पिछले वर्ष कोसी की बाढ़ से रामनगर की सुरक्षा के लिये बनाया गया कोसी का तटबंध टूट गया और शहर में पानी घुस गया था। अब तक उस तटबंध की मरम्मत नहीं हो पाई है। करीब 25 हजार की आबादी खतरे की जद में है। ब्रिटिश शासन के दौरान 1924 में भारी बरसात के चलते कोसी नदी में 1.25 लाख क्यूसेक से भी ज्यादा पानी आ गया था। भारी बाढ़ से सैकड़ों एकड़ जमीन बह गई। कई बस्तियाँ तबाह हो गईं। तब रामनगर के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देखते हुए 1926 में एक योजना को मूर्त रूप दिया गया। आधा किमी लम्बी, 25 फीट ऊँची तथा आठ फीट चौड़ी दीवार बनाई गई। यह तटबंध 1933 व 1970 की बाढ़ तो झेल गया, लेकिन सितम्बर 1993 में आई बाढ़ में कोसी के पानी का जलस्तर, क्षमता से बहुत अधिक, 1.59 लाख क्यूसेक तक पहुँच गया था। तब इस तटबंध के डिवाइडर वॉल का एक पिलर बह गया और बुनियाद में 2-3 मीटर के गड्ढे बन गये, जो बाद में दरार में बदल गये।
नवम्बर 2006 में सिंचाई विभाग ने बैराज के दीवार की मरम्मत के लिये 107.23 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा। वहाँ इसकी लागत 99.23 लाख कर दिये जाने पर दिसम्बर में संशोधित प्रस्ताव भेजा गया। तब से वह फाइलों में दबा है। तब इस तटबंध की मरम्मत हो जाती तो शायद पिछले वर्ष के नुकसान से बचा जा सकता था। पिछले साल कोसी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर, 1.60 लाख क्यूसेक तक पहुँच गया। पहले से जर्जर तटबंध का 250 फीट क्षेत्र टूटने से रामनगर की 25 हजार की आबादी प्रभावित हो गयी। रामनगर के अनेक मोहल्ले तथा अनेक गाँव बाढ़ की चपेट में आये। सैकड़ों एकड़ भूमि बह गई। रामनगर की जनता इस बरसात में साँस रोके पड़ी है और ऊपर वाले को मना रही है कि उसे बचाये रखे।
kosi beraj + jan dhan ki hani rokne ko chahiye 20 crore rupee.
madan bisht
Kyari
ramnagar