महेश पुनेठा का नया संग्रह ’भय अतल में’ की कविताएँ अंदर तक छूती हैं। न सर के ऊपर जाती हैं न कोफ्त पैदा करती है। हर कविता में अपनापन और घरेलूपन दिखता है और अन्य कवितायें पढ़ने के लिए विवश करता है। यह विवशता सार्थक होती है। इसमें मजा ही नहीं आता यह अंदर भी खुदबुदाता है। भय अतल में, गमक, सिंटौला, घसियारिनें, अकाल मृत्यु एक शिल्पी की, लच्छू ड्राइवर, श्रम का तिरस्कार, चिड़िया से बतियाती औरत और घर से भागी लड़की आदि कवितायें अपने-अपने ढंग से प्रभावित करती हैं। सारा संग्रह पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी है। तकनीकी दृष्टि से तो इसका विश्लेषण विज्ञ ही कर पायेंगे पर अपने भाव कथ्य संसार में यह एक विशेष स्थान बनाती है।
भय अतल में (कविता संग्रह)
कवि: महेश पुनेठा
प्रकाशक: आलोक प्रकाशन, 99 ए, 150, लूकरंगज, इलाहाबाद
मूल्य: 125
























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