ग्राम उत्तरौड़ा (पो. कपकोट) के बीचोंबीच राजमार्ग का निर्माण न होकर पहाड़ की तलहटी (जहाँ पी.डब्ल्यू.डी. की पुरानी पैदल सड़क थी) से ही निर्माण किये जाने सम्बन्धित प्रार्थनायें बार-बार शासन, प्रशासन एवं सरकार से कर चुके हैं। सच्चाई इस बात की है कि बीच से राजमार्ग के जबरन निर्माण से अधोलिखित नुकसान, बरबादी एवं विनाश लीला ही होगी। यथा:
1. पेयजल वॉटर स्टेंड 10 बर्बाद होंगे।
2. विद्युत पोल करीब 10 तक ध्वस्त/हटाने होंगे।
3. प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूल के गेट्स एवं सीमायें तोड़ दी जायेंगी।
4. पोस्ट ऑफिस भवन तथा पंचायत घर का भवन भी चपेट में आयेगा।
5. फुटपाथ के बगल में पेयजल व नहर का ध्वस्त होना अवश्यम्भावी होगा।
6. भूमिहीन अनुसूचित जाति के आठ भवनों पर तोड़फोड़ से वे भवनहीन हो जायेंगे।
7. सिंचित ग्राम में फल-फूल, तरकारी व अनाज के खेतों में धूल ही धूल दिखायी देगी।
8. ऐसे आठ मकान मालिक जिनके मकानों की जिम्मेदारी मातृशक्ति पर है वे विधवायें भी बुल्डोजर की चपेट में आयेंगी।
9. 4-5 तक गौशालाओं का ध्वस्तीकरण होगा।
अस्तु मान्यवर से प्रार्थना है कि हमारे ग्राम उत्तरौड़ा जिसे आदर्श एवं निर्मल ग्राम (दो बार पुरस्कृत) की मर्यादा, संस्कृति, श्री वृद्धि पर आँच न आने और सड़क निर्माण पहाड़ की तलहटी से ही किया जाये। पुनश्च: यदि उक्त बिन्दुओं में कही असत्यता हो तो स्वयं सक्षम अधिकारियों का शिष्टमंडल पहुँचकर स्थल निरीक्षण करने की महती कृपा की जाये। यही सर्वहित, जनहित तथा लोगों के पलायन से बचाया जा सकता है। इस संबंध में यदि मेरे द्वारा लिखित पत्र में कहीं कोई असत्य हो तो मैंने स्वयं जिलाधिकारी महोदय को भी सत्यता की कसौटी पर उतरने हेतु लिख दिया है।
पीताम्बर पाण्डेय ग्राम व पो. उत्तरौड़ा, कपकोट
























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