बिपिन सेमवाल/संदीप नेगी
केदारनाथ धाम में प्रति वर्ष लाखों की तादाद में तीर्थयात्री आते हैं, परन्तु इन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रा काल से पूर्व हालाँकि आला अधिकारियों द्वारा इन समस्याओं के निराकरण करने के लिये कई बार सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया जाता है, परन्तु इस दिशा में कोई भी ठोस काम नहीं हो पाता। केदारनाथ में मुख्य समस्या अलाव की है। अलाव की उचित व्यवस्था न होने से प्रति वर्ष कई तीर्थयात्री काल के गाल में समा जाते हैं। जबकि गौरीकुण्ड से सोनप्रयाग तक मंदाकिनी नदी के प्रवाह में कई टन सूखे पेड़ गिर कर सड़ भी चुके हैं। वन निगम के कर्मचारी इस बात के बारे में जानकारी देने के बावजूद भी इन्हें नहीं उठाते। आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या के अनुरूप शौचालयों की व्यवस्था न होने से कई लोगों द्वारा मंदाकिनी नदी में शौच किया जा रहा है। गंगा नदी की यह सहायक नदी अपने उद्भव से ही दूषित हो रही है। शासन-प्रशासन के पॉलीथीन उन्मूलन के लाख दावों के बावजूद केदारपुरी तथा यात्रा के अन्य पड़ावों में व्यवसायियों तथा यात्रियों द्वारा पॉलीथीन का जमकर उपयोग किया जा रहा है।
गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम पैदल मार्ग में घोड़े, खच्चर तथा कंडी-डंडी मालिकों द्वारा आवागमन के दौरान मार्ग में अपनी साईड पर चलने की अनिवार्यता का ध्यान नहीं रखा जाता। इससे कई बार खच्चरों तथा घोड़ों से नीचे गिर कर तीर्थयात्री चोटिल हो जाते हैं। तुर्रा यह कि घोड़े-खच्चर मालिक यात्रियों से स्थानीय भाषा में अभद्र मजाक ही नहीं करते, कई बार अभद्र व्यवहार भी करते हैं। केदारनाथ धाम में पुल के नजदीक लीद का दलदल बन गया है।
केदारनाथ के आधार शिविर गौरीकुण्ड में सीवर लाइन न होने से भी काफी दिक्कतें आ रही है। इस सम्बन्ध में कई बार प्रशासन को प्रस्ताव प्रेषित किये जा चुके हैं। सोनप्रयाग से गौरीकुण्ड मोटर मार्ग अत्यधिक संकीर्ण तो है ही, लगातार क्षतिग्रस्त रहता है। इस मार्ग पर घण्टों जाम लगे रहने से यात्री छटपटाते रहते हैं। गौरीकुण्ड में यात्रियों की बढ़ती संख्या केा देखकर अब पार्किंग स्थल की जरूरत महसूस की जाने लगी है। पार्किग न होने से वाहनों को रोड पर ही गौरीकुण्ड से काफी दूर ही खड़ा करना पड़ता है और यात्रियों को अपने वाहन तलाशने में बहुत समय बर्बाद करना पड़ता है। लगातार बढ़ती हवाई सेवा के कारण केदारनाथ की पवित्रता तथा शांति भंग हो रही है। इन हैलीकॉप्टरों द्वारा न तो ऊँचाई ही मेंटेन की जाती है और न ही इन्हें प्रशासन द्वारा आबंटित समय के अनुसार संचालित किया जाता है।
कुल मिलाकर केदारनाथ धाम में साल दर साल आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन इस बात में संशय है कि वे कोई अच्छा प्रभाव लेकर अपने घरों को लौटते होंगे।