21 जनवरी को बागेश्वर में प्रशासन के खिलाफ जनता का रौद्र रूप देखने को मिला। बौखलाई जनता, समुंद्र की लहरों की तरह उफान पर थी। प्रशासन किंकर्तव्य सा हो उठा। बमुश्किल जिलाधिकारी ने जनता को हत्यारों को पकड़ने के लिए आश्वस्त किया, तो जनता मानी।
गरूड़ के पूर्व ब्लाक प्रमुख व राज्य आंदोलनकारी चतुर सिंह परिहार डंगोली स्थित अपनी दुकान में संदिग्धावस्था में गत 30 दिसंबर को मृत मिले। यूकेडी के केन्द्रीय उपाध्यक्ष तथा स्व. चतुर सिंह के पुत्र एडवोकेट महेष परिहार ने इस संबंध में गरूड़ थाने में अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। कई दिनों तक पुलिस की निष्क्रियता पर जनता ने सर्वदलीय संघर्ष समिति का गठन कर गरूड़ तहसील में प्रशासन के खिलाफ आवाज उठा तालाबंदी करनी शुरू कर दी। समिति ने प्रशासन को 21 जनवरी को बागेश्वर में उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी। जिसे प्रशासन ने हल्के में लिया। 21 जनवरी को गरूड़ से सैकड़ों की संख्या में लोगों का हुजूम बागेश्वर जब पहुँचा तो यहाँ से भी प्रशासन के सताए लोग प्रदर्शनकारियों के जत्थे में शामिल हो गए। उग्र भीड़ एसपी कार्यालय पहुँची। यहाँ तालाबंदी करने के साथ ही उग्र जनता ने एसपी को काफी खरी-खोटी सुनाई। कहा कि उनमें नेतृत्व क्षमता का अभाव है जिसके चलते अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं। एसपी का अपने मातहतों पर कोई नियंत्रण नहीं है। पुलिस के आलाधिकारी अपराधियों को संरक्षण देने के साथ ही अवैध शराब को शह दे एसपी को मजे से गुमराह करने में लगे हैं और एसपी साहब उन्हें ज्ञान वाचने में लगे हैं। खुद एसपी के मातहत उनकी खिल्ली उड़ाने में लगे रहते हैं।
उग्र भीड़ के तेवर देख पुलिस भी मूक बनी रही। प्रशासन को धिक्कारते हुए भीड़ कुछ देर स्टेट बैंक तिराहे पर जाम लगाने के बाद तहसील में पहुँची। एसडीएम के कार्यालय में तालाबंदी की। इस बीच कुछ उग्र तत्वों ने वहाँ तोड़फोड कर दी। यहाँ विरोध के स्वर उठने पर मारपीट भी हो गई। विकास भवन में खड़े वाहनों की हवा निकाल तालाबंदी कर भीड़ कलेक्टे्ट पहुँची। इस बीच भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने अपना गुस्सा फर्नीचर, आग बुझाने के यंत्र, तख्ती, जनरेटर….आदि पर उतार दिया। घंटों तक अराजकता की सी स्थिति रही। देर सायं जिलाधिकारी के एक हफ्ते के आश्वासन के बाद जनता का गुस्सा ठंडा हुआ। बहरहाल एक हफ्ता बीतने के बाद जिलाधिकारी ने अभी 20 दिन का वक्त ले लिया है। ये आश्वासन देकर कि हत्यारे जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। इधर सर्वदलीय संघर्ष समिति का आंदोलन जारी है। इधर प्रशासन ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुछ लोगों के साथ ही अज्ञातों के खिलाफ कई संगीन धाराओं में मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। प्रशासन की इस कार्यवाही से जनता में फिर उबाल है। ![]()
यूकेडी के जिलाध्यक्ष हेम पंत, पीयूसीएल के जिलाध्यक्ष नंदा बल्लभ भट्ट सहित कांग्रेस के जिलाध्यक्ष उमेद सिंह माजिला, बहादुर सिंह परिहार, जिला पंचायत सदस्य महेश कांडपाल, हीरा बल्लभ भट्ट समेत सभी का कहना है कि जनता का ये गुस्सा अचानक ही नहीं था, बल्कि जिला प्रशासन के द्वारा अराजक तत्वों के खिलाफ कार्यवाही ना करने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने, जनता की आम समस्याओं को नजर-अंदाज करने की वजह से फूटा है। समय रहते प्रशासन को चेत जाना चाहिए नहीं तो ये परिपाटी जनता ने अपना ली तो आने वाले वक्त में उत्तराखंड के लिए ये काफी घातक साबित होगी।
नंदन भंडारी हत्याकांड के खुलासे का किया पुलिस ने दावा
गत् वर्ष 28 मई को सुबह भागीरथी गधेरे में भागीरथी निवासी नंदन भंडारी की लाश मिलने से सनसनी फैल गई थी। इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर समय-समय पर काफी सवाल खड़े होते रहे। एसपी ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह को जनता व मीडिया के सामने खड़ा कर दिया। गवाह सोहन सिंह उर्फ सोनी बाबा ने बताया कि पैंसों के लेन-देन व लड़की के मामले में नंदन की जान गई। पुलिस ने चश्मदीद गवाह के आधार पर निश्चय साह, विनीत साह व अनिल साह के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस प्रकरण पर जनता का कहना है कि पुलिस इस मामले को खोलने के लिए चतुर सिंह परिहार की हत्या के बाद जनआक्रोश के चलते मजबूर हो गई थी। अन्यथा इस मामले को दबाने में कई सभ्रांत लोगों का दबाव था और धीरे-धीरे यह मामला भी मनोज तिवारी हत्याकांड की तरह फाईलों में दफन होने की तैयारी में था।























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