उत्तराखंड में पहली बार एक सीरियल किलर, राशिद उर्फ बुदा पकड़ा गया है। उसने वर्ष 2008 से वर्ष 2010 से अब तक एक के बाद एक पाँच हत्यायें करना कबूल किया है। ये हत्यायें लूट की नीयत से की गयीं। हत्यारा अपनी मैक्स टैक्सी में सवारियों को तलाशता था। फिर उन्हें चाय के साथ नशीली गोली पिलाता और बेहोशी में रस्सी से गला दबाकर मार कर वीरान सड़कों के कलमट के अंदर फेंक देता। हत्यारे ने एक हत्या में 5000 रुपये से लेकर 9000 रुपये लूटना कबूल किया है। 31 जुलाई 2010 वरुण पांडे (आयु 35-36 वर्ष) की हत्या के बाद ही वह पुलिस के हत्थे चढ़ पाया। वरुण पंजाब में अध्यापक था और छुट्टियों अपने में पिता से मिलने कोटद्वार से कल्जीखाल जा रहा था।
कोटद्वार पुलिस के प्रभारी निरीक्षक जे.सी. पाठक ने हिमांशु थापा, पुत्र मोहन सिंह थापा, निवासी ग्रास्टनगंज के पास वरुण का मोबाइल फोन बरामद किया। थापा ने राशिद के साथ की गई हत्याओं को पर्त-दर-पर्त खोल डाला। राशिद को कोटद्वार पुलिस ने लालपानी के जंगलों से एक हल्की मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। बताया यह भी गया कि इससे पूर्व राशिद रुद्रप्रयाग के किसी होटल में छुपा रहा। भाई-बहनों में सबसे बड़ा, पहाड़ी मूल का राशिद तीसरी कक्षा तक पढ़ा-लिखा है। बताया जाता है कि राशिद की पूर्व पत्नी जल कर मरी थी। इसमें भी राशिद का हाथ होने का शक है।
अभियुक्तों ने कबूला है कि वर्ष 2008 में पहली बार उन्होंने पौड़ी से जाते हुए टैक्सी नं. मैक्स यू.ए. 12-8880 में नेपाली युवक की हत्या की और दुगड्डा से खुवादान की सड़क पर आगे ले जा कर सींधीखाल के पास कलमट में उसकी लाश फेंक दी थी। इस हत्या से हत्यारों को 13,000 रुपये प्राप्त हुए। दूसरी घटना में पौड़ी की टैक्सी नं. यू.ए.स. 12-6360 में सतपुली से बैठे व्यक्ति को मार कर 7000 रुपये लूटे गये। 15-20 दिन बाद इसी टैक्सी में चौबट्टाखाल जाने वाले यात्री को निशाना बनाया। यह घटना लगभग 2-3 बजे दिन में की गई। वीरान सड़कों पर अक्सर दोपहर बाद कोई वाहन नहीं चलता। इन दो घटनाओं का खुलासा कोटद्वार पुलिस मोबाइल फोन के सिम के जरिये कर पायी। जिन फोनों को राशिद ने हत्या के बाद फेंक दिया था, उनका खुलासा नहीं हो पाया। 25-07-2010 को कोटद्वार से एकेश्वर के लिये चले भूपेन्द्र (निवासी ग्राम सिलौंजी, एकेश्वर गढ़वाल) की हत्या के बाद उसके मोबाइल फोन को राशिद ने कोटद्वार के एक मोबाइल विक्रेता शाकिर को बेच दिया। भूपेंद के परिजनों के यह बताने पर कि उसने राशिद की टैक्सी बुक की थी, पुलिस द्वारा भूपेंद्र के मोबाइल को ट्रैस करते हुए घंटी बजी और शाकिर से उसका फोन बरामद हुआ। भूपेन्द्र के परिजनों ने कपड़ों से उसकी पहचान की।
सीरियल हत्याओं की इन घटनाओं ने टैक्सी व्यवस्था पर आम जनता के विश्वास को तोड़कर रख दिया है।