प्रस्तुति : तड़ित घिल्डियाल
तीन साल पहले गढ़वाल विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद धीरे-धीरे इसमें परिवर्तन आ रहे हैं। सब अपने यहाँ इसका लाभ चाहते हैं। इसके अन्तर्गत बनने वाले संस्थान कब खुलेंगे और पैसा कब आयेगा यह फिलहाल तय नहीं है। लेकिन इनको खुलवाने को लेकर को जो राजनीति हो रही है, वैसी यहाँ पहले कभी नही हुई थी।
अभी गढ़वाल विश्वविद्यालय के तहत तीन परिसर- श्रीनगर, टिहरी और पौड़ी आते हैं। अब केन्द्रीय विश्वविद्यालय के तहत एक मेडिकल कालेज व एक इंजीनियरिग कालेज खोला जाना है। इंजीनियरिंग कालेज तो टिहरी के बादशाही थौल परिसर में प्रस्तावित है। चूँकि श्रीनगर के मुख्य परिसर में मेडिकल कालेज व और अनेक संकाय हैं, इसलिये मेडिकल कालेज की बात उठने पर स्वाभाविक रूप से पौड़ी का नाम प्रस्तावित होना था। लेकिन भाजपा की राजनीति के चलते इसे कोटद्वार में बनवाने के लिये पूरी ताकत लगाई जा रही है। भाजपा के बड़े नेता इसे बिजनौर सीमा पर हल्दूखाता में खुलवाने के लिये आन्दोलन भी चला रहे हैं। नागरिक संघर्ष समिति पौड़ी का कहना है कि उनका कोटद्वार से कोई विरोध नहीं है। केन्द्र सरकार की हर जिले में मेडिकल कालेज को खोलने की योजना है। किन्तु यदि केन्द्रीय विश्वविद्यालय का मेडिकल कालेज खुलता है तो उसे मानकों के अनुसार ही खुलना चाहिये। यदि विश्वविद्यालय का परिसर कोटद्वार में होता तो उनको कोई भी आपत्ति न होती। मानकों के तहत यह संस्थान गढ़वाल विश्वविद्यालय के तीन परिसरों में से किसी एक के कार्यक्षेत्र के तहत ही होना चाहिये। समिति द्वारा सूचना के अधिकार के तहत विश्ववि़द्यालय से जानकारी लेने पर भी इसी बात की पुष्टि हुई थी। स्थानीय विधायक यशपाल बेनाम के द्वारा विधान सभा में पूछे गये एक प्रश्न के जवाब में चिकित्सा शिक्षा मन्त्री बलवन्त सिंह भौर्याल ने जानकारी दी कि इस कालेज को निःशुल्क भूमि पर बनना है। पौड़ी में भूमि निशुल्क मिल रही है और पौड़ी से मिले प्रस्ताव के बारे में राजस्व विभाग को लिखा है कि वह प्रस्ताव की जाँच करे। नागरिक संघर्ष समिति का कहना है की समस्या नहीं है।
मगर भाजपा के स्थानीय विधायक इसे कोटद्वार में खुलवाने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगाये हैं। उनकी ओर से कोटद्वार में हल्दूखाता में साढ़े तीन करोड़ लागत की जमीन सुझाई गई है। पौड़ी की नागरिक संघर्ष समिति सांसद सतपाल महाराज से दिल्ली में मिल चुकी है। लेकिन महाराज कोटद्वार के वोट बैंक व चुनावों को करीब देख धर्मसंकट में हैं। इसलिये वे न यह बोलने को तैयार हैं कि इसे कोटद्वार में बनाया जाये और न यह कि इसे मानकों के अनुसार बनाया जाय। राज्य के मुख्यमन्त्री इसे कोटद्वार में खुलवाने के लिये बात कर चुके हैं। लेकिन महाराज की खामोशी के बाद भाजपा को भी लगने लगा है कि ऐसा करने पर मुख्यमन्त्री के चुनाव क्षेत्र में मतदाताओं पर असर हो सकता है जो पौडी के अधिक निकट है। 45 किमी दूर भरसार में औद्यानिक विश्वविद्यालय बनने से कुछ लोग पौड़ी में इसे खोलने का अधिक औचित्य बता रहे हैं, जहाँ कि राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्गति हुई है।