बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने उत्तराखण्ड में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी शंखनाद कर दिया है। बसपा के एक दिवसीय कार्यकर्ता, पदाधिकारी प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में गत 22 मई 2011 को हरिद्वार पहुँची मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए जुट जाने का निर्देश दिया। सम्मेलन में पहुँचे कार्यकर्ताओं की भीड़ को देखकर उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में जनता परिवर्तन करके रहेगी। उन्होंने कहा बसपा राज्य में किसी भी दल से चुनावी गठबंधन नहीं करेगी और दावा किया उत्तराखण्ड में अगली सरकार बसपा की होगी। भाजपा और कांग्रेस पर राजनैतिक हमला करते हुए कहा कि ये लोग अपनी पार्टियों के लिए उद्योगपतियों और पूँजीपतियों से चंदा वसूल करते हैं और सरकार में आते ही इन लोगों के हितों को साधने में लग जाते हैं। बसपा एकमात्र दल है जो कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से कमाये हुए धन के चंदे से चलता है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि उन्हें राजनीति दूसरे दलों के नेताओं की तरह विरासत में नहीं मिली है। उन्होंने उत्तराखण्ड में पार्टी के आधार को मजबूत करने के लिए ‘कैडर कैम्प’ आयोजित करने के निर्देश दिए और कहा कि बसपा के कैडर को बूथ स्तर तक पहुँचाना उत्तराखण्ड के हर नेता और कार्यकर्ता का लक्ष्य होना चाहिए।
प्रदेश के गत दो विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा है। 2002 में हुए चुनाव में बसपा को 7 सीटें मिली थीं तो 2007 के चुनाव में उसने एक सीट की वृद्धि करते हुए सीटों की संख्या 8 तक पहुँचा दी। बसपा का राजनैतिक आधार अभी तक हरिद्वार और उधमसिंह नगर तक ही सीमित रहा है। अन्य जिलों के विधानसभा सीटों में उसे वोट तो अच्छी संख्या में मिले, लेकिन वह कोई भी विधानसभा सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई। 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा की कोशिश ‘हाथी’ को पहाड़ पर चढ़ाने की है। अपनी इसी रणनीति के तहत बसपा ने भीमताल से मोहनपाल को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है।