जनता द्वारा बसौली से शराब की दुकानें हटाने की मुहिम में सफल होने से बौखलाये शराब माफिया ने पुलिस-प्रशासन व आबकारी विभाग की सह पर क्षेत्र में अवैध शराब बिकवानी शुरू कर दी है और ‘शराब विरोधी संषर्ष समिति’ से जुड़े कार्यकर्ताओं को परेशान करना शुरू कर दिया है। शराब विक्रेता ने अवैध शराब बेचने वाले या शराब पीकर गुंडागर्दी करने वाले चुनिन्दा लोगों को लालच देकर अपनी ओर कर लिया है। इनके द्वारा यह प्रचार भी करवाया जा रहा है कि अवैध रूप से शराब बेचने के लिए ही आंदोलनकारियों ने शराब की दुकान हटाने के लिए आंदोलन किया। इस दुष्प्रचार व आंदोलनकारियों को उत्पीड़ित किये जाने के विरोध में संघर्ष समिति ने देवी थान, बसौली में बैठक कर क्षेत्र में पूर्ण शराबबंदी का संकल्प लिया।
बैठक में कहा गया कि शराब विक्रेता पुलिस प्रशासन व आबकारी विभाग की सह पर अवैध रूप से शराब बिकवा रहा है और अगले वर्ष पुनः बसौली में शराब की दुकानें खुलवाने के लिए माहौल बनवा रहा है। तय किया गया कि लोगों को एकजुट करते हुए इस षड़यंत्र का पर्दाफाश करने के साथ ही पूरे इलाके में पूर्ण नशाबंदी के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की जाये। 27 जनवरी को ग्राम प्रधान संगठन के तत्वावधान में महिलाओं ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप कर अपना पक्ष रखा। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया कि पुलिस-प्रशासन की सह पर शराब बेचने वालों को गिरफ्तार किया जाये और बेवजह आंदोलनकारियों का उत्पीड़न बंद किया जाये। भविष्य में इस इलाके में शराब की दुकानें न खोली जायें। यह भी चेतावनी दी गई कि उनकी माँगों पर सार्थक कार्यवाही न होने पर आंदोलन किया जायेगा।
क्षेत्र की जनता द्वारा गत वर्ष किये गये व्यापक संघर्ष के बाद 6 अप्रेल 2009 को जिला प्रशासन ने बसौली स्थित देशी व अंग्रेजी शराब की दुकानों को बंद कर दिया था। लेकिन पन्द्रहवीं लोक सभा के चुनावों के बाद शराब व्यवसायी को मोबाइल वैनों से शराब बेचने की अनुमति दे दी। इसका सर्वत्र विरोध हुआ। कनगाड़छीना से कफड़खान तक 15-20 कि.मीके दायरे में प्रशासन को कहीं भी शराब की दुकान खोलने जगह नहीं मिली। बाद में बसौली से छः-सात किमी. दूर सड़क किनारे वैन खड़ी कर शराब बेची जाने लगी। उस जंगल में शराब की बिक्री तो क्या होती, अलबत्ता शराब विक्रेता ने इलाके में अवैध रूप से शराब बिकवाने के लिए अराजक तत्वों के माध्यम से पहले से ही अवैध शराब बेचने वाले दुकानदारों को इस काम के लिए राजी कर लिया। शराब विराधी आंदोलन में शामिल महिलाओं को डराया-धमकाया जा रहा है। इससे यहाँ का माहौल फिर से खराब होने लगा है।
जिला प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाही न होने पर ‘शराब विरोधी संघर्ष समिति’ व ‘ग्राम प्रधान संगठन’ की ओर से क्षेत्र के जागरूक लोगों की एक बैठक बुला कर होली के बाद 7 मार्च को बसौली में एक विशाल प्रदर्शन कर शराब बिरोधी मुहिम को तेज करने का निर्णय लिया है। शासन-प्रशासन को आगाह किया गया कि वह क्षेत्र में चल रहे शराब विरोधी अभियान को सफल बनाने के लिए जनता को सहयोग करे और वैध व अवैध रूप से बेची जा रही शराब पर प्रतिबंध लगाए। पाटियाखाली के जंगल में सड़क किनारे मोबाइल वैनों द्वारा बेची जा रही शराब का विरोध करते हुए इसकी बिक्री पर तुरन्त रोक लगाने की माँग की। तय किया गया कि होली के बाद पूरे इलाके में जन सम्पर्क कर शराब विरोधी मुहिम को तेज किया जायेगा और कोई सार्थक कार्रवाही न होने पर बसौली प्रदर्शन के बाद जिला मुख्यालय में धरना दिया जायेगा।
क्षेत्र की जनता हतप्रभ है कि जिस मुस्तैदी से सरकार व उसका प्रशासन शराब बिकवाने में शराब विक्रेता की मदद कर रहा है, यही मुस्तैदी और सक्रियता वह आम जरूरतों को मुहैया कराने के लिए दिखाता तो इस इलाके की काया ही बदल जाती।