और करो आन्दोलन…
खड़क सिंह……सौंग के पूर्व प्रधान। दो वर्ष पूर्व सौंग में उत्तर भारत माईक्रो हाइडिल के खिलाफ चले आंदोलन में सक्रिय रहने से नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों व हाइडिल कम्पनी के कारिंदों की आँखों की किरकिरी बने रहे। गत 18 अगस्त को सौंगं में मची तबाही में खड़क सिंह का दो मंजिले मकान के चार कमरों के साथ ही उनकी दुकान व आटा चक्की ध्वस्त हो गई। इस हादसे में उसे लगभग दो लाख का नुकसान हुआ है। सलिंग गधेरे में आई बाढ़ इतनी भयानक थी कि वह अपने साथ एक मोटर बाइक व कार को भी बहा ले गई। सड़क किनारे खड़ी बस को भी बाढ़ ने काफी नुकसान पहुँचाया। खड़क सिंह अब नाच रहा है मुआवजे के लिए। उसका दुःख न तो किसी को दिख रहा है और न ही कोई महसूस करना चाहता है। विरोधी कहते फिर रहे हैं, ‘‘खूब हल्ला मचा रहा था आंदोलन में…..परियोजना नहीं बनने देंगे!….. कितना समझाया था उस वक्त कि भई हम लोगों के साथ मिल जा, भविष्य सुधर जाएगा। …..तब कहता था कि नहीं सुरंग बनने से ये हो जाएगा…. वो हो जाएगा। अब कर आंदोलन…..। तेरा तो कुछ नुकसान नहीं हुआ है। मकान ही तेरा बेनाप में है।’’
सौंग में हुआ हादसा आसानी से भुलाया नहीं जा सकता। 18 बच्चों की मौत के साथ ही समूचा सौंग विद्युत परियोजनाओं की वजह से तुड़तुड़िया गधेरे से मुनार तक भरभरा उठा था। पैदल व सड़क मार्ग ध्वस्त हो गए थे। कई जगहों पर भूस्खलन ने तो कई मकानों को गधेरों की बाढ़ ने नुकसान पहुँचाया। कई मकान दरक गए। मुख्यमंत्री समेत कई दिग्गज पीड़ितों को सांत्वना देने आये। यह सिलसिला महीनों तक चला। मौत की गोद में समा चुके मासूम बच्चों के परिजनों को राहत राशि बाँटते वक्त माननीय जनता की नब्ज भी टटोल कर देखते रहे कि इस भीड़ को वोट बैंक में कैसे बदला जाए। विद्युत परियोजनाओं को बंद करने या विस्थापन की माँग को अनुसुना कर जनता को आश्वासनों का झुनझुना थमा गए। मृतक बच्चों के कई परिजनों ने कई दिनों तक सकते की हालत में रहने के बाद बाहर तराई में बसे अपने रिश्तेदारों के वहाँ शरण ले ली है। उन्हें नेताओं व प्रशासन पर अब भरोसा नहीं रह गया है।
मुआवजे में अब राजनीति शुरू होने लगी है। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने नुकसान का मुआयना कर मुआवजा भी देना शुरू कर दिया है। लेकिन नुकसान का आँकलन कर रहे दल पर कई पीड़ितों ने भेदभाव व सुविधा शुल्क माँगने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कपकोट तहसील के कर्मचारी मुआवजा देने के बजाए मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। शिकायत करने पर देख लेने की धमकी दे रहे हैं। पीयूसीएल के प्रदेश उपाध्यक्ष नंदा बल्लभ भट्ट का कहना है कि प्रशासन छुटभैये नेताओं तथा माईक्रो हाइडिल कम्पनी के इशारे पर नाच रहा है। उन्होंने सौंग के सलिंग गधेरे से खड़क सिंह के मकान को पहुँचे नुकसान पर प्रशासन के कारिंदों की रिपोर्ट को साजिश करार दिया है। प्रशासन नाप-बेनाप कर क्यों कुछ पीड़ितों के साथ भेद-भाव कर रहा है ? जबकि कई बेनापधारियों को बिना किसी नुकसान के सुविधा शुल्क ले मुआवजा दे दिया गया।
बहरहाल खड़क सिंह थक कर चुप हो गया है। सांसदों, राजनेताओं, विधायकों के बाद जिलाधिकारी व एसडीएम के दरबार में अपनी व्यथा सुनाने के बाद भी उसे कहीं से कोई मदद नहीं मिली। इस आपदा को अब उसने अपनी नियति मान लिया है। सौंग में माईक्रो हाइडिल के खिलाफ आंदोलन में भागीदारी करने के नफे-नुकसान का भी वह विश्लेषण कर रहा है।