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ताजा अंक : 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010

बर्बाद हो रही खेतीबर्बाद हो रही खेती

लेखक : कैलाश कोरंगा

विश्वयुद्ध से कितना बदल गया गढ़वालविश्वयुद्ध से कितना बदल गया गढ़वाल

लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला

पौड़ी: आठवीं अनुसूची में शामिल होने के लिये सक्षम हैं कुमाँऊनी, गढ़वाली भाषा

लेखक : नैनीताल समाचार

पुराने अंक

  • वर्ष: 33, अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010 [ - ]
    • विश्वयुद्ध से कितना बदल गया गढ़वाल
    • पौड़ी: आठवीं अनुसूची में शामिल होने के लिये सक्षम हैं कुमाँऊनी, गढ़वाली भाषा
    • बर्बाद हो रही खेती
  • वर्ष: 33, अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010 [ - ]
    • हरेले के तिनड़े के साथ बधाई
    • पानी के दिन
    • सम्पादकीय:पीछे छूट गये हरेला और काले कौआ….!!
    • हरेले की वैज्ञानिकता ढूंढने का प्रयास
    • पूरन चन्द्र चन्दोला का गिरजा हर्बल फार्म
    • खेती-बाड़ी से जुड़ा है हरेला त्यौहार
    • हेम पाण्डे: सच के लिए मरने का उसे अफसोस नहीं हुआ होगा
    • एक प्रखर व प्रतिभाशाली पत्रकार के जीवन की अतिंम यात्रा
    • जल विद्युत परियोजनाओं से त्रस्त किसान
    • उत्तराखंड के लिये जरूरी है चकबन्दी
    • भारी बजट के बावजूद प्यासे हैं गाँव
    • लैंसडाउन ने बाबा नागार्जुन को याद किया
    • बस दुर्घटना ने खोली आपदा प्रबंधन की कलई
    • दुआ करें कि नियम-कानूनों की अवहेलना के बावजूद बच जाये नैनीताल
    • उत्तराखंड पुलिस दबा रही है ‘ऑनर किलिंग’ का मामला
    • श्रीनगर के लिये अभिशाप बन कर आई है जल विद्युत परियोजना
    • अपना राज है....सब चलेगा !
    • याद रहेंगे पत्तीदास
    • जयदीप लघु उद्योग
    • अपनी माटी से ताउम्र जुड़े रहे उमेशदा
    • स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ा रहा भीमताल का हरेला मेला
    • मुम्बई का हिल स्टेशन ‘माथेरान’ और नैनीताल
    • नन्दाखाट चोटी फतह कर लौटे पर्वतारोहियों की चिन्ता वाजिब है
  • वर्ष: 33, अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010 [ - ]
    • ‘मूर्तता-अमूर्तता के द्वन्द्व से हर कलाकार गुजरता है’
    • रहस्य व रोमांच से भरी है थुलिंगमठ से कैलास मानसरोवर व्यापार यात्रा
    • मसूरी: सार्थक रही राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी
    • कंचन की मानिन्द निखर कर आये प्रकाश पंत
    • बच्चों का खेल नहीं बाल मजदूरी खत्म करना
    • पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन हो
    • गौरा देवी विकास मेला सम्पन्न
    • पेट्रोल पंप न सही हुजूर, हैंडपंप ही दिलवा दो !
    • खबरें जो अनछपी रह गईं
    • ‘चिपको’ की याद ताजा हुई
    • जल्दबाजी से होता है ट्रेफिक जाम
    • सल्ट (अल्मोड़ा): पुलिस के पहरे में बँट रहा है पानी
    • मनरेगा लौटायेगा खेतों की हरियाली ?
    • मनुष्य के पक्ष में खड़ा होना ही जनपक्षधरता है
    • आशल-कुशल : 1 जुलाई से 14 जुलाई 2010
    • बाबा हम तुम्हें बहुत याद करते हैं
    • यह शिक्षा व्यवस्था तो होनहारों का जीवन लीलने लगी
    • दुदबोलि- 2008: एक महत्वपूर्ण संकलन
    • चिट्ठी-पत्री : जनता जागरूक बने और सक्रिय सहभागिता निभाये
    • किताबों के बारे में: डूबती टिहरी के समय का दस्तावेज हैं त्रेपन की कहानियाँ
    • सच्ची... मैंने इस बार कुच्छ नहीं कहा...
    • ईको टूरिज्म का मतलब व्यापार नहीं होता
    • क्यों बेपरवाह है सरकार साहित्य और संस्कृति के विकास को लेकर ?
  • वर्ष: 33, अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010 [ - ]
    • खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन - 2
    • अरे, ‘देश-सेवा’ के इनके जुनून को थामो !
    • पर्यावरण का तर्पण
    • महिलाएं एवं मीडिया विषय पर एक सार्थक गोष्ठी
    • निशंक सरकार गैरसैंण में बनायेगी सचिवालय ?
    • मेरा जीवन तेरे लिये, जीवन की खुशियाँ तेरे लिये
    • अद्भुत है बिशनदा के संघर्ष की दास्ताँ
    • शासनादेश की अनदेखी कर तस्करों के हवाले कीड़ाजड़ी
    • कॉर्बेट पार्क विस्थापितों को नहीं मिल रहा वाजिब हक
    • गौंड धूर फिर जागा ?
    • विकास कार्यों में आ रही अड़चनें तो दूर करनी ही होंगी
    • क्या हमारे रणनीतिकार बिहार से सबक लेंगे ?
    • पर्वतीय कृषि: भूमि की उत्पादकता का कैसे हो अधिक सदुपयोग
    • जलते वनों के प्रति उपेक्षा और हमारा भविष्य
    • स्वस्ती – श्री : सड़क निर्माण पहाड़ की तलहटी से ही किया जाये।
    • सम्पादकीय : ‘फर्स्ट एमंग ईक्वल्स’ निशंक का उपलब्धि विहीन पहला साल
    • खैरलिंग मेला: पशुबलि से खलबली
    • बदरीनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का उबाल
    • बेमतलब का बोझ बनकर रह गये हैं ये जाँच आयोग
  • वर्ष: 33, अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010 [ - ]
    • पहाड़ की खेती बचाने को चिंतन
    • खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन - 1
    • बाल लेखन कार्यशाला: समझ विकसित कर रची कहानियाँ
    • कुमाऊँ का लोक नृत्य: छोलिया
    • जंगल बचाओ, पानी बचाओ
    • साझा मंच से हल होंगी समस्याएं
    • पुरातत्व का खजाना है काली कुमाऊँ
    • बाँध ने देवता भी विस्थापित किये
    • होटल गाइड़ों से सीखें !
    • योग गुरू बाबा रामदेव रोडवेज की बस में!
    • 18 साल तक खुले आम रहा आतंकी
    • सूदखोरों के खिलाफ एक अभियान
    • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का भविष्य अधर में
    • सम्पादकीय: पहाड़ को पहाड़ जैसा ही बना रहना चाहिये
    • चिट्ठ्ठी – पत्री : कहीं कुछ टूट गया है
    • निर्मल पाण्डे की स्मृति में: ‘अंधा युग’ जारी है ...
    • संघर्ष वाहिनी का चिंतन शिविर
    • सरकार कुछ भी कहे, हकीकत और भविष्य कचरे में है !
    • विधायक निधि से खरीदे गये भांडे बर्तन
    • रवाँई से उत्तराखण्ड: एक रोचक यात्रा वृतान्त
    • पहाड़ का कूड़ा गंगा में
    • कितनी निरापद होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा
    • शिक्षा का बाजारीकरण
    • आशल-कुशल : 1 जून से 14 जून 2010
  • वर्ष: 33, अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010 [ - ]
    • मोहन जोशी हाजिर हो !
    • पहाड़ को समझने की एक कारगर कोशिश
    • कोई ग्रामीणों को विकास की परिभाषा तो समझाये
    • चन्द्रकला तिवारी की रिहाई
    • कुप्रबन्धन का मॉडल बन रहा है उत्तराखंड
    • टिहरी के पुरोधा थे सत्यप्रसाद रतूड़ी
    • विवादों में घिरा इंटर कॉलेज कार्कीनगर
    • पलायन से सूनी हुई बुजुर्गों की चौपाल
    • खाद्यान्न घोटाले में एफआईआर
    • आशल-कुशल : 15 मई से 31 मई 2010
    • वन संरक्षण की नीतियों में जनहित को नहीं दी जाती तरजीह
    • जैविक खेती पर महत्वपूर्ण पुस्तकें
    • आग नहीं बुझाता वन विभाग?
    • चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक जी आग लगना कुदरती घटना नहीं है
    • सम्पादकीय: अब ऐसी ही है राजनीति
    • राजाजी राष्ट्रीय पार्क: विदेशियों के आगे क्यों लाचार थी सरकार
    • मुख्यमंत्री यहाँ की समस्या पर नहीं बोले
    • युद्धं देहि........उन्होंने कहा था
  • वर्ष: 33, अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2010 [ - ]
    • वों कि बोर्यों माँ सब्जी हमारी बोरी मा रेतु छा
    • ऐसे बनती हैं नावें नैनीताल की !
    • क्या इस आधे-अधूरे सोच से उत्तराखंड का विकास सम्भव है ?
    • पुल के टैक्स के नाम पर की जा रही है लूट
    • कौन चिन्तित है सोर घाटी को लेकर
    • दैनिक अखबारों के क्षेत्रीय संस्करणों को मुद्दे दिखाई ही नहीं देते
    • पलायन तो होगा ही !पलायन तो होगा ही !
    • चम्पावत में बिजली गुल होने की दास्तान
    • अक्ल पर पड़े ताले
    • सब सूचनायें एक साथ उपलब्ध होंगी ‘हिसालू डॉट कॉम’ से
    • आखिरी साँसें गिन रही है गांधी पुलिस
    • कमबख्त यों ही चला गया
    • सम्पादकीय: आई.पी.एल. यानि पैसे का खेल
    • चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक नैनीताल समाचार के नाम खुला खत
    • पाटी: प्रशासन की बेवफाई से सदमे में हैं शराब के खिलाफ लड़ती महिलायें
    • क्या अब जोशीमठ बच जायेगा ?
    • फिर बोतल से बाहर आया कंडी रोड का जिन्न
  • वर्ष: 33, अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010 [ - ]
    • होली के हुड़दंग से हिमालय की शांत वादियों में - 2
    • खंडहर में चल रहा इंटर कॉलेज
    • लोक सूचना अधिकारी को अर्थदंड
    • आशल-कुशल : 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010
    • क्या कर रहा है सौर ऊर्जा विभाग ?
    • ‘लोक’ का अद्भुद खजाना
    • अभ्यारण्य आग नहीं बचाते
    • इस तरह भटकती है पत्रकारिता !
    • चिंता का सबब है घटता भूजल
    • क्या हो पायेगी निष्पक्ष जाँच शेरवुड प्रकरण की
    • दावानल के आगे बेबस प्रशासन
    • कपकोट: किसने हजम किया राशन ?
    • अल्मोड़ा...लाजवाब !
    • पुरुषों के कुकृत्य में महिला भागीदारी से उठते सवाल
    • चिट्ठ्ठी – पत्री : दक्षिण एशिया ही है, जिसे पुरुषों ने अपना मूत्रालय बना रखा है
    • सम्पादकीय : क्या ऐसे बचेंगे जंगल!!
    • प्रमोद जोशी: मुख्य धारा का तैराक
    • पौड़ी: करोड़ों बहाकर भी न बुझी प्यास
    • आइये ठंडे दिमाग से इस हिंसा का जवाब ढूँढें
  • वर्ष: 33, अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2010 [ - ]
    • होली के हुड़दंग से हिमालय की शांत वादियों में
    • गुजरात में देश भर की भाषाओं का संगम
    • इस बार ज्यादा भागीदारी भरा रहा उमेश डोभाल समारोह
    • आपदा राहत कोष की बंदरबाँट
    • ब्रिटिश गुलामी का यादगार: राष्ट्रमंडल खेल
    • श्मशानवाणी का यह खड़खड़ी केन्द्र है.......
    • महिला अदालत: न वकील न जज, न्याय फटाफट
    • वनाधिकार कानून लागू करवाने के लिए जरुरत है एकजुट संघर्ष की
    • केदार सिंह कुंजवाल: एक कर्मयोगी को समझने की कोशिश
    • स्वस्ती – श्री : नरेगा किसके लिये??
    • चिट्ठ्ठी – पत्री : पूरे पहाड़ के कण-कण से परिचय
    • सम्पादकीय : आर्थिक पैकेज, सब मौसेरे भाई
    • इस तरह बीस साल बाद पौड़ी कहाँ होगा ?
    • नाक के नीचे से पेड़ गायब
    • वे नहीं चाहते तराई में साम्प्रदायिक सद्भाव
  • वर्ष: 33, अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010 [ - ]
    • क्यों नहीं बनी जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीति
    • क्या महिलाओं को पूर्ण अधिकार दिला पाएगा ‘महिला आरक्षण विल’ ?
    • आशल – कुशल 15 मार्च से 31 मार्च 2010
    • आबकारी विभाग गंगोलीहाट में क्यों बिकवाना चाहता है शराब ?
    • उमेश डोभाल की याद में
    • कब शामिल होंगी गढ़वाली-कुमाउनी भाषा आठवीं अनुसूची में
    • बच्चों की लेखन कार्यशाला’ का आयोजन
    • एक सांस्कृतिक कैसेट
    • चिट्ठी पत्री : शम्भू जी की वल्गर तरंग
    • सम्पादकीय : विधानसभा में अराजकता
    • पंचेश्वर बाँध: झेलनी ही होगी एक और बड़े विस्थापन की त्रासदी
    • तय है अल्मोड़ा नगरपालिका का दिवाला निकलना
    • राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना के नाम पर किया जा रहा है ग्रामीणों का उपहास
  • वर्ष: 33, अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010 [ - ]
    • भष्टाचार की भेंट चढी़ विष्णगाड़ जल विद्युत परियोजना
    • कटाल्डी खनन प्रकरण: खनन माफियाओं के साथ न्यायपालिका से भी संघर्ष
    • नैनीताल को बचाने के लिये जबर्दस्त संकल्प की जरूरत है
    • निर्मल पांडे: कहाँ से आया कहाँ गया वो
    • नियम विरुद्ध करवाए गए सरमोली-जैंती वन पंचायत चुनाव
    • उत्तराखंड में माओवाद या माओवाद का भूत ? !!
    • नदियों को सुरंगों में डालकर उत्तराखण्ड को सूखा प्रदेश बनाने की तैयारी
    • अपने मजे का मजा ठैरा दाज्यू
    • दुःखद है ऐसे प्रकृतिप्रेमियों का जाना
    • शराब माफिया व प्रशासन के खिलाफ उग्र आन्दोलन की तैयारी
    • स्पष्ट दिशा के अभाव में बद्तर होते राज्य के हालात
    • क्यों बढ़ रहा है मनुष्य व जंगली जानवरों के बीच संघर्ष ?
    • ‘‘तब के आई.सी.एस. साइकिल पर जाते थे या फिर इक्के पर’’
    • ‘कैंपेन फार ज्यूडिशियल एकांउटेबिलिटी एण्ड रिफार्म्स’ का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन
    • नहीं भुलाया जा सकता चन्द्रसिंह शाही का योगदान
  • वर्ष: 33, अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010 [ - ]
    • छटा अद्भुत बन आई, शंभू ने आज होली मचाई
    • संघर्षों की जले मशाल
    • वाह फागुन की हवायें...... होली है !
    • पकौड़ी की कौन सोचे ?
    • भज भक्तन के हितकारी, सिरी कृष्ण मुरारी
    • यो वसन्त हो कैका घर जाये ?
    • सौल कठौल: सतरंगी छलड़ी कैका घर
    • बगरो बसंत है : घायल वसन्त और होली
    • संपादकीय: कैसे बने समाज ज्यादा सहनशील?
    • इस तरह मनाई जाती है नंधौर घाटी में होली
    • काहे से खेलूँ सजनी होली ?
    • होली का सामाजिक पक्ष
    • पद्यात्मक होली
  • वर्ष: 33, अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010 [ - ]
    • संघर्षों की जले मशाल
    • पृथ्वी हारी, मल्टीनेशनल जीते
    • पौड़ी की दु:खती रग है - इसकी उपेक्षा
    • बिनसर वन्य जीव विहार: जंगली जानवरों से त्रस्त जनता का क्रंदन
    • बागेश्वर में लगातार हो रही हत्याओं पर उबली जनता
    • बिजली परियोजना में धांधली के विरोध में मुनस्यारी में न्याय रैली
    • जोशीमठ: सुरंग निर्माण में फूटे स्रोत से खतरे में जनजीवन
    • आस्था छोड़ मौजमस्ती का हुआ उत्तरैणी मेला
    • किसानों के हक की बात नहीं कहती नई कृषि नीति
    • जन आन्दोलनों पर माओवाद का ठप्पा लगाने का प्रयास
    • चिट्ठी-पत्री : निष्पक्ष पत्रकारिता का पर्याय नैनीताल समाचार
    • महात्मा, माओवाद और मोदी
    • चलो, पता तो करें, हम कहाँ जा रहे हैं
    • हम इस गणतंत्र के काबिल नहीं
  • वर्ष: 33, अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010 [ - ]
    • कमांडेट नवानी को याद किया
    • अल्मोड़ा के बच्चे चिन्तित हैं शहर के हालातों से...
    • कछुआ चाल से चल रही है नरेगा
    • मनोज पाल की याद
    • अब पंतनगर विश्वविद्यालय की शामत
    • डोल का बंगला तो नमूना है पहाड़ में अफसरों की ऐयाशियों का
    • जयदत्त वैला: वे ताउम्र गांधीवादी मूल्यों से जुड़े रहे
    • सरकारी वकीलों की लापरवाही से रेता-बजरी का संकट
    • अब शिक्षक चल पड़े हैं शिक्षा की मशाल जलाने
    • कैसे-कैसे मील के पत्थर....
    • लूटो-खसोटो, उत्तराखंड है ही इसलिये
    • वह उत्तरायणी अब कहाँ... ?
    • आशल-कुशल : 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010
  • वर्ष: 33, अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010 [ - ]
    • पहली बरसी पर सखा सत्यम को श्रद्धांजलि
    • दगड्या, दगडू नि रैणो सदानी
    • उनके साथ रह कर मैंने धैर्य और सहिष्णुता का मतलब जाना
    • छ्वी बथ
    • थोड़े शब्दों में बड़ी बात कहने का हुनर ...
    • हिन्दुस्तान के मीडिया की इनसाईड स्टोरी
    • अलविदा! राजू भाई, अलविदा!
    • आतंक के बीच वह साहस तो अद्भुत था.... ‘
    • किताबों के बारे में
    • साल का एहतेराम
    • वर्ष 2009 ? ......मगर उम्मीद पर तो दुनिया जीती है !
    • विकास कार्यों के बदले मेले-उत्सवों से बहलाने की कोशिश
    • राजेन्द्र रावत ‘राजू’
    • समाज को जीवन्त बनाने के लिये वे धीमी लौ जलाते रहे
    • पापा पास होते तो डिक्शनरी की जरूरत नहीं पड़ती थी
    • शिक्षा के लिये पलायन कर रहे हैं लोग
    • नदी अभियान की समीक्षा
    • शरदोत्सव समिति की उपेक्षा के बावजूद रंगकर्मियों ने क्षमता दिखलाई
    • हम तुम्हें हमेशा याद रखेंगे राजू!
    • आशल-कुशल – 1 जनवरी से 14 जनवरी 2010
    • अब पंचेश्वर को लेकर सरगर्मी
    • नये वर्ष की शुभकामनाओं सहित नया अंक
  • वर्ष: 33, अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009 [ - ]
    • .....मौत तो एक दिन आनी ही है !
    • ‘‘वन्य जीवों के व्यवहार के बारे में तो पढ़ाया जाना चाहिये’’
    • ब्रजेन्द्र लाल साह के रचना संसार का परिचय
    • स्वस्ती श्री: बाजार से दवाई खरीदना हर किसी के बस की बात तो नहीं
    • चिट्ठी पत्री : पूर्व निर्धारित मानसिकता के आधार पर सिर्फ खुन्दक न निकालें !!
    • वाह हल्द्वानी !....... जमीन भी हिन्दू और मुसलमान होने लगी अब ?
    • सड़क न होने से बूढ़ाकेदार से कट रहे हैं तीर्थ यात्री
    • सत्ता से बाहर यानी जनता से प्रेम
    • चमोली जिले में एक राजमार्ग ही गायब हुआ !
    • ताउम्र आन्दोलनों की नींव के पत्थर बने रहे राजा बाबू
    • वैंकी को नोबेल पुरस्कार तो मिल गया, मगर....
    • पहाड़ पर साफ दिखाई दे रहा है जलवायु का बदलना
    • आरक्षण से वंचित अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लोग
    • छायाकार बृजमोहन जोशी को प्लैटिनम ग्रेडिंग
    • वे हमें साधनों का सदुपयोग सिखा गये
    • एक कर्मनिष्ठ और अनुशासित विद्वान थे प्रो. अग्रवाल
    • अस्पताल सिर्फ रेफर करने के लिये है
    • ‘बाल प्रहरी’ ने किया आयोजन
    • आशल-कुशल : 15 से 31 दिसंबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2009 [ - ]
    • इलीनोर ओस्ट्राम के साथ हिमालय की पारम्परिक व्यवस्थायें सम्मानित हुईं
    • निशंक से कितने सशंक हैं पिथौरागढ़ के लोग ?
    • वीरान पड़ा है प्रदेश का पहला ईको पर्यटन केन्द्र
    • खेती किसानी की लूट का असली चेहरा
    • भूल सुधार: क्या पहाड़ के सिपाही के जीवन का मूल्य कम होता है ?
    • नैनीताल समाचार के वे अभिभावक थे
    • पहाड़ की चिन्ता उन्हें महानगर से वापस खींच लाई !
    • उल्टा पड़ गया हे.न.बहुगुणा विश्वविद्यालय को केन्द्रीय बनाने का दाँव
    • तेरहवीं पुण्यतिथि पर गोपाल बाबू गोस्वामी की याद
    • भविष्य के लिये आशा जगाती रचनाकारत्रयी
    • किताबों के बारे में
    • ये तमाम गैर सरकारी संस्थायें कर क्या रही हैं ?
    • कितना कारगर होगा यह बीमा ?
    • वाह हल्द्वानी ! .... जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काट रहे हैं लोग
    • आशल-कुशल - 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009 [ - ]
    • नौ साल बीते, नहीं मिली राजधानी
    • बहुत सी नजरें टिकी हैं चंडाक की खूबसूरत जमीन पर
    • गैरसैंण में एक बार फिर गूँजे नारे
    • हेम चन्द्र शर्मा बहुत दुःखी हैं....
    • 2010 ‘नदियों को मुक्त करो वर्ष’ होगा
    • कम्पोजिंग के जादूगर थे आनन्द मास्साब
    • आशल-कुशल 15 नवम्बर से 30 नवम्बर 2009
    • कर्मठ और व्यवहारकुशल सामाजिक कार्यकर्ता हैं पूरन सिंह रावत
    • ठेकेदार राजनेताओं और एन.जी.ओ. ने मिल कर छीन लिया सारा प्रतिरोध
    • वन अधिनियम की जटिलताओं को समझे बगैर संभव नहीं विकास कर पाना
    • हिन्दी पत्रकारिता के शलाका पुरुष को नमन !
    • नैनीताल में पहली बार एक फिल्म समारोह सम्पन्न हुआ
    • मसूरी में वृद्धजनों की पहल
    • क्या गिद्ध अब लौटेंगे ?
    • सिर्फ जुआरियों का जमघट नहीं है लधौनधूरा का मेला
    • नया अंक 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009 [ - ]
    • तो चलिये, सतोपंथ एक्सप्रेस को हिमालय तक पहुँचायें
    • मुहब्बत के गुनहगारो ! कुछ तो शर्म करो
    • चम्पावत और अल्मोड़ा में ‘पहाड़’
    • बच्चे कितना कुछ जानते हैं
    • आशल-कुशल : 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009
    • विषमता के पर्वत
    • एक औरत
    • सीमान्त क्षेत्र में एक संवेदनशील फौजी मददगार
    • ‘सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति’
    • चिठ्ठी पत्री: बाकी ईश्वर मालिक है इस देश का
    • जनता की सहभागिता से चले पर्यटन
    • यह किस अंधेरी गुफा में जा रही है उत्तराखंड की राजनीति ?
    • उन्होंने कहा उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिये, उन्हें मिली जेल
    • नया अंक : 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009 [ - ]
    • बद्रीनाथ: मास्टर प्लान के जरिये होगी तीर्थ नगरी सुव्यवस्थित
    • चर्च की भूमि बिल्डर को देने की तैयारी
    • चिठ्ठी पत्री : शिक्षा व्यक्तित्व के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है
    • जयन्ती के अवसर पर तलाश, महात्मा गांधी की
    • अस्पताल छूटा पर मरीज नहीं छूटे रहमान जी के
    • जन्म शताब्दि पर लौह पुरुष पंडित देवराम नौटियाल को श्रद्धांजलि!
    • लोहाघाट: बदहाल और लापरवाह आपदा तंत्र
    • अलविदा: महावीर प्रसाद गैरोला
    • ये कैसी श्रद्धांजलि!
    • दोषी है चयन प्रक्रिया व स्थानान्तरण नीति
    • यह कैसा गांव भूमि हस्तांतरण
    • आशल-कुशल - 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009
    • एक और एनकाउंटर: सोये रंगकर्मियों को जगाने की कोशिश
    • कला का उद्देश्य उत्कृष्ट सृजन व बेहतर समाज का निर्माण है
    • जन्मदिन पर याद किया धर्म सिंह रावत को
    • अपनों ने ही भुला दिया देवी दत्त शर्मा को
    • पर्यटन प्रदेश में तीर्थयात्रियों की लूट-खसोट
    • शिक्षा का राजनीतिकरण बंद हो
    • कब पूरा होगा रेल का सपना - भाग 1
    • नया अंक : 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009 [ - ]
    • चीनी घुसपैठ को लेकर सनसनी फैला रहा है मीडिया
    • तन से कीमती है घास का तिनका
    • चिठ्ठी पत्री : बीच की सीट पर मुझे बैठने देगा तो आधा संतरा दूँगा।
    • यह एक नये किस्म का पलायन है
    • सम्पादकाचार्य की याद में शोध ग्रन्थ
    • राजनीतिक गुंडों से भयभीत है दुर्बलों को पीटने वाली मित्र पुलिस
    • ट्रेल पास अभियान: संकल्प के सामने बौनी हुई विकलांगता
    • एक लीसा फैक्ट्री भी नहीं चल पा रही गढ़वाल मंडल विकास निगम से
    • आशल-कुशल 01 से 15 अक्टूबर
    • स्वच्छता दिवस 2009: बहुत कठिन है मानसिकता बदलना
    • स्वाइन फ्लू तो वैश्वीकरण का उपहार है
    • सरकारी आदेशों के बावजूद रुक नहीं पा रहा विद्युत परियोजनाओं का काम
    • बिल्डर के खिलाफ जंग
    • कस्तूरी मृगों का अस्तित्व खतरे में
    • नया अंक : 01 से 14 अक्टूबर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009 [ - ]
    • सौ दिन में जाँच नहीं हो सकती है इस सरकार की
    • तराई में खूनी जंग के आसार
    • कुम्भ मेला आ रहा है, गंगा साफ सुथरी तो रहे
    • चिठ्ठी पत्री: मैन ‘निशंक’ कै ‘त्रिशंक’ पढ़ौ
    • किताबों के बारे में: वह अविस्मरणीय देश
    • गैरसैंण को लेकर सरगर्मी तेज
    • अब प्रवास में भी बनी एक पार्टी
    • इन बिल्डरों पर किसी का बस नहीं
    • कुमौड़ की हिलजात्रा
    • श्रावण मास में भी पशुबलि होती है नन्दा ठोंगी मन्दिर में
    • आठ साल से मुआवजे की राह देख रहे हैं आपदा पीड़ित
    • इस बार उद्वेलित रही केदार घाटी
    • आशल-कुशल - अगस्त-सितंबर 2009
    • ‘मेरे चित्रों में अनुशासन नहीं, कबीर जैसी अराजकता है’
    • उन्होंने सीमान्त में शिक्षा की ज्योति जलाई
    • मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी
    • उद्योग के नाम पर भवन कब्जाया
    • ‘पीन’ अप गर्ल उर्फ उत्तराखंड की नायिका कथा
    • कहाँ गईं चिड़ियायें ?
    • अब वैसा नहीं रहा है गंगा का मायका
    • श्रीनगर परियोजना तो मनमानी से चल रही है
    • नया अंक : 15 से 30 सितम्बर 2009
  • वर्ष: 33, अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009 [ - ]
    • बत्तीस वर्ष पूरे, शिक्षा अंक और समाचार की वैब साइट
    • शिक्षक! मेरे बच्चे को लूट की तरकीब मत बताना
    • किस रास्ते पर चल रही है हमारी शिक्षा ?
    • चिट्ठी पत्री: बुढ़ाती ऊर्जावान पीढी और ना गछाया हुआ हरेला
    • पुलिस की बर्बरता और अक्षमता का नतीजा है कालाढूँगी कांड
    • स्मृति से मिट नहीं पायेंगे ला, पनेलिया और झेकला के दृश्य
    • वे उत्तराखंड में मिलना चाहते हैं
    • जनता की सक्रियता रंग ला रही है
    • क्या ऐसे दुग्ध क्रांति होगी ?
    • आशल कुशल अगस्त-सितंबर 2009
    • दमन का दुष्चक्र और मणिपुर की मौन त्रासदी
    • बागेश्वरवालो: बहुत बढ़िया मौका चूक गये रे तुम !
    • ए गमे दिल क्या करूँ
    • रियासत मुक्ति आन्दोलन से राज्य आन्दोलन तक का सफर
    • अलविदा गौतम दा !
    • स्वच्छता को लेकर जन-जागरूकता पैदा कर रहा है ‘मैत्री’ संगठन
    • दीप जोशी को समझने के लिये विकास के क्रम को समझना होगा
    • कथा - व्यथा: सौंग - शामा
    • एडुसैट यानी शेखचिल्ली का सपना
    • आई.आई.एम. मामले में नाकारा रही सरकार
    • शिक्षकों के सम्मेलन में शिक्षा की बात नहीं हुई
    • शिक्षा तो खुशहाल समाज बनाने का जरिया है
    • जरा सोचें, हम स्कूलों को सृजनशीलता की कब्रगाह तो नहीं बना रहे हैं
    • यह शिक्षा दो तरह की दुनिया का निर्माण कर रही है
    • यह पूरी व्यवस्था ही डर पर आधारित है
    • कितना अच्छा होता
    • शिक्षा का रास्ता पेट से होकर जाता है
    • क्यों पढ़ाई में पिछड़ रही हैं उत्तराखंड की बेटियाँ
    • एक शिक्षक की डायरी
    • गंगा
    • बहुत समय लगेगा उच्च शिक्षा को पटरी में लाने के लिये
    • महासू के मन्दिर में घटी घटना शर्मनाक है
    • उच्च शिक्षा यानी ‘वन नाईट फाईट’
    • गनीमत है मैं आठवीं जमात से आगे नहीं गया....
    • आँकड़ों के आइने में उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा
  • वर्ष: 32, अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009 [ - ]
    • तालिबानी उत्तराखंड के भीतर तक घुस आये हैं
    • क्या अब भी नहीं मिलेंगी परिसम्पत्तियाँ
    • ये परियोजनायें तो महज पैसा कमाने के लिये हैं
    • स्वस्ती श्री
    • घराटों को लेकर खींचतान
    • अब मिल पायेगा पीने के लिये पानी
    • बारिश के बगैर भी पहाड़ों का रड़ना-बगना शुरू
    • चिठ्ठी पत्री
    • 2010 के कुम्भ मेले के लिये तैयार हो रहा है हरिद्वार
    • जलवायु परिवर्तन की मार उच्च हिमालयी इलाकों पर भी पड़ रही है
    • वह ‘देवत्व’ तो अब दिखाई नहीं दे रहा है देवभूमि में
    • ये खेल तो जोशीमठ की तबाही का कारण बन रहे हैं
    • स्वतंत्रता सेनानी भवानी दत्त जोशी: जिन्हें हम भूल गये
    • अमर सिंह जैसे अन्वेषकों की आज भी जरूरत है
    • नारायण राम दास: कठिन संघर्ष के 63 साल
    • ‘विरासत’ के बहाने हबीब तनवीर को श्रद्धांजलि
    • साइबर अपराधों का गढ़ बन रहा है उत्तराखंड
  • वर्ष: 32, अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 मार्च 2009 [ - ]
    • भू माफियाओं को अब नहीं सहेंगे पहाड़ के लोग
    • अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
    • कॉर्बेट पार्क में एक अभिनव प्रयोग
    • लो साहब गुजर गये शादियों के भी दिन !
    • रॉयल राइफल्स के फौजी हमजोली
    • वन ग्रामवासी अब संगठित हो रहे हैं
    • शिक्षा के पहरुए भी हो सकते हैं बच्चे
    • उसे ले गए
    • हरेले के तिनड़े के साथ जी रया जाग रया
    • सरकारी धन की बर्बादी का नायाब नमूना है रामनगर का ट्रांसपोर्ट नगर
    • खबरदार! ठुलीगाड़ का पानी मत पीना
    • ‘उत्तराखंड खबर सार’ ने पूरे किये दस साल
    • पैसे दो, खबरें लो
    • मेरा गाँव, मेरे लोग. समापन किस्त
    • इस बार ‘इक्वाइन इनफ्लूइंजा’ ने कहर बरपा किया घोड़ों-खच्चरों पर
  • वर्ष: 32, अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2009 [ - ]
    • अब क्या कभी उबर पायेगा कुमाऊँ विश्वविद्यालय
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 29
  • वर्ष: 32, अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 28
  • वर्ष: 32, अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 27
  • वर्ष: 32, अंक: 19 || 14 मई से 31 मई 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 26
  • वर्ष: 32, अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 25
  • वर्ष: 32, अंक: 17 || 14 अप्रेल से 30 अप्रेल 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 24
  • वर्ष: 32, अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 23
  • वर्ष: 32, अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 22
  • वर्ष: 32, अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009 [ - ]
    • सीमान्त क्षेत्र में चोरों की मौज है
    • धीरे चलूँ घर सास बुरी है...धमकि चलूँ ?
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 21
    • थरूवाटी होली
    • एक बाघ उ.प्र. में !
    • जी रौं लाख सौ बरीस!
    • बच्चों की कार्यशाला.... अरे कान्हा बजै गयो बाँसुरिया
    • रामनगर में वसंतोत्सव सम्पन्न
    • अब राग रंग को तबाह करने वाली सत्यानाशी शराब के खिलाफ ग्रामीण
    • बाबू बन कर रह गये हैं प्राइमरी अध्यापक
    • हाँ..हाँ रे आन्दोलनकारी..... क्यों गई तेरी मति मारी
    • होली..कैसी..कैसी..ऐसी...वैसी....
    • अब ठोस एक्शन प्लान पर हो नदी बचाओ अभियान
    • स्मृति शेष: पद्मादत्त पंत
    • जमीन को लेकर शुरु हो सकती है खून की होली
    • कमीशन खाने खिलाने के लिये है हरियाली परियोजना!
    • देशभक्त रामदेव को राष्ट्रध्वज के सम्मान का ख्याल नहीं
    • नैनीताल से सटे गांवों में भी पड़ी है सूखे की मार
    • लाठियों के सहारे दमन
    • चैतलकोट का भू-स्खलन-ताजा स्थिति
    • चिपको पर बहस
    • चाय की चुस्कियाँ : यशपाल
    • समाचार पत्रों का विराट रूप : महावीर प्रसाद द्विवेदी
    • होलियारविहीन वोट का स्वांग
    • इस बार : गिर्दा
    • वसंत : कुछ कवितायें
    • संविधान के नये प्रारूप की उद्देशिका
    • लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय है होली
    • होली बागेश्वर की
    • होली दमित भावनाओं का रेचन है.. मगर संस्कृति की ठेकेदारी ?
    • पौड़ी की होलियों की जान थे दयासागर धस्माना
    • तेरे बिरज में शूक बहुत हैं.... मुटियाय रहे रसिया
    • आज को बसन्त सूचना व लोक सम्पर्क विभाग का घर
  • वर्ष: 32, अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 20
  • वर्ष: 32, अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 19
  • वर्ष: 32, अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2009 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 18
  • वर्ष: 32, अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 17
  • वर्ष: 32, अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008 [ - ]
    • फौज ने ही बेच डाली सरहदी भूमि !
    • हैवानियत और बेशर्मी की मिशाल है प्रीति हत्याकांड
    • क्या होगा स्थानीय लोगों का
    • राष्ट्रीय शोक: राजनीति ने गड़बड़ाया देश का मोराल
    • होण्डा पावर प्रोडक्ट्स: पलायन के खिलाफ मजदूर संघर्ष की राह पर
    • अनशन खत्म, अब जायेंगे देहरादून
    • नहीं रहे नारायण चन्द्र भारती !
    • प्राग फार्म के पट्टे निरस्त कर उद्योगपतियों को देने की तैयारी तो नही
    • लोकतंत्र के लिये चुनौती
    • बच्चे कितना कुछ जानते हैं
    • कौसानी में जुटे देश भर के साहित्यकार
    • मनिया के साथ मुनस्यारी - 2
    • साहसिक पर्यटन संस्थाओं पर केस कर बचना चाह रहा है प्रशासन
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 16
  • वर्ष: 32, अंक: 07 || 14 नवंबर से 30 नवंबर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 15
  • वर्ष: 32, अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 14
  • वर्ष: 32, अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 13
  • वर्ष: 32, अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 12
  • वर्ष: 32, अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 11
  • वर्ष: 32, अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008 [ - ]
    • नदी अंक के साथ 32 वें वर्ष में प्रवेश
    • ...सिर्फ उनकी नजरों के लिये जिन्हें नैनीताल समाचार की परवाह है
    • नदी-अंक की कवितायें
    • सेवाग्राम घोषणा व शपथ
    • डी.डी.पंत की विरासत और उक्रांद : चिट्ठी पत्री
    • स्वस्ती श्री : बनाओ अपनी अपनी बिजली
    • नदी परियोजनायें: बेहतर विकल्प ढूँढें वैज्ञानिक और विशेषज्ञ
    • हरा समंदर गोपीचंदर बोल मेरी मछली कितना पानी.....
    • ‘नदियों ने मनुष्य की चेतना और सभ्यता को इस मुकाम तक पहुँचाया’
    • ‘बलिया’ नाम जलधार
    • डामा खातीर
    • एक और आत्महत्या....
    • सौल कठौल :दूध माँगोगे खीर देंगे...कश्मीर माँगोगे चीर देंगे!
    • सिर्फ एक स्थान विशेष नहीं है गैरसैण
    • जल विद्युत परियोजनाओं पर श्वेतपत्र जारी करे उत्तराखंड सरकार
    • इस बार तबाही लेकर आयी है बरसात
    • ईष्र्या, द्वेष और लालच की प्रवृत्ति पर चुटीला व्यंग्य है ‘पाणि’
    • गलत निर्माण से भी होती हैं दुर्घटनायें
    • एक अभियान मैकतोली पर
    • यह दिग्भ्रमित छात्र राजनीति खतरनाक है भविष्य के लिये
    • तोड़फोड़ से सकते में हैं कुमाऊँ वि.वि. के अध्यापक और कर्मचारी
    • निशंक के कदम अब मुख्यमंत्री की कुर्सी की ओर
    • भैजी चरौनी भैंसी......भौजि बणिगो सभापति
    • पुरातत्व विभाग की लापरवाही से नष्ट हो रहा है शिव का त्रिशूल
    • अभिव्यक्ति की आजादी का मखौल बन गया है
    • क्या यह पत्रकारिता है ?
    • स्मृतिशेष: कव्वाली गाते हुए गये अब्दुल वजीर (पच्चू)
    • क्या संदेश देने जा रहे हैं पंचायत चुनाव ?
    • गढ़वाल के यातायात के इतिहास का एक शानदार अध्याय
    • चमोली में रोजगार गारंटी योजना भी भ्रष्टाचार में समा गई है
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 10
  • वर्ष: 31, अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 09
  • वर्ष: 31, अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 08
  • वर्ष: 31, अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 07
  • वर्ष: 31, अंक: 21 || 15 जून से 31 जून 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 06
  • वर्ष: 31, अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 05
    • आपदा प्रबंधन को अपनी आन्तरिक आपदा से मुक्त होना होगा
    • ये घटनायें अच्छे भविष्य का संकेत नहीं हैं
    • ध्वस्तीकरण तो रुका पर आगे ?
    • हर तरह के कायदे-कानून से मुक्त है यह विश्वविद्यालय
    • निशंक की कथाकृतियाँ
    • चिट्ठी-पत्री : गंदगी देखकर दुःखद आश्चर्य!
    • तीन विभागों के झगड़े में फँसा है एक गाँव
    • आदिवासी कानून से ग्रामीणों की किस्मत बदल सकती है
    • नये पंचायत कानून की कवायद
    • शांति यात्रा रोकी
    • कैलाश बिष्ट को सब जानने लगे हैं
    • आखिर नदी बचाओ अभियान ने सरकार के दरवाजे पर दस्तक दी
    • लोकवाद्यों के संरक्षण का प्रयास
    • सरयू के संभावित डूब क्षेत्र में एक यात्रा
  • वर्ष: 31, अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 04
    • राजनीति का शिकार हो गई है बद्री-केदार समिति
    • क्या खगौती देवी की आत्महत्या के बाद बेहतर होगी शिक्षा व्यवस्था
    • ध्वस्तीकरण से खलबली मची
    • चिट्ठी-पत्री : सदानीराओं के दिन बहुरेंगे?
    • स्वस्ती श्री: प्रधान ज्यू चीड़ाक बोट झन लगाया हो..
    • हमारा समाज और साहित्य में महिलायें
    • आजादी के लिये तिब्बतियों का स्वदेश कूच
    • तो इस तरह जीत ली गई नैनीताल बैंक की अस्मिता की लड़ाई
    • सेंचुरी मिल के झाँसे से बीमार रहने लगे हैं लोग
    • संघर्ष ही जीवन की कथा रही
    • धर्मसिंह रावत की जरूरत तो अभी बनी रहेगी
    • सुमन से क्यों डरती है सरकार
  • वर्ष: 31, अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 03
    • कब तक मरती रहेंगी नर्मदायें ?
    • क्या यह राजनैतिक दलों से मोहभंग की शुरूआत है ?
    • एक बार फिर से एडसिल
    • चिट्ठी-पत्री: पत्रकारिता करना तो आज पैसा कमाने का जरिया बन गया है
    • स्वस्ती श्री : क्या नैनो जरूरी है?
    • जब लोग ही इस पवित्र जल को नहीं बचा पा रहे हैं
    • एक लाख मरीज और अस्पताल खुद बीमार!
    • क्या इस साल चालू हो जायेगा मेडिकल कॉलेज
    • जबर्दस्त भ्रष्टाचार हावी है विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना में
    • महिलाओं ने फिर से शराब पर हल्ला बोला
    • चेतना आन्दोलन की पदयात्रा: यहाँ माइक्रोप्लान तक ठीक नहीं बने हैं
    • इस बार उमेश डोभाल को श्रीनगर में याद किया गया
    • नातियों को लेकर व्याकुल है सोबती देवी
    • यादगार रहेगी वह केदारनाथ यात्रा
    • सुअरों के बाद अब सरकारी खाद ?
    • बागेश्वर की चिन्ता दिल्ली से
    • बागेश्वर में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी
    • भारतीय आध्यात्मिकता को सर्वसाधारण को सुलभ कराया महर्षि ने
    • पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर सकी जलक्रीड़ा प्रतियोगिता
  • वर्ष: 31, अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 02
    • मुख्यमंत्री ने आन्दोलनकारियों की सुध ली
    • नेपाल में नया सूर्योदय
    • अब भुखमरी से भी मौतें!
    • सम्मान तो आपको जनता ने दिया ही है पँवार जी!
    • चिट्ठी पत्री: राम से बढ़ कर रामकथा है
    • गंभीर नहीं हैं प्रदेश के कर्मचारी-शिक्षक नेता
    • बागेश्वर: होली का उल्लास हत्या ने छीना
    • राजनैतिक बन्दियों के साथ उचित व्यवहार करने की माँग
  • वर्ष: 31, अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2008 [ - ]
    • मेरा गाँव, मेरे लोग - 01
    • होली-2008 : मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी,
    • पुलिस को तो मालूम ही नहीं कि प्रतिबंधित क्या है
    • शिक्षा की तो पूरी सोच बदलने की जरूरत है
    • चिट्ठी-पत्री : ये टाइम- बेटाइम केवल महिलाओं व लड़कियों के लिये ही क्यों?
    • इतराने लायक क्या है खंडूरी सरकार के एक साल के कार्यकाल में ?
    • मग्रास सिर्फ एक सपने का नाम नहीं है
    • यह कैसी छात्र राजनीति है ?
    • कब बनेगा चौरास का पुल ?
    • सिर्फ समारोह मनाने मात्र से नहीं बच सकेगी उमेश डोभाल की परम्परा
  • वर्ष: 31, अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008 [ - ]
    • रंग तो कई हैं पर अपना रंग हल्का
    • हाँ रे गोरी सब रस चूनर भीजि रयो
    • सौल-कठौल : पंडित जी की याद
    • हमारी होली-दीवाली तो जनप्रतिनिधियों ने बदरंग कर दी
    • गूंजी कुमाऊँ महोत्सव की धमक
    • सरयू लोकादेश, सौंग और सरयू गीत
    • कुछ कविता कुछ गीत: होली 2008
    • बगरो बसंत है-होली 2008
    • म्याँमार (बर्मा) में होली
    • अब मीडिया से संचालित हो रहे हैं त्यौहार
  • वर्ष: 31, अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008 [ - ]
    • नदियों की चिन्ता तो पूरे देश को है
    • उपचुनाव के बहाने निपटाने की कसरत
    • सरकार को पंचायतों की ओर देखने की फुर्सत कहाँ है
    • चिट्ठी-पत्री : मेरे हर सपने में सिर्फ पहाड़ होता है !!
    • सरकार की मदद के बगैर भी हर साल खिलते हैं बसन्तोत्सव के रंग
    • प्रशान्त राही के बाद अब खीमराज सिंह को प्रताड़ित करती पुलिस
    • स्मृति शेष: इतिहासकार जसवंत सिंह नेगी
    • तोलीगाँव मोटर मार्ग की फाइल गुम ?
    • लड़कियों की निगरानी बगैर नहीं थमेगा अश्लील क्लिपिंगों का सिलसिला
    • सर्वसम्मति की असहमति !
    • पत्रकार एसोसिएशन का सम्मेलन
    • अनावश्यक महत्व क्यों दें पद्म सम्मानों को ?
    • साठ साल पुराने पौड़ी की यादें - 2
  • वर्ष: 31, अंक: 13 || 15 फरवरी से 29 फरवरी 2008 [ - ]
    • उत्तराखंड में मायावती की पहलकदमी
    • आदिवासी वन कानून को लेकर सरकार खामोश क्यों है ?
    • यहाँ भी जल विद्युत परियोजनाओं से लोग अपना परिवेश नष्ट होते देख रहे हैं
    • चिट्ठी-पत्री : पद+दायित्व-लालबत्ती=सरकारी खजाने के सेहतमंद दीमक
    • जमीनी सच्चाइयाँ मुख्य हैं प्रतिभाओं की खोज के लिये
    • साठ साल पुराने पौड़ी की यादें
    • शादी की संस्कृति और विकास की विसंगतियाँ
    • मक्कू मठ: इतिहास से विकास तक का सफर
    • आशल कुशल - फरवरी 2008
    • अब आशा की किरण देख रहे हैं मल्ला दानपुर के ग्रामीण
    • आस्ट्रेलिया छोड़ कर सूपी में रम गये हैं देवीदा
    • ‘लवा’ का तो नाम भी भूल जायेंगे लोग
    • चूर चूर हो गया है हरिराम टम्टा जी का सपना
  • वर्ष: 31, अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2008 [ - ]
    • तुम नज़रें उठाने लगती हो तो…..
    • अमर रहे गणतंत्र हमारा
    • चिट्टी पत्री : श्रीमती जी को शिकायत है कि……
    • इन यात्राओं को जारी रहना होगा
    • परिसीमन से उबला गुस्सा
    • मौसम के पूर्वानुमान को लेकर बहुत गंभीर नहीं है मीडिया
    • जन प्रतिनिधियों द्वारा मँझधार में छोड़ दिये जाने के बावजूद डटे हैं ग्रामीण
    • उत्तरायणी मेला: इस बार मौसम भी रूठा रहा
    • जबरन माओवाद का भूत पैदा कर रही है उत्तराखंड सरकार
    • शासनादेशों से आतंकित हैं प्रत्याशी
    • हिवरे बाजार ने रास्ता दिखा दिया है
    • अलविदा एच.सी.एस. रावत
    • आदिवासी और ग्रामीण ही राहत दिला सकते हैं ग्लोबल वार्मिंग से
    • जंगली सुअर लौट आये हैं
    • बच्चों को प्रोत्साहन चाहिये
    • अपने अपने कैलास –1
  • वर्ष: 31, अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008 [ - ]
    • नदियों के किनारे चल पड़ी हैं पदयात्रियों की टोलियाँ
    • अभी लड़ने से थके नहीं दानपुर के ग्रामीण
    • व्हाट एन आइडिया जी ?
    • अक्षरों के पुल के नीचे बहती-थमती कवितायें
    • चिट्ठी पत्री: जोर जबर्दस्ती से क्या सच्चाइयाँ छुपाई जा सकेंगी ?
    • जीव जगत से बच्चों का अपनापा जोड़ने का पर्व है घुघुतिया
    • छेदीलाल बनाम सुराख अली बनाम होलचन्द
    • कस ज होलो ठार्यो समधी ! कस ज भ्यो
    • एक पदयात्री के नोट्स : नौजवान गायब है
    • क्या अस्पतालों में संवेदना नहीं बची
    • महिला समाख्या ने महिलाओं में आत्मविश्वास भरा
    • मरोज त्यौहार: यहाँ माघ में भी मांस खाया जाता है
    • अभी भी आँखों के सामने रेंगता है मून लैंडिंग का नजारा
    • नदियों पर संकट है सारे गाँव इकट्ठा हों
    • जंगलों के बगैर विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती
    • विज्ञापन लुटा कर भ्रष्टाचार छिपा रहा है हरिद्वार विकास प्राधिकरण
    • सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का - 3
    • उत्तराखंड को संजीवनी राज्य बनायें
    • चारा उत्पादन के लिये जमीनी सच्चाइयों का ख्याल रखें
  • वर्ष: 31, अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008 [ - ]
    • अभी बना हुआ है परिसम्पत्तियों का लफड़ा
    • नया साल : कुछ कवितायें
    • फँसाया गया है प्रशांत को
    • माओवादियों का जोनल कमांडर........ बाप रे बाप!
    • चिट्ठी-पत्री : सरकार की मान्यता से जरूरी जनता की मान्यता है
    • स्वस्ती श्री : मोटर रोड 8 से 24 किमी दूर
    • यहाँ मनाते हैं मंगसीर में दीवाली
    • मरियोला को पिथौरागढ़ की सच्चाई समझ में आ गई है
    • औली बुग्याल में भारी निर्माण क्यों हो रहे हैं ?
    • नदी को सुरंग से ले जाने का खतरा महसूस कर रहे हैं दानपुर के लोग
    • है किसका अधिकार नदी पर
    • ताकि विवाह सम्बन्ध बना रहे: एक अध्ययन भाग - 2
    • यों लुटता है सरकारी खजाना
    • नैनीताल समाचार की अनदेखी से सकते में हैं दिल्ली के पत्रकार
    • पत्रकार की शामत
    • चौपता का कौथिग
    • अब व्यापारी समझे मॉल की हकीकत
    • क्या सचमुच इतना पैसा खर्च कर दिया गया है नैनीताल पर ?
    • बौरारो की जनता के सामने लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा
    • सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का - 2
  • वर्ष: 31, अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007 [ - ]
    • मुख्यमंत्री अब करने लगे हैं लोक लुभावन घोषणायें....
    • थैंग गाँव के लिए रास्ते की मांग पर मार-पीट
    • इस व्योपारी को प्यास बहुत है
    • पानी पर जनता के अधिकार सुनिश्चित करने निकलेंगी नदी यात्राएं
    • चिट्ठी-पत्री : जी रया जाग रया, ट्विंकल-टिविंकल लिटिल स्टार
    • स्वस्ती श्री: लोकतांत्रिक शक्तियों(?) का अलोकतांत्रिक कार्य
    • बारहनाजा - पारम्परिक अनाजों के बीजों में छुपे जीवन का दर्शन और विज्ञान
    • छुट्टी हो तो ऐसी
    • मंत्री पुत्र का विवाह, उत्तराखंड विधान सभा में अवकाश
    • सम्पन्न हुआ उक्रांद का द्विवार्षिक महाधिवेशन
    • संगठित होना होगा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये
    • बच्चे कितना कुछ जानते हैं
    • त्रिलोचन के बिना
    • कौन कहता है कि गौरव नहीं रहा.....
    • मुझे अपनी माँ में दिखता था बेटी का चेहरा
    • मेरि कोसि हरै गे कोसि
    • बुलन्द हो रहे हैं चोरों के हौसले
    • पंचेश्वर बाँध के डूब क्षेत्र सरयू घाटी में जन जागरण अभियान
    • सफरानामा पूना से मारूति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का - 1
  • वर्ष: 31, अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2007 [ - ]
    • अब ग्रामीण नहीं रहेंगे, क्योंकि पनबिजली योजनायें आ रही हैं!
    • गुमनाम ही रहे स्वाधीनता संग्रामी मनोरथ पांडे ‘शास्त्री’
    • ‘ग्रामीण विकास का मतलब है ग्रामीण उद्योगों का विकास’
    • स्वामी आलोकानन्द की मौत का विश्वास नहीं होता!
    • जातिवादी सोच में अबला का दर्द भी दब गया
    • चिट्ठी पत्री: नैनीताल समाचार दैनिक कब से होगा?
    • विश्वविद्यालय परिसर फासीवाद की नर्सरी बन रहा है
    • थैंग गाँव में असंतोष है
    • चाँई जैसे हालात हैं कफनौल के
    • गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः, गुरूः साक्षात्....
    • किताबों के बारे में
    • क्या यही है टी. एल. एम. मेलों की सार्थकता
    • पशुबलि प्रथा देवभूमि पर कलंक है
    • अभी जीवन्त और आकर्षक है लोक संगीत की सुर-लहरी
    • बेघरबार है बलात्कार की शिकार बालिका
    • राजमा के उत्पादन से सम्पन्न हो रहे हैं उर्गम घाटी के किसान
    • जिसका ईगो बढ़ गया है, उसे पैदल यात्रा करनी चाहिये
    • ताकि विवाह सम्बन्ध बना रहे: एक अध्ययन
  • वर्ष: 31, अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2007 [ - ]
    • सात सालों बाद भी दिशाहीन है यह राज्य
    • आंदोलनकारियों का कोई ग्वाल-गुसैं नहीं
    • मुख्यमंत्री जी, बतायें तो कि हमारी हैसियत क्या है ?
    • स्वस्ती श्री : जानवरों से परेशान हैं हम लोग
    • बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय
    • नैन सिंह: वह उत्तराखंड के जनसंघर्षों की बुनियाद था
    • ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार.....3
    • नैनीताल में कथा साहित्य का ‘संगमन’
    • पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन का अधिवेशन सम्पन्न
    • जौनपुर बदल रहा है
    • ट्राइबल सोसाइटी में कम्प्लीकेशंस नहीं होते, उसकी फुर्सत ही कहाँ
  • वर्ष: 31, अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2007 [ - ]
    • चाँईं गाँव की घटना तो खतरे की घंटी है
    • जंक खा रही गाड़ियों से कैसे उबरेगा निगम
    • मोहन सिंह को उम्मीद है डी.एम. बचा लेगा माफिया से
    • अभी तो खड़िया से आँखें चौधियायी हैं
    • शिक्षा राष्ट्र की सुरक्षा से कम जरूरी नहीं
    • ये उद्योग तो खुशहाली के बदले असंतोष ला रहे हैं !
    • रामगढ़ के नौजवान माफिया की सरपरस्ती में जी रहे हैं
    • शीत जल मत्स्यिकी की अच्छी संभावनायें हैं
    • मिल-जुल कर किये बगैर नहीं हो सकती सफाई
    • बिना रीडिंग के बिजली बिल
    • ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार.....2
    • खेद तो इस देश के बारे में है जो सड़क, बिजली भी न दे सका
  • वर्ष: 31, अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2007 [ - ]
    • शेरपाओं ने हिम समाधि ली
    • पालिका सदस्यों की बर्खास्तगी का अभूतपूर्व निर्णय
    • समस्या का समाधान नहीं है भू अध्यादेश
    • चिट्ठी पत्री : भ्रष्टाचार की गंगोत्री लबालब बह रही है और असली गंगोत्री संकट में
    • विज्ञान कहाँ है इन विज्ञान प्रदर्शनियों में ?
    • शोध कार्य की दिशा कौन तय करेगा
    • मौत का शॉर्टकट क्यों बन रही हैं पहाड़ की सड़कें
    • आशल-कुशल अक्टूबर 2007
    • ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार-1.....
    • ये उद्यमी महिलायें!
    • सीमान्त के गाँव निर्जन हुए तो सीमा की रक्षा कैसे होगी ?
    • नेताओं और अफसरशाहों में विकास की इच्छा ही नहीं
  • वर्ष: 31, अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2007 [ - ]
    • छात्रसंघ के रणबाँकुरों से थर्रायी दून घाटी
    • छिः... कैसे-कैसे पत्रकार !
    • आखिर क्यों आक्रामक हो उठे हैं जानवर
    • फिर अतिवृष्टि से घायल हुआ पहाड़
    • चिट्ठी पत्री: गायब हो गया मेरा गाँव बड़गूँ
    • स्वस्ती श्री: पीकदान, दीपदान और बागनाथ
    • चिकित्सा और दूरसंचार से परेशान है मंदाकिनी घाटी
    • यह तो नजरिया बदलने की शुरूआत है
    • शर्मशार हुआ स्वामी श्रद्धानन्द का गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय
    • विस्थापन के बगैर कोई भविष्य नहीं है पाला के ग्रामीणों का
    • संग्रामी पत्रकारों की याद
    • आरक्षण पर व्यावहारिक समझ क्यों नहीं बनती ?
    • खुशी लाने का हर रास्ता काँटों भरा होता है
  • वर्ष: 31, अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2007 [ - ]
    • नैनीताल बैंक का अस्तित्व मिटाने की कोशिश जारी है
    • आपको भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है ऐरी जी ?
    • चिठ्ठी पत्री: नराई कैसे फेरें, सम्पादक ज्यू ?
    • शहीदों को श्रद्धांजलि देने भी एक नहीं हो पाते लोग !
    • इस बार की बधाई और मानहानि
    • आप रौशनी हैं हमारे लिये
    • घपलेबाज सांसदों को वेतन मत दो, वाहिनी ने कहा
    • छोटे व्यापारी की व्यथा भी तो सुनी जाये
    • केदारघाटी में घुस आये शराब के तस्कर
    • वह व्यवहार ही क्या, जिसमें कहीं प्रेम न हो
  • वर्ष: 31, अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007 [ - ]
    • ग्राम गणराज्य अंक और तीसवां जनमबार
    • ग्राम गणराज्य अंक: कुछ कविता, कुछ विचार
    • चिट्ठी पत्री: नारी तुम केवल श्रद्धा हो?
    • औद्योगिक विकास के नाम पर मजदूरों का दमन
    • एक ओर तबाही है तो एक ओर माफिया की ताकत
    • अथक संग्रामी और प्रखर वक्ता थे गोविन्द बल्लभ पंत
    • भारत हेवी इलैक्ट्रिकल्स भी शामिल है जमीन के घोटाले में
    • ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास की योजनाओं में
    • अब विवेकाधीन कोष पर रोक लगने के दुष्परिणाम दिख रहे हैं
    • ‘मुझे कोई नहीं चाहता’
    • यह अधूरा पंचायत राज तो ग्राम गणराज्य नहीं है
    • अधिकार तो देर सबेर देने ही होंगे
    • क्या एन.जी.ओ. बनायेंगे कानून ?
    • परिचर्चा: अवसर मिले तो अत्यन्त कारगर हो सकती हैं पंचायतें
    • केन्द्रीय सत्ता से कुछ टुकड़े फेंक दिया जाना विकेन्द्रीकरण नहीं
    • जल, जंगल, जमीन के अधिकार सुनिश्चित हों
    • पहले नौकरशाही की जकड़ से मुक्त करें
    • मैं आजादी से काम कर सकी
    • सामुदायिक भागीदारी भ्रम है
    • केरल और बंगाल से सबक लें
    • खो न जायें इतने संघर्ष से प्राप्त अधिकार
    • आम सहमति से हो सकते हैं सारे काम
    • पिछली गलती न दोहरायें
    • डाबर की नजर से अभी ओझल है आँवले का यह जंगल
    • 18 सितम्बर: नैनीताल स्वच्छता दिवस
    • याद रहेंगे देवीराम जी
    • किलकारी से पर्यावरण चेतना
    • विकास की दिशा पर गोष्ठी
    • इन फालतू विद्यालयों का मतलब क्या है
    • पानी का अनियंत्रित उपयोग विनाशकारी होगा
    • महिला मैत्री गोष्ठी: प्रशासन और जनता के बीच संवाद की कोशिश
    • महात्मा गाँधी के आगमन से बढ़ा महिलाओं में आत्म सम्मान
    • आरक्षण को लेकर फिर से सरगर्मी
    • शिमायल में सौन्दर्य है, मगर पानी नहीं
    • कमीशनखोरी तो रुकनी ही चाहिये
    • कुछ के लिये आजीविका का साधन हैं पंचायत
    • हमने प्रयोग किया सर्वानुमति का
    • शहर में रह कर गाँव के प्रतिनिधि बने लोग ज्यादा निकम्मे हैं
    • महिलाओं ने अपनी उपयोगिता साबित की है
    • गाँव बटा, अब घर तो न बँटे !
    • ठेकेदारी पर रोक कैसे लगे ?
    • ......और मैंने एक सपना देखा ....
    • मानसिकता बदल रही है
    • संकीर्ण दायरों को टूटना है
    • जनजाति क्षेत्र का बजट भी काम नहीं आ रहा जौनपुर की पंचायतों में
    • केरल से विकास के कुछ सबक
    • सहयोग-सौहार्द होना पहली शर्त है
    • ठेकेदार अफसर गठबंधन से डरने की जरूरत नहीं
  • वर्ष: 30, अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2007 [ - ]
    • अब रेम्को वान सांटेन बचायेंगे नैनीताल को

अन्य भाग: [ 1 ] [ 2 ] [ 3 ] [ 4 ] [ 5 ] [ 6 ]

For Nainital Samachar Members

जनमबार अंक 2010

गनीमत है मैं आठवीं जमात से आगे नहीं गया….

लेखक : शंम्भू राणा

उच्च शिक्षा यानी ‘वन नाईट फाईट’

लेखक : प्रभात उप्रेती

महासू के मन्दिर में घटी घटना शर्मनाक है

लेखक : कैलाश चन्द्र पपनै

बहुत समय लगेगा उच्च शिक्षा को पटरी में लाने के लिये

लेखक : रमदा

आँकड़ों के आइने में उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा

लेखक : नैनीताल समाचार

गंगा

लेखक : नैनीताल समाचार

एक शिक्षक की डायरी

लेखक : मनोहर चमोली

क्यों पढ़ाई में पिछड़ रही हैं उत्तराखंड की बेटियाँ

लेखक : नैनीताल समाचार

शिक्षा का रास्ता पेट से होकर जाता है

लेखक : नैनीताल समाचार

कितना अच्छा होता

लेखक : नैनीताल समाचार

हरेला अंक 2009

पैसे दो, खबरें लो

लेखक : नैनीताल समाचार

उत्तराखंड खबर सार‘उत्तराखंड खबर सार’ ने पूरे किये दस साल

लेखक : नैनीताल समाचार

भू माफियाओं को अब नहीं सहेंगे पहाड़ के लोग

लेखक : कमल नेगी

खबरदार! ठुलीगाड़ का पानी मत पीना

लेखक : जुगल किशोर पांडे

इस बार ‘इक्वाइन इनफ्लूइंजा’ ने कहर बरपा किया घोड़ों-खच्चरों पर

लेखक : जगमोहन रौतेला

सरकारी धन की बर्बादी का नायाब नमूना है रामनगर का ट्रांसपोर्ट नगर

लेखक : पिंकी रावत

हरेले के तिनड़े के साथ जी रया जाग रया

लेखक : राजीव लोचन साह

उसे ले गए

लेखक : नरेश सक्सेना

शिक्षा के पहरुए भी हो सकते हैं बच्चे

लेखक : उदय किरौला

वन ग्रामवासी अब संगठित हो रहे हैं

लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला

होली अंक 2009

साइबर अपराधों का गढ़ बन रहा है उत्तराखंड

लेखक : चंदन बंगारी

होली बागेश्वर की

लेखक : पंकज पांडे

लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय है होली

लेखक : आनन्द बल्लभ उप्रेती

होली..कैसी..कैसी..ऐसी…वैसी….

लेखक : राजीव लोचन साह

संविधान के नये प्रारूप की उद्देशिका

लेखक : नैनीताल समाचार

जी रौं लाख सौ बरीस!

लेखक : राजीव लोचन साह

सीमान्त क्षेत्र में चोरों की मौज है

लेखक : सरोज राणा

धीरे चलूँ घर सास बुरी है…धमकि चलूँ ?

लेखक : जगमोहन रौतेला

मेरा गाँव, मेरे लोग – 21

लेखक : देवेन्द्र मेवाड़ी

थरूवाटी होली

लेखक : महेश पोखरिया

आपकी टिप्पणीयाँ

  • Madan Kumar Khanduri on भूल सुधार: क्या पहाड़ के सिपाही के जीवन का मूल्य कम होता है ?
  • nathudangwal on अब क्या कभी उबर पायेगा कुमाऊँ विश्वविद्यालय
  • jaswant singh on बर्बाद हो रही खेती
  • घिंघारु on उत्तराखंड के लिये जरूरी है चकबन्दी
  • घिंघारु on विश्वयुद्ध से कितना बदल गया गढ़वाल
  • घिंघारु on अपनी माटी से ताउम्र जुड़े रहे उमेशदा
  • Navin Joshi on मुम्बई का हिल स्टेशन ‘माथेरान’ और नैनीताल
  • समीर लाल on मुम्बई का हिल स्टेशन ‘माथेरान’ और नैनीताल
  • madhav on स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ा रहा भीमताल का हरेला मेला
  • Seema Mehara, Dhonthiya, -- on कब पूरा होगा रेल का सपना – भाग 1

RSS मेरा पहाड़ (Mera Pahad)

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  • गिर्दा का जाना एक युग का अवसान है
  • घी-त्यार : उत्तराखण्ड का एक लोक उत्सव
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  • Piran Kaliyar : A Symbol Of Unity
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  • श्यूं बाघ व नेपाली ‘जंग बहादुर’
  • अब कहां रहे वैसे श्यूं-बाघ
  • गरा रा रा ऐगे रे बरखा झुकि ऐगे
  • इखि ई पिरथिमा ये हि जलम मां
  • साँस छिन आस-औलाद तुमारी हमारी डाली – झम्म

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