पिंडर घाटी से आये लोगों ने देवाल ब्लॅाक में ‘पिंडर को अविरल बहने दो’, ‘हमें सुरक्षित रहने दो’, ‘बाँध कंपनी वापिस जाओ’ आदि नारों के साथ देवाल ब्लॅाक में जुलूस निकाल कर एक रैली की। वक्ताओं ने कहा कि सरकार छोटी परियोजनाओं पर ध्यान ही नहीं दे रही है। चमोली जिले में ही 400 किलोवाट की थराली, 800 किलोवाट की कोठियाल सैंण, 750 किलोवाट की गोविंदघाट व 800 किलोवाट की तपोवन जल विद्युत परियोजनायें बंद हैं। दरअसल मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा है। ध्यान देने की बात है कि गंगा की सहायक नदियों में पिंडर ही एकमात्र ऐसी नदी है, जो अब तक बाँधी नहीं गई है। बाद में उन्होंने बाँध का पुतला भी फूँका। भूस्वामी संघर्ष समिति और माटू जनसंगठन के बैनर तले पिंडर गंगा के पंचप्रयाग के निकट देवाल के प्राचीन शिवमंदिर में गाँवों से प्रतिनिधि के रूप में आये लोगों ने बैठक कर बाँध विरोध की लड़ाई तेज करने का निर्णय लिया।
चमोली जिले में पिंडर नदी पर प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना का शुरू से ही विरोध हो रहा है। देवाल को बचाने का भ्रम पैदा कर, बाँध की ऊँचाई 90 मीटर से घटा कर 35 मीटर करने का प्रचार किया गया। मगर यह तथ्य छुपा लिया गया कि जो सुरंग पहले 7 किलोमीटर थी अब बढ़ा कर 18 किमी कर दी गई है। भूकंपीय दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील इस क्षेत्र के गाँवों में सैकड़ों सालों से भूस्खलनों का इतिहास रहा है। अब इन्हीं गाँवो के नीचे सुरंग बन रही है। जिस नंदादेवी राजरात को उत्तराखंड सरकार दूसरा कुम्भ कहते नहीं थकती, उसका मार्ग इन्ही गाँवों से होकर गुजरता है।
13 अक्टूबर 2009 व 22 जुलाई 2010 को बाँध को लेकर हुई जन सुनवाइयों का लोगों ने डट कर विरोध किया। भयभीत होकर बाँध कंपनी ने 20 जनवरी 2011 को बैरिकेड लगाकर, जनता को दूर रखकर जन सुनवाई का नाटक पूरा किया। मगर पिंडर की जनता ने धरना, रैली, प्रदर्शनों के रूप में अपना विरोध लगातार जारी रखा। 3 अप्रैल 2011 को देश के विज्ञ जनों के सामने हुई लोक की ‘जनसुनवाई’ में पिंडर की जनता का विरोध खुलकर प्रदर्शित हुआ। आन्दोलन के क्रम में सरकार को लगातार पत्र भेजे गये हैं। अनेक बार शासन के लोगों के साथ जनता के प्रतिनिधि मिले भी हैं। मगर बाँध कंपनी हर तरह के हथकण्डे अपना कर बाँध को आगे धकेलने के प्रयास में लगी है। 15 मई, 2012 को पूर्ण डूब के गाँव शोडिंग, जहाँ सुरंग के लिये खुदाई शुरू की जा रही थी, में कालू नाम का एक नेपाली मजदूर दब कर मारा गया। इस सिलसिले में कोई पुलिस कार्यवाही नही हुई। जबकि ग्रामीणों के विरोध को दबाने के लिये दो दिन पूर्व उप जिलाधिकारी नेगी हलके का दौरा कर गये थे। थराली में भी पुलिस का भय दिखाकर काम चालू कराने की कोशिश हो रही है।