आपके नियमित रूप से प्राप्त होने वाले अंक मैं एक रात्रि में ही पूरा पढ़ जाता हूँ और अकसर आक्रोश होता है कि हमने जिस उत्तराखण्ड की कल्पना की थी वह तो माफिया / बिल्डर/ भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों की भेंट चढ़ गया। अब 3 माह के समय में श्रीमान खण्डूरी जी क्या इस ज्वलन्त भ्रष्टाचारी शासन को दुरुस्त कर पायेंगे ?
राजनीतिक पार्टिंयाँ एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। हर शाख में उल्लू बैठा है। न जाने उत्तराखण्ड का क्या होगा। उम्र के 74 वर्ष पन्त विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश शासन में बायोगैस विशेषज्ञ के रूप में काम कर एक वर्ष के अन्तराल के बाद पुनः विश्वविद्यालय लौट आया। विदेश में अढ़ाई वर्ष के शोध के पश्चात् जो शोध भी आया, कोई महत्व नहीं मिला। हाँ संतोष है कि 31 वर्ष की ईमानदार निर्भीक शोध अधिकारी होते हुए शिष्यों को अच्छी नौकरी देश/विदेश में मिल गई। यही सबसे बड़ी उपलब्धि है। अब शेष जीवन पूर्ण रूप से सामाजिक कार्यों में जुड़ा हूँ। प्रायः बहुत कुछ लिखने हेतु कलम उठाता हूँ, पर आपके समाचार पत्र के पढ़ने के पश्चात रात्रि में पुनः जाग कर आप तक पहुँचने की लालसा धरी रह जाती हैं। आपसे भेंट की इच्छा है कब? श्री देवेन्द्र मेवाड़ी मेरे परिचित हैं। उनसे निवेदन करियेगा कि अभी तो उत्तराखण्ड के अनेक गाँव बड़ी विकट समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन पर भी विचार कर लेखबद्ध करें।
डॉ. एस.एम. टंडन
अखिल भारतीय मानवाधिकार संगठन (शाखा रामनगर)
भवानीगंज, रामनगर