प्रीति थपलियाल
23 मार्च 2011 को आत्मरक्षा में एक गुलदार को मारने के प्रकरण में पौड़ी जनपद के रिखणीखाल विकासखण्ड का धामदार गाँव के 5 पुरुष व दो महिलाओं को जेल हुई। [देखें नैनीताल समाचार रिपोर्ट एक , रिपोर्ट दो] । उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कोटद्वार के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ‘जन अधिकार संयुक्त संघर्ष समिति उत्तराखण्ड’ बनाकर गिरफ्तार लोगों की रिहाई के लिये लगातार संघर्ष किया। लगातार दबाव बनाने के बाद गिरफ्तार 7 लोगों की हाईकोर्ट से 31 मई 2011 को जमानत मिली। इस बीच महिलाओं के संगठन ‘सुमंगला महासंघ’, जो ‘जन अधिकार संयुक्त संघर्ष समिति’ का घटक भी है, ने क्षेत्र में जाकर अनेक बैठकें कीं। ग्रामीणों का कहना था कि बाघ से ग्रामीण काफी दहशत में थे। बाघ को मारने का उनका कोई इरादा नहीं था। यदि होता तो वे वन विभाग को सूचना क्यों देते ? पहले ही क्यों न मार देते ? और किसी को पता भी न चलता। महिलाओं का कहना था कि सदियों से हमने अपने जंगलों की सुरक्षा स्वयं की, अब सरकार हमारे जंगलों पर कब्जे कर हमें अपराधी घोषित करने पर तुली हुयी है। वहीं प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि संरक्षित वन क्षेत्र ग्रामीण जनता के लिये अभिशाप बन गये हैं। संरक्षित पार्क एवं ग्रामीण इलाके नजदीक-नजदीक हैं। वन्य पशु आबादी वाले क्षेत्र में घुसकर फसलों को नष्ट करते हैं और मवेशियों को खा जाते हैं। आतंक से गाँवों में कर्फ्यू जैसा माहौल रहता है। पर्यावरण संरक्षण के आधे-अधूरे सोच ने ग्रामीणों को लकड़ी और चारा से वंचित कर दिया, वहीं संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर रिसोर्ट और होटलों के रूप में पर्यटक स्थल विकसित हो गये। इसके पीछे उच्च वर्ग के लिए मनोरंजन के साधन जुटाने की ही दृष्टि है। इसकी कीमत जनता को अपनी जान गँवाकर चुकानी पड़ती है।
‘जन अधिकार संयुक्त संघर्ष समिति’ ने 7 मई को जुलूस निकालकर प्रदर्शन करने के बाद रतुवाढाव रेंज कार्यालय का घेराव किया। उनकी माँग थी कि काले वन कानूनों को बदलकर जनता के हित में बनाये जाने चाहिए। अगले चरण में कोटद्वार तहसील में धरना दिया गया। 1 जून को दुगड्डा में चक्का जाम किया गया, जिसमें प्रशासन के साथ झड़प के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने एवं शान्ति भंग की धारा लगाकर 6 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये। हालाँकि आन्दोलनकारियों की शर्तो पर ही जाम खोला गया। ‘जन अधिकार संयुक्त संघर्ष समिति’ लगातार सामूहिक बैठकें कर जन जागरण कर रही है। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर आगे भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा।