मदनमोहन डुकलाण ने ‘चिट्ठी‘ के माध्यम से गढ़वाली साहित्य के दो महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किये हैं। कविता विशेषांक में गढ़वाली भाषा के कई नामी स्थापित कवियों के अलावा अनेक उदीयमान कवियों की रचनायें संग्रहीत की गई हैं। इसी प्रकार लोककथा विशेषांक के नाम से एक अन्य पुस्तिका में गढ़वाली लोककथाओं को संकलित किया गया है। ये दोनों प्रकाशन निश्चित ही पठनीय एवं संग्रहणीय हैं।
‘चिट्ठी‘-1. कविता विशेषांक 2. लोककथा विशेषांक / सम्पादक: मदनमोहन डुकलाण, समन्वयक: भीष्म कुकरेती / सम्पर्कः ए-16, रक्षापुरम (लाडपुर), पोस्ट रायपुर, देहरादून-248008, टेलिफोन 278748 / सदस्यता: सालाना रु. 100., आजीवन रु.1000
‘अजूबे‘ एक रोचक बाल कहानी है। एक किसान को एक कद्दू के अन्दर से 13 छोटे-छोटे बौने मिलते हैं, जो अलादीन के चिराग की तरह अपने मालिक की हर तरह से सेवा करने को तत्पर रहते हैं। दैवयोग से एक बार ये बौने भटक जाते हैं तो उनको एक साथ ला पाना कठिन हो जाता है। कहानी सरल भाषा में है। उत्सुकता बनी रहती है। फजरुद्दीन का चित्रांकन सुन्दर है। आशा है कि यह टी.वी. से चिपके रहने वाले बच्चों के लिये एक ताजी हवा का झोंका सिद्ध होगी। -भारती जोशी
अजूबे (बाल कहानी) / लेखक: लक्ष्मी खन्ना ‘सुमन’ / प्रकाशक: नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली / पृष्ठ: 134 / मूल्य: 30 रु.