प्रस्तुति : ईश्वरी दत्त जोशी
बात 7 अक्टूबर की है। महिला समाख्या में प्रशिक्षण हेतु मैं चम्पावत जा रहा था। सुबह के सवा दस बजे थे। अभी लोहाघाट से बमुश्किल 5 कि.मी. दूर पहुँचा था कि महिला समाख्या चम्पावत की जिला कार्यक्रम समन्वयक सुश्री भगवती का फोन आया कि प्रशिक्षण में भाग लेने आ रही कार्यकर्ताओं से भरी जीप मानेश्वर के पास दुर्घटनागृस्त हो गई है। घायलों को लोहाघाट सरकारी अस्पताल में ले जाया गया है। मैंने बाइक लौटाई और सीधा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लोहाघाट पहुँचा। बाहर एसडीएम व 108 वाहन के अलावा कुछ अन्य गाड़ियाँ खड़ी थी।
अस्पताल में जबर्दस्त भीड़ थी। जिसने भी दुर्घटना की खबर सुनी दौड़ा चला आया। घायलों में अधिकांश लोहाघाट के आस-पास के लोग थे। जिन वार्डों में घायलों को भर्ती कराया गया था लोगों से खचाखच भरे थे। लोग मरीजों को चारों ओर से घेरे हुए थे। किसी तरह नजदीक जाकर देखा तो घायलों में कई परिचित चेहरे नजर आये। लेकिन उनकी हालत देख कुछ पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और वार्ड से बाहर निकल आया। अब तक एसडीएम की गाड़ी वापस जा चुकी थी। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त मैक्स लोहाघाट से चम्पावत जा रही थी, जिसमें महिला समाख्या के 8 कार्यकर्तियों के अलावा 2 अन्य महिला व दो पुरुष सवार थे। खूनाबोरा के पास चम्पावत से आ रही दो जीप जो ओवर टेकिंग कर रही थी, को बचाने के प्रयास में मैक्स खाई में गिर कर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। स्थानीय युवाओं की मदद से घायलों को निकाला गया। पहाड़ में काफी फायदेमन्द साबित हो रही 108 सचल वाहन ने घायलों को समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुँचाकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
अब तक डॉक्टर घायलों की प्राथमिक जाँच कर कुछों को ग्लूकोज चढ़ा चुके थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि सभी खतरे से बाहर हैं। बाकी एक्सरे के बाद ही पता चल पायेगा। बिजली न होने के कारण एक्सरे भी नहीं हो पा रहे थे। पता चलाकि अस्पताल में जनरेटर तो है लेकिन खराब पड़ा है! कुछ नेता टाइप लोग 15 मिनट में बिजली आ जाने की बात जोर-सोर से कर रहे थे। लेकिन अगले दो घंटों तक न तो बिजली आई और नहीं जनरेटर की व्यवस्था हो पाई। तब कहीं जाकर डॉक्टरों ने प्राइवेट में एक्सरे कराने की सलाह दी। कई वालिन्टियर आगे आये और घायलों को स्ट्रेचर में ले जाकर निकट ही पुनेठा अस्पताल में एक्सरे कराये जाने लगे। जब आधे घायलों का एक्सरे हो गया तो बिजली आ गई। सभी ने राहत की सांस ली कि शेष एक्सरे अस्पताल में ही हो जाएंगे। वास्तव में चोटग्रस्त मरीजों को स्ट्रेचर में लाना-लेजाना काफी कष्टकर था। बाद में पता चला कि अस्पताल में कराये गये एक्सरे साफ नहीं हैं। अतः उनसे भी प्राइवेट में एक्सरे कराने को कहा गया। अब अस्पताल में एकमात्र चिकित्सक सेन ही दिखाई दे रहे थे। उन्होंने एक्सरे देखकर बताया कि अधिकतर घायलों की हड्डियाँ फैक्चर हैं। उनके द्वारा पर्ची में दवाइयाँ तो लिख दी गईं किंतु तब तक औषधि वितरण कक्ष बन्द हो चुका था। घायलों को अन्यत्र रैफर करने हेतु चिकित्सकों की स्पष्ट राय न मिलने से परिजन असमंजस की स्थिति में थे। अंततः महिला समाख्या तथा घायलों के परिजनों ने गंभीर रूप से घायल सरोज बोहरा, मीनू पन्त, बिमला बिष्ट तथा मीना ओली को हल्द्वानी ले जाने का निर्णय लिया। इसके लिए एम्बूलेंस मगाई गई, जिसे मात्र 15 कि.मी. दूर चम्पावत से आने में दो घंटा से अधिक समय लगा। इसी बीच चम्पावत क्षेत्र की विधायिका एवं पूर्व कबीना मंत्री बीना महराना भी घायलों का हाल जानने अस्पताल पहुँची। अस्पताल की दयनीय स्थिति का जिग्र करते हुए मैंने उन्हें बताया कि अब तक घायलों की ड्रेसिंग तक नहीं की गई है। साथ ही उनसे आग्रह किया कि वे एम्बुलेंस हेतु सी.एम.ओ. से बात करें। उनके फोन करने के बाद कहीं जाकर शाम 5 बजे एम्बुलेंस पहुँची।
लोहाघाट जैसे चैतन्य नगर में अस्पताल की इस कदर दुर्दशा मेरे लिए आश्चर्यजनक थी। बार-बार ख्याल आ रहा था कि जिला मुख्यालय लोहाघाट में बनाये जाने की मांग को लेकर लम्बे समय तक संघर्षरत रहे सामाजिक- राजनैतिक कर्मी काश! स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की बेहतरी के लिए भी लड़ रहे होते। यह दुर्घटना पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का असली चेहरा दिखाने के साथ-साथ यह समझने के लिए भी पर्याप्त है कि आपदाओं से निपटने के लिए हमारा शासन/प्रशासन कितना चौकस है।



























i feel very bad for the above incident.There are still so many necessary things like good hospitals,24 hrs water facility,sports & cultural academy, jobs oriented courses,etc… are missing in my loving Lohaghat.
Why our local leaders/social activist/seniour citizens not taking iniciatives to improve the conditions of Lohaghat.