प्रस्तुति : रैमाशी रावत
जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये हमें संगठित होना पड़ेगा। यदि हम सत्ता से उम्मीद लगाकर आगे चलना चाहेंगे तो सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी। यह कहना था स्वामी अग्निवेश का। वे उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा आयोजित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला में ‘वैश्वीकरण के दौर में ‘जल, जंगल, जमीन के सवाल’ विषय पर बोल रहे थे।
29 नवंबर को पौड़ी के जिला पंचायत हॉल में वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। जिसमें विश्व शांति व सामाजिक क्रांति के अग्रदूत स्वामी अग्निवेश जी मुख्य वक्ता थे। उत्तराखंड राज्य से जो उम्मीदें की गई थीं और जो सपने देखे गये थे, उनके चूर-चूर होने से स्वामी जी काफी आहत नजर आये। परन्तु उन्होंने कहा कि इस प्रकार की दशा को देखकर हमें निराश नहीं होना है। हमें इसके खिलाफ लड़ते रहना है। जिस प्रकार वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली और उमेश डोभाल लड़े थे। सभी श्रोतागण इस बात से सहमत दिखे कि उन्हें उनके सपनों का राज्य नहीं मिला। लेकिन इसका हल सरकार दर सरकार बदलना नहीं है। सत्ता में रहकर किसी समस्या का समाधान नहीं हो पायेगा वरन् जनता के बीच रहकर आवाज बुलंद करनी होगी।
यह सब स्वामी अग्निवेश ने अपने राजनैतिक अनुभवों के आधार पर कहा। स्वामी अग्निवेश 1977-1982 में हरियाणा विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं और कुछ समय तक शिक्षा मंत्री हरियाणा सरकार का पदभार भी संभाल चुके हैं। वे राजनीति में समाज सुधार व मानवीय चेतना को जागृत करने के मकसद से कूदे थे। तब उन्होंने जाना कि समाज सेवा आमजन के साथ रहकर होगी, सत्ता में रहकर नहीं। राजनैतिक व्यवस्थाओं पर प्रहार करते हुए स्वामी जी बोले, ‘‘राजनीति में कोई पाक-साफ नहीं रह सकता। हमाम में सभी नंगे हैं।’’
टिहरी बांध बनने पर भी उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बांध बनने से गंगा का जल अब बहुत ज्यादा दूषित हो जायेगा। नवम्बर माह में जहाँ कुछ समय पहले तक खूब बारिश हुआ करती थी, चारों तरफ हरियाली हुआ करती थी, वहीं आज के पहाड़ को देखकर वे काफी दुःखी नजर आये। दलितों को कृषि भूमि दिये जाने के पक्ष में उन्होंने कहा कि एक-दो लोगों को भूमि मिलने से कुछ नहीं होगा। सभी को मिलकर अपने हक के लिये लड़ना होगा। समाज में धर्म के ठेकेदार बढ़ते जा रहे हैं। राम के नाम पर समाज को बाँटने वाले धर्म माफिया से सावधान रहना होगा। इसके लिये एक लोकमंच बनाने की आवश्यकता है, जिसमें धर्म के ठेकेदारों और माफिया को ना घुसने दिया जाय। हमें निराश होने की बजाय जाति, मजहब से उठकर समाज में रहकर ही राजशक्ति की बर्बरता का मुकबला करना है।
व्याख्यानमाला में पौड़ी आकाशवाणी के केन्द्राध्यक्ष चक्रधर काण्डपाल ने विकास के लिये लोगों से राष्ट्रधर्म निभाने और सत्ताधर्म से दूर रहने की बात कही और कहा कि राज्य बनने से हमें सिर्फ घाव ही मिले हैं, जिनमें प्रशासन कई बार नमक छिड़क देता है। अधिवक्ता के.पी.काला ने कहा दलितों को कृषि योग्य भूमि देने तथा वन कानून बनाते समय स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखना चाहिये तथा उनसे सलाह भी लेनी चाहिये।
उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट की सचिव मीरा रावत ने ट्रस्ट द्वारा संचालित गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ट्रस्ट इससे पहले तीन व्याख्यानमालाओं का आयोजन कर चुका है। उन्होंने स्वामी अग्निवेश को ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित पुस्तकें भी भेंट की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी वीरेन्द्र कश्यपजी ने की। कार्यक्रम में विमल नेगी, ओंकार बहुगुणा, के.पी. काला, ललित मोहन कोठियाल, सत्यनारायण रतूड़ी आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन वीरेन्द्र खंखरियाल ने किया।
























आपकी टिप्पणीयाँ