मैं 14 वर्षीय पूजा राना राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पाये बागेश्वर में कक्षा 8 की छात्रा हूँ। मैंने व मेरे 12 वर्षीय छोटे भाई राहुल राना जो कि राजकीय इंटर कॉलेज गरुड़ बागेश्वर में कक्षा 7 का छात्र है, ने जब से सिर उठाया है तब से आज तक लगातार जीवन जीने और पढ़ाई में स्थान बनाने के साथ ही समाज में खुद को स्थापित करने के लिये लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हमारी दर्द भरी कहानी शुरू होती है वर्ष 2003 में जानलेवा बीमारी एड्स से संघर्ष करते हुए हमारे पिता सीर, गागरीगोल जनपद बागेश्वर उत्तराखंड के निवासी जीवन सिंह राना की अकाल मौत के बाद। इससे पहले हमारे पिता मुम्बई में होटल की नौकरी करते थे। उन्होंने वहीं हमारी माता अंजलि से विवाह किया और हम दोनों बच्चों का जन्म भी मुम्बई में ही हुआ। मुम्बई से हमारा परिवार वर्ष 2002 में पैतृक गाँव गागरीगोल लौट आया। वर्ष 2003 में पिता की मृत्यु के बाद हमारी माँ अंजली राना ने हमें पिता की कमी महसूस नहीं होने दी और हमारे दादा आनन्द सिंह ने तब हमें पूरा सहयोग दिया। परन्तु दुर्भाग्यवश हमारी माँ अंजली राना भी बीमार रहने लगी। स्वास्थ्य परीक्षण में पता चला कि उन्हें भी एड्स का संक्रमण है। हमारे दादा ने माँ व हम दोनों बच्चों को छूत की बीमारी मान कर घर से बाहर निकाल दिया और हमारी माँ हम दोनों को लेकर टीट बाजार में एक रैस्टोरेंट में बर्तन धोने का काम करने लगी। एक दिन बीमारी के कारण वह नहर में कपड़े धोते वक्त बेहोश होकर गिर पड़ी। तब प्रार्थना भवन के पादरी विक्टर सिंह हमारी माँ अंजली राना को अपनी धर्म बेटी मानकर एक कमरा दे दिया। इस तरह हमने प्रार्थना भवन में शरण ली। हमारे मुँह बोले नाना विक्टर सिंह रंगाई पुताई की मजदूरी करके हमारे पालन पोषण में लग गये, परंतु हमारे दुर्भाग्य ने हमारा पीछा नहीं छोड़ा और एड्स बीमारी से 30 मई 2010 को हमारी माँ अंजली की भी मौत हो गयी। तब से आज तक हमारे मुँहबोले नाना विक्टर सिंह हमारे सब कुछ हैं। नाना ने काम के साथ-साथ हमारी पढ़ाई पर भी ध्यान दिया, जिसकी बदौलत मैंने कक्षा 6 और 7 में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में लगातार सर्वश्रेष्ठ छात्रा का स्थान प्राप्त किया। समाज सेवी व वरिष्ठ पत्रकार हरीश जोशी जी ने ‘पूजा की कहानी’ के नाम से मेरी शिक्षा के क्षेत्र में इस उपलब्धि और हम दो भाई-बहन की संघर्ष भरी कहानी के नाम से एनसीई को दिल्ली भेजा। जिसके बाद महिला और बालिका शिक्षा पर कोईलेशन के ग्लोबल एक्शन वीक हेतु हमारा चयन हुआ। 2 मई 2011 को गांधी शान्ति प्रतिष्ठान नई दिल्ली के एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में मुझे राज्य सभा सांसद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एन.सी.ई नई दिल्ली की बदौलत मेरी शिक्षा उपलब्धि को पूरे देश ने जाना। हरीश जोशी जी व बागेश्वर के वरिष्ठ पत्रकार केशव भट्ट जी के सहयोग से हमारी कहानी को अनेक पत्र-पत्रिकाओं ने प्रमुखता के साथ छापा। दि संडे पोस्ट के सम्पादक अपूर्व जोशी जी ने 25000 रुपया और 12000 रुपयों की दो किस्तें मेरे खाते में भेजी जबकि मुम्बई के व्यवसायी भोला दत्त पाण्डे ने 10 हजार रुपया भेजा। बोनाफाइड स्कूल चौखुटिया के प्रबंधक पुष्कर काण्डपाल जी, जनपक्ष आजकल के सम्पादक चारू तिवारी जी, केशव भट्ट जी एवं हरीश जोशी व अल्मोड़ा, रानीखेत, पिथौरागढ़, चम्पावत, काठगोदाम से अनेक भाई बहनों ने भी भारतीय स्टेट बैंक गरुड़ जिला बागेश्वर में मेरा खाता संख्या 31671346296 में पैसा जमा कर हमें आर्थिक मदद दी है। हमारे मुंह बोले नाना वृद्धावस्था के कारण मजदूरी का कार्य भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में पूरा समाज ही अब हमारे माता-पिता हैं। हमें अपने पैरों पर खड़े होने तक लगातार इसी समाज का सहारा बना रहेगा। जबकि इन विपरीत परिस्थितयों में हमारा बाल मन हमारी व्यवस्था से बार-बार निम्नलिखित सवाल करता है -
1. एड्स पीडि़त परिवारों के पुनर्वास की क्या सरकारी स्तर पर हमारी जैसी ही स्थिति होती है ?
2. हमारी पिता की पैतृक संपत्ति का हिस्सा हमें क्यों नहीं दिया जा रहा है।
3. राज्य और केन्द्र सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं में क्या हमारे लिये भी कुछ स्थान होगा ?
4. हमारी लाचारी पर हमें गोद लेने या अनाथालय भेजने की कोशिश क्यों की जा रही है ?
अब मैं पूजा राना व राहुल राना के नाना, दादा, मम्मी, पापा, बड़ा भाई, बड़ी बहन जैसा प्यार हमें चाहिये वो आप सब हमें देकर, अपनी मदद द्वारा बहुत आगे तक बढ़ायेंगे, जैसा हमारी मम्मी चाहती थी कि हम अच्छी पढ़ाई करें और अच्छे से समाज में अपना नाम रोशन करें।
पूजा राना द्वारा पास्टर विक्टर सिंह
किरमोलिया भवन, टीट बाजार,
गरुड़, बागेश्वर पिन 263641
मोबाइल: 9917628543