मैं लड़ूंगी हेम ………..![]()
तुम्हीं ने तो सिखाया था….
तुम फूलों को कुचल सकते हो
पर उनकी खुशबू को
फैलने से कभी नहीं रोक सकते
उपर्युक्त पंक्तियों के साथ ‘नैनीताल समाचार’ के 1 से 14 अगस्त 2010 के अंक में बबीता उप्रेती का अपने पति हेम पांडे की फर्जी मुठभेड़ में हुई मृत्यु पर लिखा लेख दिल को झकझोरने वाला है। इससे पूर्व के अंक में भी प्रभात उप्रेती व राजीव लोचन साह के लेख उस प्रखर व प्रतिभाशाली पत्रकार को समझने के लिए काफी है। यदि तेलगु दैनिक ‘इनाडु’ के उस रोज के अंक में शव का फोटो न आया होता तो श्री हेम की मौत रहस्य ही बनी रहती। ऐसे और कितने ही हेम मौत की नींद सुलाए गये होंगे और सुलाये जा रहे होंगे। इन लेखों से ही स्पष्ट हो रहा है कि जिन पूँजीवादी विकृतियों के विरुद्ध हेम सदैव बोलते रहे उन्हीं विकृतियों के वे शिकार हुए। विश्वास है कि ऐसे सैंकड़ों हेम पैदा होंगे, जो बबीता की भावनाओं का बाग खिलाएँगे, भले ही उनका हस्र हेम पाण्डे की भाँति ही क्यों न हो। बबीता अकेली नहीं होगी।
किरन, देहरादून