‘दारू और दवा, इसी की चल रही है हवा’….‘घर में शादी हो या जागर, रंग में भंग कर देता है शराबी आकर’. …जैसे नारों व गीतों के माध्यम से क्षेत्रीय संगठनों ने बसौली स्थित शराब की दुकानों के विरोध में आन्दोलन का विगुल फूँक दिया है। विभिन्न महिला मंगल दलों, महिला समूहों से जुड़ी महिलाओं व ग्राम पंचायत संगठन, पट्टी मल्ला स्यूनरा के संयुक्त प्रयासों से 8 फरवरी को तीन सौ से अधिक महिला-पुरुषों ने बसौली से डोटियाल गाँव तक नारों व जन गीतों के साथ प्रदर्शन कर बसौली से शराब की दुकानों को हटाने की माँग की। अचानक इतनी बड़ी तादाद में महिला-पुरुषों के इस तरह सड़क में आ जाने से पुलिस के हाथ-पाँव फूल गये। जिला मुख्यालय तक खबर पहुँचने पर इस प्रदर्शन को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जाने लगे।
15 फरवरी को बसौली में एक बैठक कर तय किया गया कि 5 मार्च को पुनः बैठ कर अधिकाधिक लोगों को आन्दोलन से जोड़ने के प्रयास किये जाएँगे। इन दुकानों को हटाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन जिलाधिकारी व आबकारी अधिकारी को प्रेषित किया गया।
1996 में जब बसौली में शराब की दो दुकानें (देशी-विदेशी) खुलीं तो लोगों में अन्दर गुस्सा होने के बावजूद प्रत्यक्ष कोई विरोध नहीं हुआ। पहले ही खुल चुकी पुलिस चौकी के संरक्षण में कच्ची शराब बनाने का अवैध कारोबार कई गाँवों में फल-फूल रहा था। कई गांवों में प्रभावित लोगों ने संगठित हो कर काफी हद तक इस बीमारी पर अंकुश भी लगा लिया था। लेकिन सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों के खुल जाने के बाद नशे का दुष्प्रभाव पूरे इलाके में पड़ा। कई घर बरबाद हुए और कई जानें गईं। विरोध की बातें काँग्रेस-भाजपा कार्यकर्ताओं के ढुलमुल रवैये की भेंट चढ़ गईं, जो यह प्रचारित करते हैं कि दुकानों को बंद करने से अवैध शराब का धंधा बढ़ेगा और सरकार को राजस्व की हानि होगी।
बसौली-ताकुला पट्टी मल्ला स्यूनरा के 26 से अधिक गांवों का केद्र है। आसपास कई शिक्षण संस्थाएँ, बैंक, अस्पताल, पॉलीटैक्निक आदि हैं। खरीददारी आदि कई कार्यों के लिए भी लोग बसौली-ताकुला ही आते हैं। शराब की दुकानों के पास ही बस स्टॉप भी है। लेकिन सुबह से ही यहाँ शराबियों का आतंक शुरू हो जाने से यहाँ का माहौल खराब हो गया है। बताया जाता है इन दुकानों से कपड़खान, डीनापानी के अलावा कई गाँवों में अवैध रूप से शराब की सप्लाई की जाती है। ऐसे में अगर महिलाएँ शराब की दुकानों के विरोध में सड़कों पर उतर आयी हैं तो इसमें ताज्जुब क्या है?

























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