नैनीताल समाचार परिवार को नववर्ष 2008 की शुभकामनायें। निर्भीक, समाजोद्धारक ‘समाचारियत’ आगे बढ़ती रहे!
देर-सबेर पढ़ने को मिलता ही है नैनीताल समाचार। कभी-कभी ज्यादा ही अबेर हो जाती है। इस बार जनवरी में दिसम्बर के दो अंक ‘आठ और नौ’ एक साथ पटक गया डाकिया। अंक आठ डाक विभाग की रेलवे विभाग की तरह ही नई स्कीम ‘सर्कुलर रूट ब्रेक जर्नी की सुविधायुक्त’ के अंतर्गत वाया लखनऊ आया है। इस पर लखनऊ जीपीओ 226001 दिनांक 10.12.07 की गोल मुहर छपी हुई है। कुछ दिन वहाँ रुक गया होगा। भेंट-घाट करते हुए आया है। हमें ज्यादा मलाल नहीं, पर हमारी श्रीमती जी को शिकायत है कि तिथि-त्यार जो पहले 10-12 दिन पहले मिलते थे, अब इनकी जानकारी बीतने के 10-15 दिन बाद मिलती है खैर……
इस बीच काफी कुछ अच्छा छापा आपने। ‘ग्राम गणराज्य’ बने संयुक्तांक से 31वें साल में प्रवेश किया नैनीताल समाचार ने। बधै! अंक नौ की चिट्ठी-पत्री के अंतर्गत कौस्तुभ पंत शुभकामनाओं ‘‘सबैं दिशान में गाजिया बाजिया/तड़ी में तराण हो/रया दाड़ बकाव’’ को फलीभूत करें, आमीन!
कभी-कभी मुझे चिट्ठी-पत्री में छपा मैटर आपके पूरे अखबार से ज्यादा वजनदार लगता है। यह भी आपका दम है कि छाँट-छाँट के छाप देते हैं। ऐसी दमदार चीजें और लिखने वाले की काबिलियत तो है ही! ‘ग्राम गणराज्य’ अंक में हरीश चन्द्र चंदोला ने ‘ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास योजनाओं में’ विकास योजनाओ ही पोल खोली है। गंगाधर नौटियाल ने ‘केरल और बंगाल से सबक लें’ में सही सुझाव दिया है कि अलग-अलग गाँवों की अपनी अलग किस्म की समस्यायें हैं। उनका समाधान केवल समुदाय को स्वयं फैसला करने का अधिकार देने से ही संभव है। ‘यायावर‘ के ‘सपनों का इकचुलिया गाँव’ ढूँढने की कोशिश करें। मेरी हसरत है कि पहले के तीस परिवार से एक परिवार बने गाँव में मैं अपने परिवार का भी विलय कर दूँ। क्या आप मेरी इस हसरत को पूरी करने में मदद नहीं करेंगे ? ‘सोरघाटी से गर्ब्यांग’ प्रभात उप्रेती का यात्रा वृतांत रोचक है। मन के भावों को पूरी ईमानदारी से बिना लीपापोती किये व्यक्त किया है।
धरमबीर परमार के ‘टिवंकल-टिवंकल लिटिल स्टार’ पढ़ते हुए हँसी, खुशी, गला रुँधना आंखें नम होना, निशाश लगाना, वैराग्य का अनुभव……. उन बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी है जो अवसर न मिलने के कारण समाज-दुनिया में यथेष्ट स्थान न पा सके। परमार जी को साधुवाद, धन्यवाद।
आपका ‘हमारा कॉलम’ जब भी आता है, लाजवाब आता है। निष्पक्ष स्पष्टोक्ति। ऐसे ही जनसाधारण का पक्ष उजागर करते रहें, सोये हुए शासकों को जगाते रहें।
गणेश पाठक नागपुर
‘माओवादियों का जोनल कमाण्डर…….’ शीर्षक से प्रशान्त राही के पक्ष में चिन्तन-मनन नैनीताल समाचार के अलावा और कोई नहीं कर सकता। 21 वर्ष पूर्व उमेश डोभाल प्रकरण में भी ‘नैनीताल समाचार’ ने दहशत से भरे पौड़ी के जनमानस को आत्मबल देकर संघर्ष की क्षमता जगायी थी।
प्रशान्त राही की गिरफ्तारी व माओवाद का हौवा खड़ा करने की सरकारी मंशा को उजागर करने का साहस भी नैनीताल समाचार ही कर सकता है। जल, जंगल, जमीन को सींचने, सँवारने व संरक्षण करने वाले मेहनतकश समाज की आवाज को कुचलने वाले ‘अमिताभी चिन्तन’ की तीव्र भर्त्सना की जानी चाहिये। ‘शब्द माफियाओं’ के खिलाफ ‘नैनीताल समाचार’ की सोच व साहस को मैं नमन करता हूँ।
अनिल स्वामी श्रीनगर
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