टीवी में तोंदधारी महाराष्ट्र पुलिस जो थ्री नॉट थ्री लिये हैं देख कर एक दर्शक कह रहे हैं – ‘‘आतंकवादी इन्हें देख रहे होंगे तो हँस रहे होंगे – इस जमाने में थ्री नॉट थ्री और ये फिटनेस…..।’’ एक दूसरे श्रोता बोले, ‘‘टी.वी. वालों को चार दिन की टी.आर.पी. मिल गई…..।’’ ठांय गोली चलती है….संवाददाता चौंक कर भागता है । फिर-देखिये ये पहली, ये दूसरी, ये ……. ये धमाका……विश्वनाथ प्रताप सिंह चल बसे… जो भी थे कवि थे, बौद्धिक थे……ईमानदार, थिंक टैंक। ये आतंकवाद वाला मामला न होता तो टी.वी. वालों को दो दिन का मसाला तो दे जाते….। दिल्ली में शर्मा शहीद हुए थे तो खूब टीवी में आया। अभी आतंकवाद के कारण 15 पुलिसिया शहीद बैक ग्राउंड में हो गये।
दर्शक रोमांच से सारी कार्यवाही देख रहे हैं क्रिकेट न सही यही सही….। एक दर्शक कह रहे हैं – ‘‘अरे अंदर घुस कर दिखाओ जैसे वैस्टर्न में।’’ कुछ लड़के बहुत उदास हैं – क्रिकेट सुना कैंसिल। उनके लिये यही राष्ट्रीय शोक है। एक आजन्मजात आलोचक कह रहे हैं – ‘‘सवाल है समुद्री रास्ते से कैसे आये ? कैसे इतना ज्यादा एम्यूनेशन लेकर इतने बड़े होटल में घुसे। सिक्योरिटी एजेंसी क्या कर रही थी ? हमारा क्या मौराल है ?…… अमेरिका हमारी सुंतुष्टीकरण की नीति, धर्म के धंधे पूरे 59 घंटे ये चला पर क्यों ?’’…. कविता याद आयी – शहीदों को सलाम पर जो ये शहीदीपन पैदा करते हैं कारगिल, आतंकवादी स्थिति पैदा करने देते हैं उनको धिक्कार….। एक बैठे ठाले प्रगतिशील नींबू की ब्लेक टी पीते कहने लगे- ‘‘पूंजीवाद का साइड इफेक्ट है आतंकवाद। कैसा धर्म ने ब्रेनवाश किया, जन्नत स्वर्ग का लालच दिया कि 20, 22 साल वाला नौजवान आश्वासन पर जन्नत के लिए हँस-हँस के जान दिये डाल रहा है। स्वधर्म गीता का यही है ?’’ टी.वी. वाला कह रहा है- और आतंकवाद का यह मंजर खत्म हुआ, खत्म हुआ आतंकवाद ! सचमुच……मुम्बई आतंकियों से मुक्त हुई…..।
सवाल दीपक से एक टीवी वाला पूछ रहा है……एक बिहारी पूछ रहा है – ‘‘वाकई ? क्या शिव सेना ने. …राज ने हमें माफ कर दिया।’’ एनडीटीवी के विनोद दुआ कह रहे हैं – हम चाँद पर जा सकते हैं, हम एटम बम बना सकते हैं पर आतंकवाद से क्यों नहीं लड़ सकते ? मनमोहन सिंह कहते हैं- बख्शेंगे नहीं ? किसे ? हम बड़ी कार्यवाही करेंगे ? किस पर ? कब ? ……वोट राजनीति का क्या होगा ? संतुष्टीकरण…..हिंदू मुस्लिम फंडामेंटलिज्म। एक धार्मिक महोदय कह रहे हैं-फंडामेंटलिज्म जरूरी है। फंडामेंटल लाइफ के नहीं तो क्या ? हन्ड्रेड टीवी- ये होता रहेगा, अफसोस जारी होता रहेगा….गोष्ठी होती रहेंगी.. …फिर फैडरैल सिक्यूरिटी की बात होगी. …फिर देश वैसे ही चलेगा…. युवाओं के चेहरे पर राष्ट्रीय शोक क्रिकेट न हो पाने पर उतरा है। ऐसी राजनीति से मोराल गड़बड़या। मोराल लक्जरी हो गया है। एक बुजुर्ग कह रहे हैं – राष्ट्रीय शोक होना चाहिये। सारे स्कूल कॉलेज बंद होने चाहिये। राष्ट्रीय शोक हमारे चरित्र के लिये होना चाहिये। टीवी वाला पूछ रहा है मुम्बई कमिश्नर से- क्या मुम्बई अब आतंकवाद से मुक्त है ? जवाब – जी जी….कनेक्शन कट गया है…. प्रश्न- इस प्रकरण से कुछ सबक भी है ? …..हलो ? हलो ?? कनेक्शन गायब…. मुम्बई के कमिश्नर ने मुम्बई वासियों का शुक्रिया अदा किया है….गतिरोध खत्म…तभी हलचल…..एनएसजी के चीफ दत्त टीवी के वार्ताकारों से निपटना आतंकवादियों से ज्यादा कठिन लग रहा है…..सारे चैनलों में दावा- सबसे पहले…. …सबसे पहले हम…..।
हेमंत करकरे बहुत शर्मीले अफसर थे… पुलिस वालों से बिल्कुल अलग….बहुत दिनों से हिंदुवादियों के आरोपों से उदास थे। ……आम्टे, सावरकर….सब शहीद…..। चुनाव चल रहे हैं। सभी राजनैतिक दल इस हादसे पर एक हैं……राष्ट्रीय शोक रिलैक्स है. टाटा का इंटरव्यू कहीं हो रहा था- वह हादसे पर रिलैक्स थे। हँस रहे थे क्या फर्क पड़ता है के अंदाज में. … ताज का ऐड हो गया….तेरा क्या होगा कालिया ? का सवाल जिंदा है.. …जीत का ताज कौन पहनेगा ? मेजर उन्नीकृष्णन सुना अपने जवानों को बचाने के चक्कर में मारे गये, एक कमांडो भी…वीरता का मतलब मौत है ? कोई छात्र कह रहा है इंगलेंड वालों को अच्छा बहाना मिल गया। पाँच बार तो हार गया। वो भी कहेंगे आतंकवादी मामला हो गया वरना अबके तो धून देते.
विश्वनाथ प्रताप सिंह जी तो शांति से मरे। वरना टीवी वाले दो दिन उनको भी खेंचते। तीन दिन का राष्ट्रीय शोक तो हो ही गया। पर जो निरीह जनता मारी जा रही है लगातार कौन है इसका जिम्मेदार ? हकदार ? कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज में सवाल – राजनेता, पूंजीवाद, धर्म….. लाग ऑन किजीये…..एसएमएस 0000000 या 059464-223201
बक रहा हूं जुनूं में क्या क्या कुछ
कोई न समझे खुदा करे कुछ
गालिब