टिहरी रियासत के प्रजामण्डल एवं आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की अन्तरिम सरकार में विधायक रहे पत्ती दास का पिछले पखवाड़े अपने पैतृक गाँव धारी (उत्तरकाशी) में निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। वे अपने पीछे पूरा-भरा परिवार छोड़ गये हैं। उनकी अस्थियाँ हरिद्वार में उनके सुपुत्र सहसपुर के विधायक राजकुमार ने विसर्जित की।
पत्ती दास आजादी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में विधान सभा सदस्य रहे। वे टिहरी रियासत में भी प्रजामण्डल की विधान सभा नरेन्द्र नगर में भी सदस्य रहे। आजाद भारत की पंचायत व्यवस्था आरम्भ होने पर वे अपनी ग्राम सभा में 15 वर्षांे तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे। उनके देहावसान पर पूरी यमुना घाटी गमगीन है। 60 के दशक में ‘मंदिर प्रवेश’ व ‘डोला पालकी’ आन्दोलन में सक्रिय रहने के कारण यमनोत्री व गंगोत्री मंदिर सभी धर्म-जातियों के लिए सार्वजनिक हुए। वे गांधी विचार से प्रभावित थे। विनोवा भावे एवं नर देव शास्त्री के साथ रहकर उन्होंने हरिजन सेवक संध के कार्यक्रम गाँव-गाँव चलाये और भूदान आन्दोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यमुना घाटी अर्थात् उत्तरकाशी व देहरादून के हिमांचल प्रदेश से लगे दूरस्थ क्षेत्र में विकास की रोशनी पहुँचाने का श्रेय पत्तीदास को जाता है। उनकी कल्पना थी कि यमुना घाटी फल पट्टी एवं नगदी फसल के लिए विकसित हो। दिल्ली-यमनोत्री राष्ट्रीय राज मार्ग बनवाने का बहुत बड़ा श्रेय पत्ती दास को ही जाता है। उन्होंने एवं दौलत राम रवाँल्टा के जबर्दस्त आन्दोलन ने यमुना घाटी को मोटर मार्ग से जोड़ा। आज भी इनकी स्मृतियाँ लोगों के जेहन में हैं। नगर पंचायत बड़कोट के अध्यक्ष बुद्धी सिंह रावत, व्यापार मण्डल नौगाँव के पूर्व अध्यक्ष अमर सिंह कफोला, कांग्रेस नेता ब्रह्मदत्त, पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी, काबीना मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत आदि ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यमुना घाटी में एक युग का अन्त हो गया है।
पत्ती दास ताउम्र कांग्रेस के सिपाही रहे। लेकिन उनके तीनों पुत्र भाजपा में हैं। एक सहसपुर के विधायक हैं तो दूसरे विकासखण्ड नौगाँव के क्षेत्र पंचायत प्रमुख हैं।


























आपकी टिप्पणीयाँ