पुराने पत्तों को
सिर्फ इतना करना चाहिये
पतझड़ में/गिर जाना चाहिये।
बिछ जाना चाहिये
खाद बन/देनी चाहिये
नये वक्त की शुभकामनाऐँ
नये पत्तों के लिये,
पुराने पत्तों को
सिर्फ इतना करना चाहिये।
- दिनेश उपाध्याय
करने के लिए
करने को अभी बहुत कुछ बचा है
होने के लिए भी
पक्षी को घोंसले में रखना है कुछ तिनके
वृक्षों को देना है कई उपहार हवा के लिए
सूरज को आराम के अलावा सब कुछ करना है
चन्द्रमा को बने रहना है
अंधकार के बीच की सबसे सुन्दर और दीप्ति चीज
धरती को अपनी परिक्रमा के दौरान देखना है
उसके त्याग और मेहनत के बदले में
कोई देना तो नहीं चाहता कोई कीमत
समुद्र को करना है कुछ उपाय
कि नदियों का उसके घर में भी रहे वजूद
एक एक करके सबके भीतर बैठाना है उम्मीद को
खुशियों को सबके लिए
हर वक्त होना है सुलभ
अच्छी चीजों को बढ़ाना है अपनी बिरादरी
हर आवाज को बनाना है सुरीली
दिनों दिन बढ़ाना है मुझे अपनापा
संसार की आँखों से
जो चमक रही है हर एक शब्द में।
-बृज श्रीवास्तव (साभार: पुनर्नवा-2010)
सौ में सत्तर आदमी फिलहाल जब नाशाद हैं,
दिल पे रखकर हाथ कहिये देश क्या आजाद है ?
कोठियों से मुल्क की मय्यार को मत आंकिये,
असली हिन्दुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है ?
जिस शहर में मुंतजिम अन्धे हों जल्वागाह के,
उस शहर में रोशनी की बात बेबुनियाद है ?
अब नई पीढ़ी पे मबनी है वही जजमेंट दे,
फलसफा गांधी का मौजू है कि नव जनवाद है ?
- अदम गोंडवी
रामनाथ सिंह ‘अदम गोंडवी
निवासी: ग्राम आटा, परसपुर, गोंडा, उ.प्र.
(22 अक्टूबर 1947 – 18 दिसम्बर 2011)
नैनीताल समाचार परिवार की श्रद्धांजलि!