बसौली-सुनोली सड़क मार्ग के नीचे इनाकोट में स्थापित लीसा फैक्ट्री से स्थानीय निवासियों को भय है कि भविष्य में यहाँ का पर्यावरण प्रदूषित होगा तथा प्राकृतिक सम्पदा की लूट व गुण्डागर्दी बढे़गी। सुनोली ग्रामसभा की 13 जून को सम्पन्न आम सभा में फैक्ट्री के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया है। पर ग्रामीणों को उम्मीद नहीं है कि पंचायत इस मामले में कुछ करेगी।
बताया जाता है इस फैक्ट्री के लिए भैंसोड़ी ग्राम सभा के झोलना तोक गाँव निवासी किशोरी लाल ने अपनी जमीन 20 हजार रुपए प्रति वर्ष की दर से दो वर्ष के लिए जुगल किशोर पेटशाली को दी है। फैक्ट्री निर्माण में सड़क के नीचे की सार्वजनिक दीवार तोड़कर उसके पत्थरों का उपयोग करने से मार्ग धँसने का खतरा बन गया है। इस इलाके में अस्सी के दशक से लीसा गड़ान बंद हो गया था। बिनसर अभयारण्य घोषित हो जाने के बाद यह इलाका काफी संवेदनशील बन गया है। लीसा फैक्ट्री के हिमायती इसे रोजगार से देख रहे होंगे, पर ग्रामीण मानते हैं कि अपने हक-हकूकों को बचाते हुए यहाँ के वनों की रक्षा करना भी उनका कर्तव्य है। ग्रामीणों का कहना है कि इन दिनों पंचायती और सिविल वनों में चीड़ के पेड़ों में चीरा लगाने के लिए हो रहे छिलान के बारे में उनकी कोई राय नहीं ली गई। विवादों में घिरी सुनोली ग्राम पंचायत ने आबादी से दूर जंगल में बंजर भूमि को समतल कर 18 मीटर चौड़ा व 22 मीटर लम्बा बच्चों के खेलने का मैदान एक लाख रुपये की लागत से बना दिया। यह जगह किसी भी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। निकट ही श्मशान घाट है। पंचायत का कामकाज देख रहे प्रधान पति अन्यत्र जगह न मिलने का बहाना बना रहे हैं, जबकि बिना लोगों से चर्चा करे ही उन्होंने यह काम कर दिया था। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रहे बसौली-सुनोली मोटर मार्ग का कार्य भी बहुत मन्द गति से चल रहा है। बताया जा रहा है ठेकेदार द्वारा यहाँ से निकाले गये पत्थरों को अन्यत्र बेच दिया जा रहा है। इसे बनते चार-पाँच साल हो गये पर थोड़ी वर्षा होने पर भी इस पर यातायात ठप्प हो जाता है। इस सड़क का मुआवजा भी अब तक नहीं दिया गया है, जबकि क्षति का आंकलन हो चुका है। लोग वर्षों से बसौली-बिनसर लिंक मोटर मार्ग के निर्माण की मांग कर रहे है, जिससे पर्यटन और स्थानीय उत्पाद के विपणन को भी बढ़ावा मिलेगा।
अन्यत्र की तरह सुनोली में भी बीपीएल कार्ड बनाने में जम कर धाँधली हुई है। यहाँ पिछली बरसात में क्षतिग्रस्त मकानों, खेतों, दीवारों का मुआवजा नहीं मिला है। तोक रेशाल में बही पुलिया और प्राथमिक विद्यालय नकसीला के ध्वस्त भवन का निर्माण नहीं हुआ है। स्कूल प्रा. विद्यालय सुनोली में चल रहा है। ताकुला-गणनाथ- मनान-सोमेश्वर मोटर मार्ग तीन किमी जंगलात में आने से वर्षों से अटकी है। शुरू में इस सड़क को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने बिपिन त्रिपाठी के नेतृत्व में सत्याग्रह किया था। प्रदीप टम्टा ने भी विधायक रहते कुछ रुचि ली थी। मगर अब सब अटका पड़ा है। गणनाथ के विनायकथल में ताकुला विकासखंड का मुख्यालय है, लेकिन 50 से अधिक वर्षों बाद भी ब्लॉक मुख्यालय सड़क से नहीं जुड़ पाया है। सोमेश्वर जाने के लिए बसौली-ताकुला क्षेत्र के लोगों को अल्मोड़ा-कोसी-हवालबाग होते हुए सोमेश्वर की ओर जाना पड़ता है और सोमेश्वर क्षेत्र के लोगों को अल्मोड़ा आना पड़ता है। वैसे मनान से गणनाथ तक जंगलात की पुरानी कच्ची सड़क बनी है, जिसे लोक निर्माण विभाग को सौंप पक्की सड़क बनाई जानी है, जो ताकुला से बन रही सड़क से मिलनी है। लेकिन इस इलाके का दुर्भाग्य है कि डींग हाँकने वाले नेता जरूरी कार्यों में रुचि नहीं रखते।