक्षण विभाग व ले.ज. (अ.प्रा.) शैलेन्द्र राज बहुगुणा थे। ललित केशवान को साहित्यिक उपलब्धियों, विजय जड़धारी को बीज बचाओ आन्दोलन, सच्चिदानन्द भारती को पर्यावरण, अनुज जोशी को फिल्म निर्देशन तथा सोनम नेगी को खेलों में विशिष्ट उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।