प्रमोद जोशी के अचानक स्मृति शेष हो जाने के बारे में वीरेन डंगवाल की भावांजलि पढ़कर स्तब्ध रह गया। समझ में नहीं आया कि ये कौन से प्रमोद जोशी हैं। जब चित्र को ध्यान से देखा तो स्मृतियों में प्रमोद दा उभर आये। उनसे पहले असगर वजाहत ने उनके बारे में विस्तार से लिखा, लेकिन वह अंक मुझे नहीं मिला। नैनीताल की कुछ घंटे की यात्रा के दौरान ‘नैनीताल समाचार’ के दफ्तर में बैठकर 24 मई को उसे पढ़ा।
प्रमोद दा से किसके माध्यम से और कैसे मुलाकात हुई यह तो याद नहीं। पर जब मुलाकात हुई उन दिनों मैं ‘जनयुग’ में कार्य कर रहा था। तब वे एच.आई.एल. के जनसंपर्क अधिकारी थे और उनका दफ्तर आई.टी.ओ. के निकट हंस भवन में था। उनसे मिलने का सिलसिला शुरू हुआ और उनसे जो अपनत्व मिला उसे भूल पाना आज भी संभव नहीं है। यह सम्पर्क लगभग बना रहा। वह उन तक ही सीमित रहा, उनकी पत्नी या बच्चों से मुलाकात नहीं हो पायी। जब उनका दफ्तर सीजीओ कॉम्पलेक्स के स्कोप में चला गया, तब भी मुलाकात होती रही लेकिन उनके रिटायरमेंट के बाद यह सिलसिला टूट गया। जब सिलसिला टूट गया तो उनके बारे में कोई खबर ही नहीं मिली।
अचानक वीरेन डंगवाल के उनके असामयिक निधन के बारे में लिखे ने झकझोर दिया। काफी देर तक चित्र को निहारता रहा- फिर पढ़ा। लगा कहीं कुछ टूट गया है। संपर्क न होने के बावजूद प्रमोद दा का निधन सूनापन छोड़ गया। दिल्ली में रहते हुए भी खबर नहीं मिली- न निधन की, न शोकसभा की। उसके बाद असगर वजाहत के लंबे आलेख से बहुत कुछ जाना।
जब मैंने म.प्र. के एक समाचार पत्र समूह की नौकरी छोड़ दी तो उसके बाद मुलाकात हुई। उन्होंने दिल्ली के एक समाचार पत्र में मुझे काम दिलाने का स्वयं ही प्रस्ताव किया लेकिन में ही चुप्पी साधे रहा। लेकिन उनके उस अपनत्व और मेरे भविष्य की चिंता ने मुझे उनके प्रति आदर से भर दिया। शब्दों का उनका माधुर्य, अपनत्व और हमेशा मार्गदर्शन के लिये तत्पर रहने की उनकी आदत को कभी भूल पाना संभव नहीं है। वे मेरी यादों में हमेशा बने रहेंगे। ‘नैनीताल समाचार’ ने उनके जीवन के कई पहलुओं को उनके अपनों के सामने जिस तरह से खोलकर रखा उसके लिये ‘नैनीताल समाचार’ का आभार। असगर वजाहत और वीरेन डंगवाल को भी धन्यवाद !
देवेन्द्र उपाध्याय
दिल्ली























What a beautiful letter. It’s been one year since Pramod left us and we miss him terribly. Please get in touch with me. I would love to hear more about him from you.
Thanks for such recollections about him.
Pragya